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Azamgarh News: बदलते मौसम और प्रदूषण से दोगुने हुए अस्थमा के मरीज
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जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद
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बलरामपुर। जिला अस्पताल आजमगढ़ की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। फिजिशियन डॉ. आरके कुशवाहा ने बताया कि ओपीडी में रोज 50 से 60 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें 18 से 20 मरीज अस्थमा (दमा) से पीड़ित होते हैं। बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण से सांस संबंधी बीमारी से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। पहले अस्थमा पीड़ित 8 से 10 मरीज ही आते थे।
डॉ. आरके कुशवाहा ने बताया कि अस्थमा एक दीर्घकालिक श्वसन रोग है। इसमें सांस की नलियों में सूजन और संकुचन हो जाता है। इससे मरीज को सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, सीने में जकड़न और घरघराहट जैसी समस्याएं होती हैं। उन्होंने कहा कि मौसमी बदलाव, धूल-प्रदूषण, ठंडी हवा, धूम्रपान और एलर्जी इसके प्रमुख ट्रिगर हैं।
इस प्रकार करें बचाव-
घर में धूल और एलर्जी पैदा करने वाली वस्तुओं से दूरी बनाए रखें। नियमित सफाई करें।
धूम्रपान से पूरी तरह बचें और धूम्रपान करने वालों के संपर्क में न रहें।
प्रदूषित क्षेत्रों में बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें, विशेषकर सुबह-शाम ।
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से लें, स्वयं दवा बंद न करें।
संतुलित आहार लें, जिसमें विटामिन-सी और ई से भरपूर फल व सब्जियां शामिल हों।
हल्का व्यायाम, योग और सैर फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा परिश्रम से बचें।
सांस फूलना, लगातार खांसी या सीने में दर्द जैसी शिकायत हो तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। समय पर उपचार से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। लोगों से अपील की कि छोटी-छोटी सावधानियों से अस्थमा के हमलों को रोका जा सकता है। जिला अस्पताल में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं और मरीजों को समय पर उपचार दिया जा रहा है।-डाॅ. आरके कुशवाहा
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डॉ. आरके कुशवाहा ने बताया कि अस्थमा एक दीर्घकालिक श्वसन रोग है। इसमें सांस की नलियों में सूजन और संकुचन हो जाता है। इससे मरीज को सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, सीने में जकड़न और घरघराहट जैसी समस्याएं होती हैं। उन्होंने कहा कि मौसमी बदलाव, धूल-प्रदूषण, ठंडी हवा, धूम्रपान और एलर्जी इसके प्रमुख ट्रिगर हैं।
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इस प्रकार करें बचाव-
घर में धूल और एलर्जी पैदा करने वाली वस्तुओं से दूरी बनाए रखें। नियमित सफाई करें।
धूम्रपान से पूरी तरह बचें और धूम्रपान करने वालों के संपर्क में न रहें।
प्रदूषित क्षेत्रों में बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें, विशेषकर सुबह-शाम ।
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से लें, स्वयं दवा बंद न करें।
संतुलित आहार लें, जिसमें विटामिन-सी और ई से भरपूर फल व सब्जियां शामिल हों।
हल्का व्यायाम, योग और सैर फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा परिश्रम से बचें।
सांस फूलना, लगातार खांसी या सीने में दर्द जैसी शिकायत हो तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। समय पर उपचार से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। लोगों से अपील की कि छोटी-छोटी सावधानियों से अस्थमा के हमलों को रोका जा सकता है। जिला अस्पताल में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं और मरीजों को समय पर उपचार दिया जा रहा है।-डाॅ. आरके कुशवाहा