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Auraiya News: फसलों पर मौसम का सितम, मरहम पर भारी सरकारी नियम
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 08 Apr 2026 12:17 AM IST
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फोटो-27-खेत में रखे गेहूं के गट्ठर और भरा पानी।
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औरैया। बीते चार और पांच अप्रैल को हुई बारिश व ओलावृष्टि से जिले में गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों की मांग पर जिला प्रशासन ने फसलों में हुए नुकसान का सर्वे पूरा करा लिया है।
मंगलवार को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार जिले के 20 गांवों में कुल 431 हेक्टेयर गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। इस सरकारी सर्वे में फसल नुकसान का दायरा तीन प्रतिशत से लेकर 33 प्रतिशत तक आंका गया है।
सर्वे के बाद मौसम की मार से परेशान किसानों को मुआवजा मिलने की राह में सरकारी नियमों की अड़चन सामने आ गई है। दरअसल मुआवजे के लिए नुकसान का प्रतिशत 30 से 35 होना चाहिए। सरकारी सर्वे में कुछ ही गांवों में नुकसान का प्रतिशत इस आंकड़े को छू रहा है। ऐसे में किसानों को मुआवजा मिलने पर भी संकट दिख रहा है।
सदर ब्लॉक के गांव क्योंटरा में चार अप्रैल की शाम को बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई थी। पांच अप्रैल को बिधूना क्षेत्र में भी बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई। मौसम की इस मार से गेहूं की फसलें खेतों में ही गिरकर तहस-नहस हो गईं। कई खेतों में पानी भर जाने से पकी हुई गेहूं की फसल डूब गई। जिला प्रशासन ने इस नुकसान को देखते हुए लेखपालों के जरिए सर्वे शुरू कराया था। मंगलवार को आई रिपोर्ट के अनुसार जिले के 20 गांवों की 431 हेक्टेयर फसल में नुकसान पाया गया है।
सर्वे में तीन से लेकर 33 प्रतिशत तक का नुकसान सामने आया है। सबसे ज्यादा नुकसान भाऊपुर ग्राम पंचायत के गांव क्योंटरा में मिला। यहां की 80 हेक्टेयर फसल में करीब 33 फीसदी नुकसान पाया गया जबकि सबसे कम तीन प्रतिशत नुकसान एरवाकटरा के गांव बढि़न में मिला। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार आगे भी बारिश की आशंका जताई गई है। अगर बारिश होती है तो नुकसान का प्रतिशत बढ़ सकता है।
सर्वे की तैयार रिपोर्ट के आधार पर अब शासन में रिपोर्ट भेजी जाएगी। फसल बीमा कराने वाले किसानों को तो बीमा से कुछ हद तक राहत मिल जाएगी लेकिन बीमा न कराने वाले किसानों को मुआवजा मिलने की उम्मीद कम दिख रही है। सरकारी मानकों के अनुसार 30 से 35 प्रतिशत नुकसान होने पर ही मुआवजे का प्रावधान होता है। ऐसे में फसल नुकसान को लेकर सरकारी मदद की उम्मीद लगा रहे किसानों को मायूसी हाथ लग सकती है।
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शनिवार को चार गांवों में हुआ नुकसान
चार अप्रैल को पहली बार तेज बारिश ने दस्तक दी थी। इसके साथ क्योंटरा गांव में ओलावृष्टि भी हुई। इस बारिश की चपेट में सदर ब्लॉक के चार गांव आए थे। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार कस्बा खानपुर का गांव मड़ापुर और भाऊपुर के गांव क्योंटरा, मड़नई मुस्तकिल व भदोरा इस दिन प्रभावित हुए। इन गांवों में गेहूं की फसल को काफी क्षति पहुंची।
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रविवार की बारिश से तीन ब्लॉकों में नुकसान
फसल नुकसान के सर्वे में पांच अप्रैल को हुई बारिश से तीन ब्लॉकों में नुकसान पाया गया। इनमें एरवाकटरा, बिधूना और सहार ब्लॉक शामिल हैं। एरवाकटरा के गांव जगतपुर, बढि़न हरचंद्रपुर और रठगांव में फसलें प्रभावित हुईं। बिधूना ब्लॉक में कुर्सी, हरदू, मल्हौसी, बेला, कैथावा और बंथरा गांव में नुकसान दर्ज किया गया। वहीं, सहार ब्लॉक के डमरपुर, ओरो, मढाहादापुर, याकूबपुर, पट्टी तोरन और पट्टी ज्ञानी गांव भी बारिश की चपेट में आए। इन सभी क्षेत्रों में गेहूं की फसल को अलग-अलग स्तर पर क्षति पहुंची है।
