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Azamgarh News: बसपा नेता कलामुद्दीन हत्याकांड का मुख्य आरोपी मुठभेड़ में ढेर, 9 प्राथमिकी थी दर्ज
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बसपा नेता कलामुद्दीन की फाइल फोटो। संवाद
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मेंहनगर। उत्तर प्रदेश एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने खुंदनपुर निवासी बसपा नेता कलामुद्दीन की हत्या के मुख्य आरोपी, एक लाख रुपये के इनामी मुस्तफिजुल रहमान उर्फ बाबू को मुठभेड़ में मार गिराया है। मुस्तफिजुल पर कलामुद्दीन की हत्या सहित नौ प्राथमिकी दर्ज थी। बसपा नेता कलामुद्दीन निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। लेकिन उनको हार का सामना करना पड़ा था। थाना प्रभारी निहार नंदन कुमार ने बताया कि मुस्तफिजुल के खिलाफ साल 2003 में चोरी का पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। साल 2011 में हत्या का प्रयास, साल 2012 में हत्या, साल 2021 में कलामुद्दीन की हत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसके अलावा जिले के विभिन्न थानों में पांच प्राथमिकी दर्ज थी। खुंदनपुर के ग्राम प्रधान और मृत बसपा नेता कलामुद्दीन के बेटे फुरकान ने बताया कि आरोपी मुस्तफिजुल का उनके परिवार से प्रधान के चुनाव के दौरान रंजिश हुई थी। मां शमीमा खातून पांच बार ग्राम प्रधान रह चुकी हैं। आरोपी चुनावी रंजिश में उनके पिता की हत्या किया था। अब उसे उसके कर्मों का फल मिला है।
मुख्तार अंसारी गिरोह का शूटर था मुस्तफिजुल
रामनगर करजहा से कुशीनगर जाने वाली सड़क पर सोमवार देर रात एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया मुस्तफिजुल हसन उर्फ बाबू मुख्तार अंसारी गिरोह का सक्रिय शूटर था। मुस्तफिजुल पर हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश समेत कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उस पर एडीजी वाराणसी जोन की ओर से एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
एसटीएफ इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह के अनुसार मुस्तफिजुल हसन का नाम पूर्वांचल के कुख्यात अपराधियों में शामिल था। वह मुख्तार गिरोह से जुड़ा हुआ था और गिरोह के खास शूटर अलीशेर के साथ मिलकर कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दे चुका था। वर्ष 2021 में उसने अलीशेर के साथ मिलकर आजमगढ़ के मेहनगर क्षेत्र में बसपा नेता कलामुद्दीन की हत्या की थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद से वह फरार चल रहा था। मामले में उसके खिलाफ कुर्की और उद्घोषणा की कार्रवाई भी हो चुकी थी। मुस्तफिजुल का आपराधिक सफर वर्ष 2008 में शुरू हुआ, जब उसने पुरानी रंजिश में अपने ही गांव के निवासी कलामुद्दीन पर गोली चलाकर जानलेवा हमला किया। इस मामले में उसके खिलाफ हत्या के प्रयास समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद वर्ष 2011 में उसने गांव के ही एहतसाम हसन पर दिनदहाड़े फायरिंग कर जानलेवा हमला किया और फरार हो गया। इस मामले में भी पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी।
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फरारी के दौरान ही वर्ष 2012 में उसने अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर गांव के इरशाद आलम की हत्या कर दी। हत्या के इस मामले में भी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन वह पुलिस की पकड़ से दूर रहा। वर्ष 2013 में न्यायालय ने धारा 82 और 83 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई करते हुए उसे मफरूर घोषित कर दिया था। एसटीएफ की कार्रवाई के साथ पूर्वांचल के एक लंबे समय से फरार और इनामी अपराधी का अंत हो गया। पुलिस का मानना है कि उसकी मौत से कई लंबित मामलों की कड़ियां सामने आने की संभावना है और मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े अपराधों की जांच को भी नई दिशा मिल सकती है।
पुलिस को चकमा देकर भाग गया था
लगातार फरार रहने के बावजूद मुस्तफिजुल ने अपराध का सिलसिला नहीं छोड़ा। वर्ष 2021 में बसपा नेता कलामुद्दीन की हत्या के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया। करीब 15 वर्षों तक गिरफ्तारी से बचते रहने के बाद वर्ष 2024 में आजमगढ़ पुलिस ने उसे गुजरात के वापी से गिरफ्तार कर लिया। हालांकि न्यायालय में पेशी के लिए उत्तर प्रदेश लाते समय वह महाराष्ट्र के अमरावती ग्रामीण क्षेत्र में पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इस संबंध में महाराष्ट्र के नांदगांव खंडेश्वर थाने में उसके खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
आजमगढ़ के व्यापारी की हत्या की फिराक में था बाबू
