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Amroha News: करोड़ों खर्च कर डाले... इज्जतघरों पर बेशर्मी के ताले
Mon, 06 Jul 2026 02:23 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Mon, 06 Jul 2026 02:23 AM IST
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अमरोहा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों खर्च कर बनाए गए सामुदायिक शौचालयों पर लटके ताले व्यवस्था और प्रशासन पर सवालिया निशान लगाते हैं। ये ताले न सिर्फ स्वच्छता अभियान के दावों की पोल खोलते हैं, बल्कि आम जनता की परेशानी और सरकारी लापरवाही को भी उजागर करते हैं। हालात ये हैं कि लोगों को लघुशंका के लिए दीवारों का सहारा लेना पड़ता हैं।
स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने और खुले में शौच से मुक्त करने के उद्देश्य से जिले की 576 ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये की लागत से सामुदायिक शौचालय और स्नानघर बनाए गए थे। एक सामुदायिक शौचालय पर करीब डेढ़ से दो लाख रुपये खर्च किए गए थे। रविवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल की तो हकीकत नजर आई। जिले के अधिकांश सामुदायिक शौचालयों पर ताले लटके मिले। साथ ही जो खुले मिले वह जर्जर हो चुके हैं। कहीं गंदगी का अंबार लगा है तो कहीं पानी की ही व्यवस्था नहीं है। कई शौचालयों के टूटे दरवाजे और टंकियां क्षतिग्रस्त मिलीं।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद उन्हें सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा। कहा कि सामुदायिक शौचालय बंद होने की वजह से उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। यहां तक कि लघुशंका के लिए दीवारों का सहारा लेना पड़ता है।
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जोया ब्लॉक में चार गांवों में बंद मिले शौचालय
जोया ब्लॉक के बुढ़नपुर, कमालपुर जैद, सरकड़ी अजीज और सैंतली गांवों में सामुदायिक शौचालयों के मुख्य गेट पर ताले लटके मिले। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय हमेशा बंद रहते हैं। इससे उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। आरोप है कि नियमित संचालन और निगरानी के अभाव में लाखों रुपये की सरकारी योजना केवल शोपीस बनकर रह गई है।
हसनपुर और गंगेश्वरी क्षेत्र में भी बदहाल स्थिति
हसनपुर ब्लॉक के ग्राम देहरा मिलक में महिला शौचालय लंबे समय से बंद पड़ा है। पुरुष शौचालय की पानी की टंकी टूटी हुई है और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। दरवाजा भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। वहीं गंगेश्वरी ब्लॉक के रुखालू और बुरावली गांवों में भी सामुदायिक शौचालयों पर ताले लटके मिले।
कैलसा क्षेत्र में पानी और केयरटेकर की समस्या
कैलसा क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिहाली नारायण में सामुदायिक शौचालय की सफाई और पानी की व्यवस्था तो मिली, लेकिन केयरटेकर मौके पर मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने बताया कि वह सुबह सफाई कर ताला खोल देता है और शाम को बंद करने आता है। मिलक पापड़ी गांव में पुरुष शौचालय पर ताला लगा मिला, जबकि महिला और दिव्यांग शौचालय के दरवाजे टूटे हुए थे। फर्श भी क्षतिग्रस्त था और पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से यही स्थिति बनी हुई है और कोई केयरटेकर नियमित रूप से नहीं आता।
निगरानी और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए सामुदायिक शौचालयों की नियमित निगरानी नहीं हो रही है। कई स्थानों पर केयरटेकर नियुक्त होने के बावजूद शौचालय बंद रहते हैं। सफाई, पानी और रखरखाव की व्यवस्था न होने से लोग इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इससे स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अगर किसी सार्वजनिक शौचालय पर ताले लगे हैं तो संबंधित ग्राम प्रशासक और ग्राम पंचायत अधिकारियों से जांच कराकर ताले खुलवाए जाएंगे। साफ-सफाई की व्यवस्था भी कराई जाएगी। यह लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए हैं न की ताले लगाकर बंद करने के लिए। -नितिन कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी
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स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने और खुले में शौच से मुक्त करने के उद्देश्य से जिले की 576 ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये की लागत से सामुदायिक शौचालय और स्नानघर बनाए गए थे। एक सामुदायिक शौचालय पर करीब डेढ़ से दो लाख रुपये खर्च किए गए थे। रविवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल की तो हकीकत नजर आई। जिले के अधिकांश सामुदायिक शौचालयों पर ताले लटके मिले। साथ ही जो खुले मिले वह जर्जर हो चुके हैं। कहीं गंदगी का अंबार लगा है तो कहीं पानी की ही व्यवस्था नहीं है। कई शौचालयों के टूटे दरवाजे और टंकियां क्षतिग्रस्त मिलीं।
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ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद उन्हें सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा। कहा कि सामुदायिक शौचालय बंद होने की वजह से उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। यहां तक कि लघुशंका के लिए दीवारों का सहारा लेना पड़ता है।
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जोया ब्लॉक में चार गांवों में बंद मिले शौचालय
जोया ब्लॉक के बुढ़नपुर, कमालपुर जैद, सरकड़ी अजीज और सैंतली गांवों में सामुदायिक शौचालयों के मुख्य गेट पर ताले लटके मिले। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय हमेशा बंद रहते हैं। इससे उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। आरोप है कि नियमित संचालन और निगरानी के अभाव में लाखों रुपये की सरकारी योजना केवल शोपीस बनकर रह गई है।
हसनपुर और गंगेश्वरी क्षेत्र में भी बदहाल स्थिति
हसनपुर ब्लॉक के ग्राम देहरा मिलक में महिला शौचालय लंबे समय से बंद पड़ा है। पुरुष शौचालय की पानी की टंकी टूटी हुई है और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। दरवाजा भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। वहीं गंगेश्वरी ब्लॉक के रुखालू और बुरावली गांवों में भी सामुदायिक शौचालयों पर ताले लटके मिले।
कैलसा क्षेत्र में पानी और केयरटेकर की समस्या
कैलसा क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिहाली नारायण में सामुदायिक शौचालय की सफाई और पानी की व्यवस्था तो मिली, लेकिन केयरटेकर मौके पर मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने बताया कि वह सुबह सफाई कर ताला खोल देता है और शाम को बंद करने आता है। मिलक पापड़ी गांव में पुरुष शौचालय पर ताला लगा मिला, जबकि महिला और दिव्यांग शौचालय के दरवाजे टूटे हुए थे। फर्श भी क्षतिग्रस्त था और पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से यही स्थिति बनी हुई है और कोई केयरटेकर नियमित रूप से नहीं आता।
निगरानी और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए सामुदायिक शौचालयों की नियमित निगरानी नहीं हो रही है। कई स्थानों पर केयरटेकर नियुक्त होने के बावजूद शौचालय बंद रहते हैं। सफाई, पानी और रखरखाव की व्यवस्था न होने से लोग इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इससे स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अगर किसी सार्वजनिक शौचालय पर ताले लगे हैं तो संबंधित ग्राम प्रशासक और ग्राम पंचायत अधिकारियों से जांच कराकर ताले खुलवाए जाएंगे। साफ-सफाई की व्यवस्था भी कराई जाएगी। यह लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए हैं न की ताले लगाकर बंद करने के लिए। -नितिन कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी