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Auraiya News: बी. फार्मा छात्र चला रहा था अस्पताल, अधीक्षक ने किया सील
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 17 Jun 2026 12:23 AM IST
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फोटो-23-अस्पताल को सील करती स्वास्थ्य विभाग की टीम।संवाद
- फोटो : 1
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फफूंद (औरैया)। कस्बे के पाता बाईपास पर बिना पंजीकरण के संचालित किए जा रहे एक कथित अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। शिकायत मिलने पर दिबियापुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय आनंद ने टीम के साथ छापा मारकर अस्पताल को सील कर दिया।
बताया गया है कि बाईपास पर एक दुकान में एक बी.फार्मा का छात्र बिना किसी वैध पंजीकरण और चिकित्सकीय अनुमति के मरीजों का इलाज कर रहा था। शिकायत मिलने पर मंगलवार को अधीक्षक डॉ. विजय आनंद मौके पर पहुंचे तो एक युवक मरीजों को दवाइयां देता हुआ मिला।
अधीक्षक ने पूछताछ की तो उसने अपना नाम उमाशंकर और बी. फार्मा प्रथम वर्ष का छात्र बताया। जांच के दौरान अस्पताल संचालन से संबंधित कोई वैध पंजीकरण या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
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इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कथित अस्पताल को सील कर दिया और युवक को कड़ी चेतावनी दी। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। अधीक्षक ने बताया कि बिना पंजीकरण के अस्पताल का वीडियो वायरल हुआ है। जांच में क्लीनिक का संचालन पूरी तरह अवैध पाया गया है।
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सीएमओ कार्यालय के एक लिपिक की सेटिंग से चल रहा था खेल
सीएमओ कार्यालय में तैनात एक लिपिक को बी. फार्मा छात्र द्वारा अस्पताल चलाने की जानकारी थी लेकिन हर माह मोटी रकम पहुंचने पर उसके ऊपर कार्रवाई नहीं हो रही थी। वीडियो वायरल हुआ तो कार्रवाई हुई।
बताया गया है कि बाईपास पर एक दुकान में एक बी.फार्मा का छात्र बिना किसी वैध पंजीकरण और चिकित्सकीय अनुमति के मरीजों का इलाज कर रहा था। शिकायत मिलने पर मंगलवार को अधीक्षक डॉ. विजय आनंद मौके पर पहुंचे तो एक युवक मरीजों को दवाइयां देता हुआ मिला।
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अधीक्षक ने पूछताछ की तो उसने अपना नाम उमाशंकर और बी. फार्मा प्रथम वर्ष का छात्र बताया। जांच के दौरान अस्पताल संचालन से संबंधित कोई वैध पंजीकरण या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कथित अस्पताल को सील कर दिया और युवक को कड़ी चेतावनी दी। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। अधीक्षक ने बताया कि बिना पंजीकरण के अस्पताल का वीडियो वायरल हुआ है। जांच में क्लीनिक का संचालन पूरी तरह अवैध पाया गया है।
सीएमओ कार्यालय के एक लिपिक की सेटिंग से चल रहा था खेल
सीएमओ कार्यालय में तैनात एक लिपिक को बी. फार्मा छात्र द्वारा अस्पताल चलाने की जानकारी थी लेकिन हर माह मोटी रकम पहुंचने पर उसके ऊपर कार्रवाई नहीं हो रही थी। वीडियो वायरल हुआ तो कार्रवाई हुई।