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Amroha News: बीमा कंपनी क्लेम देने से मुकरी, अब नौ प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने होंगे 20 लाख रुपये
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अमरोहा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। किसान की मौत के बाद क्लेम नहीं देने वाली बीमा कंपनी को नौ प्रतिशत ब्याज समेत 20 लाख रुपये चुकाने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा कंपनी कंपनी में मानसिक व आर्थिक पीड़ा और वाद व्यय के रूप 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। बीमा कंपनी को यह धनराशि एक महीने के भीतर अदा करनी होगी।
मंडी धनौरा क्षेत्र के कैसरा गांव में रूप सिंह का परिवार रहता है। उनके किसान बेटे भोले की एक बीमा पॉलिसी थी। इस पॉलिसी की बीमित धनराशि 20 लाख रुपये थी। भोले के भाई टिंकू इसमें नामिनी दर्ज थे। पॉलिसी के लिए 7620 रुपये प्रीमियम जमा कराई गई थी। छह अगस्त 2023 को अचानक सीने में दर्द के बाद भोले की मौत हो गई।
इसके बाद टिंकू ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। लेकिन बीमा कंपनी ने 30 अक्तूबर 2023 को एक पत्र जारी कर दावा निरस्त कर दिया। कंपनी का आरोप था कि भोले ने महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई थी। इसलिए कंपनी ने प्रीमियम राशि वापस कर पॉलिसी निरस्त कर दी थी। हालांकि, टिंकू का कहना था कि पॉलिसी लेते समय सभी तथ्य सही बताए गए थे। उन्होंने किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाने से इन्कार किया।
बीमा कंपनी के अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की तो टिंकू ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। मामले को गंभीरता से लेकर आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुना। इसके बाद आयोग ने माना कि बीमाधारक भोले की मौत छह अगस्त 2023 को हुई थी। जबकि बीमा पॉलिसी निरस्त करने का पत्र 30 अक्तूबर 2023 को जारी किया गया। आयोग ने यह भी देखा कि कंपनी ने पॉलिसी निरस्त के आधारों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया था।
आयोग ने इसे गंभीर अनियमितता माना। साथ ही अपना फैसला सुनाया कि क्लेम आवेदन प्राप्त होने के बाद बिना ठोस कारण पॉलिसी निरस्त करना अनुचित है। आयोग ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी का स्पष्ट उदाहरण बताया। इसी आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी को क्लेम के 20 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए। साथ ही मानसिक व आर्थिक पीड़ा के लिए 15 हजार और वाद व्यय के रूप 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण है।
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मंडी धनौरा क्षेत्र के कैसरा गांव में रूप सिंह का परिवार रहता है। उनके किसान बेटे भोले की एक बीमा पॉलिसी थी। इस पॉलिसी की बीमित धनराशि 20 लाख रुपये थी। भोले के भाई टिंकू इसमें नामिनी दर्ज थे। पॉलिसी के लिए 7620 रुपये प्रीमियम जमा कराई गई थी। छह अगस्त 2023 को अचानक सीने में दर्द के बाद भोले की मौत हो गई।
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इसके बाद टिंकू ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। लेकिन बीमा कंपनी ने 30 अक्तूबर 2023 को एक पत्र जारी कर दावा निरस्त कर दिया। कंपनी का आरोप था कि भोले ने महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई थी। इसलिए कंपनी ने प्रीमियम राशि वापस कर पॉलिसी निरस्त कर दी थी। हालांकि, टिंकू का कहना था कि पॉलिसी लेते समय सभी तथ्य सही बताए गए थे। उन्होंने किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाने से इन्कार किया।
बीमा कंपनी के अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की तो टिंकू ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। मामले को गंभीरता से लेकर आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुना। इसके बाद आयोग ने माना कि बीमाधारक भोले की मौत छह अगस्त 2023 को हुई थी। जबकि बीमा पॉलिसी निरस्त करने का पत्र 30 अक्तूबर 2023 को जारी किया गया। आयोग ने यह भी देखा कि कंपनी ने पॉलिसी निरस्त के आधारों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया था।
आयोग ने इसे गंभीर अनियमितता माना। साथ ही अपना फैसला सुनाया कि क्लेम आवेदन प्राप्त होने के बाद बिना ठोस कारण पॉलिसी निरस्त करना अनुचित है। आयोग ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी का स्पष्ट उदाहरण बताया। इसी आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी को क्लेम के 20 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए। साथ ही मानसिक व आर्थिक पीड़ा के लिए 15 हजार और वाद व्यय के रूप 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण है।