फसलों की सर्वे रिपोर्ट में 20 गांवों की 431 हेक्टेयर फसल में नुकसान की बात सामने आई है। तीन से लेकर 33 प्रतिशत तक नुकसान पाया गया है। मुआवजे के लिए 30 से 35 प्रतिशत नुकसान का प्रावधान है। शासन को नुकसान की रिपोर्ट भेजी जा रही है।
- शैलेंद्र कुमार वर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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मंगलवार को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार जिले के 20 गांवों में कुल 431 हेक्टेयर गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। इस सरकारी सर्वे में फसल नुकसान का दायरा तीन प्रतिशत से लेकर 33 प्रतिशत तक आंका गया है।
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सर्वे के बाद मौसम की मार से परेशान किसानों को मुआवजा मिलने की राह में सरकारी नियमों की अड़चन सामने आ गई है। दरअसल मुआवजे के लिए नुकसान का प्रतिशत 30 से 35 होना चाहिए। सरकारी सर्वे में कुछ ही गांवों में नुकसान का प्रतिशत इस आंकड़े को छू रहा है। ऐसे में किसानों को मुआवजा मिलने पर भी संकट दिख रहा है।
सदर ब्लॉक के गांव क्योंटरा में चार अप्रैल की शाम को बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई थी। पांच अप्रैल को बिधूना क्षेत्र में भी बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई। मौसम की इस मार से गेहूं की फसलें खेतों में ही गिरकर तहस-नहस हो गईं। कई खेतों में पानी भर जाने से पकी हुई गेहूं की फसल डूब गई। जिला प्रशासन ने इस नुकसान को देखते हुए लेखपालों के जरिए सर्वे शुरू कराया था। मंगलवार को आई रिपोर्ट के अनुसार जिले के 20 गांवों की 431 हेक्टेयर फसल में नुकसान पाया गया है।
सर्वे में तीन से लेकर 33 प्रतिशत तक का नुकसान सामने आया है। सबसे ज्यादा नुकसान भाऊपुर ग्राम पंचायत के गांव क्योंटरा में मिला। यहां की 80 हेक्टेयर फसल में करीब 33 फीसदी नुकसान पाया गया जबकि सबसे कम तीन प्रतिशत नुकसान एरवाकटरा के गांव बढि़न में मिला। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार आगे भी बारिश की आशंका जताई गई है। अगर बारिश होती है तो नुकसान का प्रतिशत बढ़ सकता है।
सर्वे की तैयार रिपोर्ट के आधार पर अब शासन में रिपोर्ट भेजी जाएगी। फसल बीमा कराने वाले किसानों को तो बीमा से कुछ हद तक राहत मिल जाएगी लेकिन बीमा न कराने वाले किसानों को मुआवजा मिलने की उम्मीद कम दिख रही है। सरकारी मानकों के अनुसार 30 से 35 प्रतिशत नुकसान होने पर ही मुआवजे का प्रावधान होता है। ऐसे में फसल नुकसान को लेकर सरकारी मदद की उम्मीद लगा रहे किसानों को मायूसी हाथ लग सकती है।
शनिवार को चार गांवों में हुआ नुकसान
चार अप्रैल को पहली बार तेज बारिश ने दस्तक दी थी। इसके साथ क्योंटरा गांव में ओलावृष्टि भी हुई। इस बारिश की चपेट में सदर ब्लॉक के चार गांव आए थे। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार कस्बा खानपुर का गांव मड़ापुर और भाऊपुर के गांव क्योंटरा, मड़नई मुस्तकिल व भदोरा इस दिन प्रभावित हुए। इन गांवों में गेहूं की फसल को काफी क्षति पहुंची।
रविवार की बारिश से तीन ब्लॉकों में नुकसान
फसल नुकसान के सर्वे में पांच अप्रैल को हुई बारिश से तीन ब्लॉकों में नुकसान पाया गया। इनमें एरवाकटरा, बिधूना और सहार ब्लॉक शामिल हैं। एरवाकटरा के गांव जगतपुर, बढि़न हरचंद्रपुर और रठगांव में फसलें प्रभावित हुईं। बिधूना ब्लॉक में कुर्सी, हरदू, मल्हौसी, बेला, कैथावा और बंथरा गांव में नुकसान दर्ज किया गया। वहीं, सहार ब्लॉक के डमरपुर, ओरो, मढाहादापुर, याकूबपुर, पट्टी तोरन और पट्टी ज्ञानी गांव भी बारिश की चपेट में आए। इन सभी क्षेत्रों में गेहूं की फसल को अलग-अलग स्तर पर क्षति पहुंची है।
फसलों की सर्वे रिपोर्ट में 20 गांवों की 431 हेक्टेयर फसल में नुकसान की बात सामने आई है। तीन से लेकर 33 प्रतिशत तक नुकसान पाया गया है। मुआवजे के लिए 30 से 35 प्रतिशत नुकसान का प्रावधान है। शासन को नुकसान की रिपोर्ट भेजी जा रही है।
- शैलेंद्र कुमार वर्मा, जिला कृषि अधिकारी