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Amroha News: गंगा की जमीनों पर लहलहा रही कमीशन की फसलें
Mon, 06 Jul 2026 02:20 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Mon, 06 Jul 2026 02:20 AM IST
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अमरोहा। गंगा की जमीन पर अवैध कब्जे का खेल संभल ही नहीं अमरोहा जिले में अधिकारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से चल रहा है। खादर क्षेत्र में गंगा और वन विभाग की जमीन पर भू-माफिया का कब्जा है। हजारों बीघा सरकारी जमीन पर कमीशन की फसलें लहलहा रही हैं। इस पूरे मामले में संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है।
हसनपुर तहसील क्षेत्र के जेबड़ा, बिहारीपुर और पथरा गांवों में वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे का मामला 2016 से चर्चा में आया था। आरोप है कि पहले भू-माफिया ने वन विभाग की भूमि पर लगे पेड़-पौधों को नष्ट कर सरसों की फसल बुवाई की थी। शिकायत के बाद मुख्य वन संरक्षक रुहेलखंड जोन बरेली ने प्रभागीय वन अधिकारी को भूमि को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कुछ दिन कार्रवाई के बाद अभियान ठंडा पड़ गया। विभाग की लापरवाही से भू-माफिया के हौसले बढ़ गए और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे बढ़ते गए।
स्थानीय लोगों का दावा है कि ग्राम जेबड़ा में वन विभाग के अभिलेखों में करीब 254 हेक्टेयर (लगभग चार हजार बीघा) भूमि दर्ज है, जबकि मौके पर काफी कम जंगल बचा है। आरोप है कि भू-माफिया संबंधित विभागों के अधिकारियों को कमीशन देकर हजारों बीघा भूमि खेती कर रहे हैं। दूसरी ओर विभाग का कहना है कि बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि गंगा की धारा में कट चुकी है। बिहारीपुर और पथरा क्षेत्र में भी वन विभाग की लगभग 1300 बीघा भूमि पर कब्जे के आरोप पहले सामने आ चुके हैं। तहसील प्रशासन ने भी फसल कुर्क करने और वन विभाग ने सर्वे कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक न तो व्यापक सर्वे पूरा हो सका और न ही कब्जामुक्त कराने की स्थायी कार्रवाई हो पाई। इससे सरकारी भूमि की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि गंगा किनारे की उपजाऊ भूमि की कीमत लगातार बढ़ने के कारण भू-माफिया सक्रिय हैं। हर वर्ष गंगा का प्रवाह बदलने के बाद बनने वाली नई जमीनों पर कब्जा कर खेती शुरू कर दी जाती है। चर्चा यह भी है कि गंगा किनारे के इलाके में कुछ प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों से जुड़ी जमीनें भी हैं।
...
यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिलती है तो तत्काल कार्रवाई कराई जाएगी। गंगा की जमीन पर कब्जा कर खेती करने के मामले में संबंधित अधिकारियों से दिखवाया जाएगा। अगर ऐसा कोई मामला सामने आएगा तो कार्रवाई होगी। -डॉ. नितिन गौड़, डीएम
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हसनपुर तहसील क्षेत्र के जेबड़ा, बिहारीपुर और पथरा गांवों में वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे का मामला 2016 से चर्चा में आया था। आरोप है कि पहले भू-माफिया ने वन विभाग की भूमि पर लगे पेड़-पौधों को नष्ट कर सरसों की फसल बुवाई की थी। शिकायत के बाद मुख्य वन संरक्षक रुहेलखंड जोन बरेली ने प्रभागीय वन अधिकारी को भूमि को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कुछ दिन कार्रवाई के बाद अभियान ठंडा पड़ गया। विभाग की लापरवाही से भू-माफिया के हौसले बढ़ गए और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे बढ़ते गए।
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स्थानीय लोगों का दावा है कि ग्राम जेबड़ा में वन विभाग के अभिलेखों में करीब 254 हेक्टेयर (लगभग चार हजार बीघा) भूमि दर्ज है, जबकि मौके पर काफी कम जंगल बचा है। आरोप है कि भू-माफिया संबंधित विभागों के अधिकारियों को कमीशन देकर हजारों बीघा भूमि खेती कर रहे हैं। दूसरी ओर विभाग का कहना है कि बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि गंगा की धारा में कट चुकी है। बिहारीपुर और पथरा क्षेत्र में भी वन विभाग की लगभग 1300 बीघा भूमि पर कब्जे के आरोप पहले सामने आ चुके हैं। तहसील प्रशासन ने भी फसल कुर्क करने और वन विभाग ने सर्वे कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक न तो व्यापक सर्वे पूरा हो सका और न ही कब्जामुक्त कराने की स्थायी कार्रवाई हो पाई। इससे सरकारी भूमि की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि गंगा किनारे की उपजाऊ भूमि की कीमत लगातार बढ़ने के कारण भू-माफिया सक्रिय हैं। हर वर्ष गंगा का प्रवाह बदलने के बाद बनने वाली नई जमीनों पर कब्जा कर खेती शुरू कर दी जाती है। चर्चा यह भी है कि गंगा किनारे के इलाके में कुछ प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों से जुड़ी जमीनें भी हैं।
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यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिलती है तो तत्काल कार्रवाई कराई जाएगी। गंगा की जमीन पर कब्जा कर खेती करने के मामले में संबंधित अधिकारियों से दिखवाया जाएगा। अगर ऐसा कोई मामला सामने आएगा तो कार्रवाई होगी। -डॉ. नितिन गौड़, डीएम