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Amroha News: अनफिट स्कूली वाहनों में सफर को मजबूर बच्चे, 50 से अधिक वाहन खतरनाक
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अमरोहा। जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही सामने आ रही है। तमाम प्रयासों के बावजूद 50 से अधिक अनफिट वाहनों में बच्चों को ढोया जा रहा है, जिससे उनकी जान जोखिम में है। जिले में करीब 600 से ज्यादा स्कूली वाहन पंजीकृत हैं, लेकिन पचास वाहन मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन मनमानी फीस वसूल कर बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। परिवहन विभाग ने अब सख्ती दिखाते हुए एक से 16 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में जिले करीब 692 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं, लेकिन सड़कों पर इससे कहीं ज्यादा स्कूली वाहन दौड़ रहे हैं। अमूमन हर मार्ग पर ऐसे खतरनाक वाहन फर्राटा भर रहे हैं। मैक्स, मारुति वैन और टाटा मैजिक सहित तमाम वाहनों में स्कूली बच्चों को ढोने का काम कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश की हालत खस्ता है। निजी स्कूल संचालकों ने छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था तो कर ली है, लेकिन उनकी फिटनेस कराने के लिए तैयार नहीं हैं।
जनपद की सड़कों पर दौड़ रहे अधिकतर स्कूली वाहन अनफिट हैं। इनमें बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहती है। जिले के कुछ स्कूलों को छोड़कर बाकी स्कूलों के वाहनों की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि, कई वाहनों में तो नियम विरुद्ध गैस किट भी लगी हैं और इनमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। साथ ही फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। फिलहाल करीब 50 वाहनों की फिटनेस नहीं हो सकी है। जबकि, यह सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
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स्कूल वाहन के लिए ये हैं मानक
एआरटीओ महेश शर्मा ने बताया कि चेकिंग के दौरान कोई भी वाहन मानक विहीन अनफिट, सीटिंग क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को लाते या ले-जाते पाया जाता है तो उस वाहन मालिक, विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जिसका समस्त उत्तरदायित्व वाहन मालिक और विद्यालय प्रबंधन का होगा। उन्होंने बताया कि स्कूल वाहन पीले रंग का हो, स्कूल का नाम लिखा हो, बसों में दो एवं वैन में एक अग्निशमन यंत्र अवश्य हो। फर्स्ट एड बॉक्स अवश्य हो। गति सीमा यंत्र लगा होना चाहिए। नियमानुसार सीट बेल्ट का प्रावधान है। प्रेशर हॉर्न मल्टीटोन हॉर्न नहीं लगा होना चाहिए। स्कूल बसों में आपातकालीन खिड़की द्वार अवश्य हों, स्कूल बसों की खिड़की पर स्टील की छड़ क्षैतिज लगी हो। स्कूल बसों में सीट के नीचे स्कूल बैग रखने की जगह भी होनी चाहिए। बसों के प्रवेश द्वार पर हैंडरेल लगा हो और वाहन पर पुलिस, फायर, एंबुलेंस, हॉस्पिटल, प्रबंधक, प्रधानाचार्य, चालक, परिचालक का नंबर अंकित होना अनिवार्य है।
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परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में जिले करीब 692 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं, लेकिन सड़कों पर इससे कहीं ज्यादा स्कूली वाहन दौड़ रहे हैं। अमूमन हर मार्ग पर ऐसे खतरनाक वाहन फर्राटा भर रहे हैं। मैक्स, मारुति वैन और टाटा मैजिक सहित तमाम वाहनों में स्कूली बच्चों को ढोने का काम कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश की हालत खस्ता है। निजी स्कूल संचालकों ने छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था तो कर ली है, लेकिन उनकी फिटनेस कराने के लिए तैयार नहीं हैं।
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जनपद की सड़कों पर दौड़ रहे अधिकतर स्कूली वाहन अनफिट हैं। इनमें बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहती है। जिले के कुछ स्कूलों को छोड़कर बाकी स्कूलों के वाहनों की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि, कई वाहनों में तो नियम विरुद्ध गैस किट भी लगी हैं और इनमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। साथ ही फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। फिलहाल करीब 50 वाहनों की फिटनेस नहीं हो सकी है। जबकि, यह सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
स्कूल वाहन के लिए ये हैं मानक
एआरटीओ महेश शर्मा ने बताया कि चेकिंग के दौरान कोई भी वाहन मानक विहीन अनफिट, सीटिंग क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को लाते या ले-जाते पाया जाता है तो उस वाहन मालिक, विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जिसका समस्त उत्तरदायित्व वाहन मालिक और विद्यालय प्रबंधन का होगा। उन्होंने बताया कि स्कूल वाहन पीले रंग का हो, स्कूल का नाम लिखा हो, बसों में दो एवं वैन में एक अग्निशमन यंत्र अवश्य हो। फर्स्ट एड बॉक्स अवश्य हो। गति सीमा यंत्र लगा होना चाहिए। नियमानुसार सीट बेल्ट का प्रावधान है। प्रेशर हॉर्न मल्टीटोन हॉर्न नहीं लगा होना चाहिए। स्कूल बसों में आपातकालीन खिड़की द्वार अवश्य हों, स्कूल बसों की खिड़की पर स्टील की छड़ क्षैतिज लगी हो। स्कूल बसों में सीट के नीचे स्कूल बैग रखने की जगह भी होनी चाहिए। बसों के प्रवेश द्वार पर हैंडरेल लगा हो और वाहन पर पुलिस, फायर, एंबुलेंस, हॉस्पिटल, प्रबंधक, प्रधानाचार्य, चालक, परिचालक का नंबर अंकित होना अनिवार्य है।