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Auraiya News: रेफर होने वाले गंभीर मरीजों की मॉनिटरिंग कर रहा मेडिकल कॉलेज
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 12 Apr 2026 12:14 AM IST
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औरैया। मेडिकल कॉलेज चिचौली में आईसीयू के बेहतर इंतजाम के अभाव में गंभीर मरीजों के उपचार का अक्सर संकट रहता है। ऐसे में मरीजों को सैफई व कानपुर रेफर किया जाता है।
इन मरीजों को बिना दिक्कत सही समय पर रेफर सेंटर में बेहतर उपचार मिले। इसके लिए अब नवाचार के तहत तीमारदार व रेफर सेंटर के बीच संवाद करते हुए मेडिकल कॉलेज गंभीर मरीजों की मॉनिटरिंग कर रहा है।
मेडिकल कॉलेज में 23 विभागों की ओपीडी से लेकर वार्ड में स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। यहां पर खून की ज्यादा कमी वाले मरीजों से लेकर अन्य मरीजों के लिए आईसीयू के विशेष इंतजाम नहीं है। ऐसे में इन गंभीर मरीजों के उपचार के लिए हर माह कुछ केस चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। खास तौर पर महिला रोग विभाग में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं। जिन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज व कानपुर के हैलट रेफर किया जाता है।
अब इन मरीजों को समय रहते उपचार व जान बचाने की जद्दोजहद के लिए महिला रोग विभाग में एक नवाचार शुरू किया गया है। इसके लिए आने वाले ऐसे मरीजों की त्वरित जांच, केस डायरी से लेकर एंबुलेंस का इंतजाम कराते हुए रेफर सेंटर को पहले से मरीज की सूचना भेजी जा रही है।
एंबुलेंस में साथ जाने वाले कर्मचारियों को भी मरीज के खतरे के संबंध में अवगत कराया जा रहा है। समय रहते रेफर सेंटर पहुंचे मरीजों का उपचार करने में डॉक्टरों को आसानी होती है। मरीज के ठीक होने तक महिला रोग विभाग की ओर से लेकर मॉनिटरिंग की जा रही है। विभाग के इस नवाचार से तीमारदारों को काफी राहत मिल रही है।
महिला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पायल जादौन ने बताया कि रेफर होने वाले मरीज को समय रहते उपचार मिले। इसके लिए यह नवाचार शुरू किया गया है। रेफर सेंटर से संवाद व मरीज की जांचों से लेकर दिक्कत को साझा करते हुए पहले से अपडेट दी जा रही है। प्रत्येक माह आठ से 10 गंभीर मामलों में यह नवाचार कारगर काम कर रहा है।
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तीमारदारों की परेशानी और प्राइवेट अस्पतालों का जाल हो रहा खत्म
गंभीर मरीजों को लेकर चिचौली मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले तीमारदार रेफर होने की बात पर सहमे नजर आते हैं। तीमारदार दूसरों से सुझाव लेने पर काफी हद तक प्राइवेट अस्पतालों का रुख भी कर जाते थे लेकिन इस नवाचार के बाद तीमारदार सीधे जरूरी सुविधा से लैस सरकारी अस्पताल पहुंच रहे हैं। महिला रोग विभाग की ओर दिखाई गई राह के तहत मरीज को सही ठिकाना मिल जा रहा है। इस भटकाव के खत्म होने के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर पर भी विराम लगता नजर आ रहा है।
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महिला रोग विभाग की ओर से रेफर मरीजों के लिए शुरू की गई व्यवस्था सराहनीय है। गंभीर मरीज को सरकारी अस्पताल में सही समय पर इलाज मिल जा रहा है। ऐसे में जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। तीमारदारों का भटकाव कम हो जाता है। प्राइवेट अस्पताल जाने के मामले खत्म हो रहे हैं।
-डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज चिचौली
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इन मरीजों को बिना दिक्कत सही समय पर रेफर सेंटर में बेहतर उपचार मिले। इसके लिए अब नवाचार के तहत तीमारदार व रेफर सेंटर के बीच संवाद करते हुए मेडिकल कॉलेज गंभीर मरीजों की मॉनिटरिंग कर रहा है।
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मेडिकल कॉलेज में 23 विभागों की ओपीडी से लेकर वार्ड में स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। यहां पर खून की ज्यादा कमी वाले मरीजों से लेकर अन्य मरीजों के लिए आईसीयू के विशेष इंतजाम नहीं है। ऐसे में इन गंभीर मरीजों के उपचार के लिए हर माह कुछ केस चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। खास तौर पर महिला रोग विभाग में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं। जिन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज व कानपुर के हैलट रेफर किया जाता है।
अब इन मरीजों को समय रहते उपचार व जान बचाने की जद्दोजहद के लिए महिला रोग विभाग में एक नवाचार शुरू किया गया है। इसके लिए आने वाले ऐसे मरीजों की त्वरित जांच, केस डायरी से लेकर एंबुलेंस का इंतजाम कराते हुए रेफर सेंटर को पहले से मरीज की सूचना भेजी जा रही है।
एंबुलेंस में साथ जाने वाले कर्मचारियों को भी मरीज के खतरे के संबंध में अवगत कराया जा रहा है। समय रहते रेफर सेंटर पहुंचे मरीजों का उपचार करने में डॉक्टरों को आसानी होती है। मरीज के ठीक होने तक महिला रोग विभाग की ओर से लेकर मॉनिटरिंग की जा रही है। विभाग के इस नवाचार से तीमारदारों को काफी राहत मिल रही है।
महिला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पायल जादौन ने बताया कि रेफर होने वाले मरीज को समय रहते उपचार मिले। इसके लिए यह नवाचार शुरू किया गया है। रेफर सेंटर से संवाद व मरीज की जांचों से लेकर दिक्कत को साझा करते हुए पहले से अपडेट दी जा रही है। प्रत्येक माह आठ से 10 गंभीर मामलों में यह नवाचार कारगर काम कर रहा है।
तीमारदारों की परेशानी और प्राइवेट अस्पतालों का जाल हो रहा खत्म
गंभीर मरीजों को लेकर चिचौली मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले तीमारदार रेफर होने की बात पर सहमे नजर आते हैं। तीमारदार दूसरों से सुझाव लेने पर काफी हद तक प्राइवेट अस्पतालों का रुख भी कर जाते थे लेकिन इस नवाचार के बाद तीमारदार सीधे जरूरी सुविधा से लैस सरकारी अस्पताल पहुंच रहे हैं। महिला रोग विभाग की ओर दिखाई गई राह के तहत मरीज को सही ठिकाना मिल जा रहा है। इस भटकाव के खत्म होने के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर पर भी विराम लगता नजर आ रहा है।
महिला रोग विभाग की ओर से रेफर मरीजों के लिए शुरू की गई व्यवस्था सराहनीय है। गंभीर मरीज को सरकारी अस्पताल में सही समय पर इलाज मिल जा रहा है। ऐसे में जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। तीमारदारों का भटकाव कम हो जाता है। प्राइवेट अस्पताल जाने के मामले खत्म हो रहे हैं।
-डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज चिचौली