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Amroha News: नकली देसी घी बनाने वाले तीन दोषियों को सात साल की सजा
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अमरोहा। गजरौला में करीब 21 साल पहले नकली देसी घी बनाते पकड़े गए तीन दोषियों को अदालत ने सात-सात साल की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय की अदालत ने तीनों दोषियों पर तीन हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसला सुनाए जाने के समय तीनों दोषी जमानत पर बाहर थे, जिन्हें अब सजा के बाद जेल भेज दिया गया है।
यह मामला 19 अक्तूबर 2005 का है। गजरौला थाने की पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि मोहल्ला लक्ष्मीनगर में एक मकान में नकली देसी घी तैयार किया जा रहा है। सूचना पर पुलिस टीम ने खाद्य निरीक्षक के साथ मौके पर पहुंचकर छापा मारा।
वहां तीन लोग वनस्पति तेल और केमिकल (बटर फ्लेवर) की मदद से नकली देसी घी बनाते हुए पकड़े गए। पुलिस ने मौके से करीब 18 किलो वनस्पति तेल, चार किलो तैयार नकली घी, केमिकल से भरी बोतल, स्टोव, डिब्बे और अन्य उपकरण बरामद किए थे। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम शाकिर और आरिफ निवासी हरौड़ा थाना सिम्भावली गाजियाबाद और जाकिर निवासी लक्ष्मीनगर गजरौला बताए थे। तीनों के पास देसी घी बनाने का कोई वैध लाइसेंस नहीं था।
इस मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी व खाद्य अपमिश्रण अधिनियम समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद तीनों को न्यायालय में पेशकर जेल भेज दिया था। फिलहाल तीनों जमानत पर जेल से बाहर थे। पुलिस ने मजबूत साक्ष्यों के साथ तीनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने दोनोंं पक्षों के तर्काें को सुना।
बुधवार को कोर्ट ने मामले की आखिरी सुनवाई करते हुए आरोपी शाकिर, आरिफ और जाकिर को दोषी करार दिया। साथ ही तीनों को सात-सात साल की सजा सुनाई और एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। करीब दो दशक पुराने इस मामले में आए फैसले को मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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यह मामला 19 अक्तूबर 2005 का है। गजरौला थाने की पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि मोहल्ला लक्ष्मीनगर में एक मकान में नकली देसी घी तैयार किया जा रहा है। सूचना पर पुलिस टीम ने खाद्य निरीक्षक के साथ मौके पर पहुंचकर छापा मारा।
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वहां तीन लोग वनस्पति तेल और केमिकल (बटर फ्लेवर) की मदद से नकली देसी घी बनाते हुए पकड़े गए। पुलिस ने मौके से करीब 18 किलो वनस्पति तेल, चार किलो तैयार नकली घी, केमिकल से भरी बोतल, स्टोव, डिब्बे और अन्य उपकरण बरामद किए थे। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम शाकिर और आरिफ निवासी हरौड़ा थाना सिम्भावली गाजियाबाद और जाकिर निवासी लक्ष्मीनगर गजरौला बताए थे। तीनों के पास देसी घी बनाने का कोई वैध लाइसेंस नहीं था।
इस मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी व खाद्य अपमिश्रण अधिनियम समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद तीनों को न्यायालय में पेशकर जेल भेज दिया था। फिलहाल तीनों जमानत पर जेल से बाहर थे। पुलिस ने मजबूत साक्ष्यों के साथ तीनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने दोनोंं पक्षों के तर्काें को सुना।
बुधवार को कोर्ट ने मामले की आखिरी सुनवाई करते हुए आरोपी शाकिर, आरिफ और जाकिर को दोषी करार दिया। साथ ही तीनों को सात-सात साल की सजा सुनाई और एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। करीब दो दशक पुराने इस मामले में आए फैसले को मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।