एसटीएफ की अभिसूचना में खुलासा हुआ कि एक लाख का इनामी बदमाश मुस्तफिजुल हसन उर्फ बाबू गोरखपुर में अपने साथी से मिलने पहुंच रहा था और आजमगढ़ के एक प्रतिष्ठित व्यापारी की हत्या की साजिश रच चुका था। सूचना पर एसटीएफ ने रामनगर करजहा-कुशीनगर मार्ग पर घेराबंदी की। रोकने का प्रयास करने पर बाबू ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें मुख्य आरक्षी महेंद्र सिंह घायल हो गए और एक गोली आरक्षी श्रीराम सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट में लगी। जवाबी कार्रवाई में बाबू घायल हुआ और जिला अस्पताल गोरखपुर में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
सिर में लगी गोली से हुई थी इनामी बदमाश की मौत
मुठभेड़ में मारे गए बदमाश मुस्तफिजुल हसन उर्फ बाबू की मौत सिर में लगी गोली से हुई थी। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस में तीन डॉक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उसके शरीर में दो गोलियां लगी थीं। एक गोली दाहिने पैर में लगी थी, जो आर-पार निकल गई थी। दूसरी गोली दाहिनी ओर सिर में लगी और वह भी पार हो गई।
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मुख्तार अंसारी गिरोह का शूटर था मुस्तफिजुल
रामनगर करजहा से कुशीनगर जाने वाली सड़क पर सोमवार देर रात एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया मुस्तफिजुल हसन उर्फ बाबू मुख्तार अंसारी गिरोह का सक्रिय शूटर था। मुस्तफिजुल पर हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश समेत कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उस पर एडीजी वाराणसी जोन की ओर से एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
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एसटीएफ इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह के अनुसार मुस्तफिजुल हसन का नाम पूर्वांचल के कुख्यात अपराधियों में शामिल था। वह मुख्तार गिरोह से जुड़ा हुआ था और गिरोह के खास शूटर अलीशेर के साथ मिलकर कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दे चुका था। वर्ष 2021 में उसने अलीशेर के साथ मिलकर आजमगढ़ के मेहनगर क्षेत्र में बसपा नेता कलामुद्दीन की हत्या की थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद से वह फरार चल रहा था। मामले में उसके खिलाफ कुर्की और उद्घोषणा की कार्रवाई भी हो चुकी थी। मुस्तफिजुल का आपराधिक सफर वर्ष 2008 में शुरू हुआ, जब उसने पुरानी रंजिश में अपने ही गांव के निवासी कलामुद्दीन पर गोली चलाकर जानलेवा हमला किया। इस मामले में उसके खिलाफ हत्या के प्रयास समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद वर्ष 2011 में उसने गांव के ही एहतसाम हसन पर दिनदहाड़े फायरिंग कर जानलेवा हमला किया और फरार हो गया। इस मामले में भी पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी।
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फरारी के दौरान ही वर्ष 2012 में उसने अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर गांव के इरशाद आलम की हत्या कर दी। हत्या के इस मामले में भी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन वह पुलिस की पकड़ से दूर रहा। वर्ष 2013 में न्यायालय ने धारा 82 और 83 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई करते हुए उसे मफरूर घोषित कर दिया था। एसटीएफ की कार्रवाई के साथ पूर्वांचल के एक लंबे समय से फरार और इनामी अपराधी का अंत हो गया। पुलिस का मानना है कि उसकी मौत से कई लंबित मामलों की कड़ियां सामने आने की संभावना है और मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े अपराधों की जांच को भी नई दिशा मिल सकती है।
पुलिस को चकमा देकर भाग गया था
लगातार फरार रहने के बावजूद मुस्तफिजुल ने अपराध का सिलसिला नहीं छोड़ा। वर्ष 2021 में बसपा नेता कलामुद्दीन की हत्या के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया। करीब 15 वर्षों तक गिरफ्तारी से बचते रहने के बाद वर्ष 2024 में आजमगढ़ पुलिस ने उसे गुजरात के वापी से गिरफ्तार कर लिया। हालांकि न्यायालय में पेशी के लिए उत्तर प्रदेश लाते समय वह महाराष्ट्र के अमरावती ग्रामीण क्षेत्र में पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इस संबंध में महाराष्ट्र के नांदगांव खंडेश्वर थाने में उसके खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
आजमगढ़ के व्यापारी की हत्या की फिराक में था बाबू
एसटीएफ की अभिसूचना में खुलासा हुआ कि एक लाख का इनामी बदमाश मुस्तफिजुल हसन उर्फ बाबू गोरखपुर में अपने साथी से मिलने पहुंच रहा था और आजमगढ़ के एक प्रतिष्ठित व्यापारी की हत्या की साजिश रच चुका था। सूचना पर एसटीएफ ने रामनगर करजहा-कुशीनगर मार्ग पर घेराबंदी की। रोकने का प्रयास करने पर बाबू ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें मुख्य आरक्षी महेंद्र सिंह घायल हो गए और एक गोली आरक्षी श्रीराम सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट में लगी। जवाबी कार्रवाई में बाबू घायल हुआ और जिला अस्पताल गोरखपुर में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
सिर में लगी गोली से हुई थी इनामी बदमाश की मौत
मुठभेड़ में मारे गए बदमाश मुस्तफिजुल हसन उर्फ बाबू की मौत सिर में लगी गोली से हुई थी। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस में तीन डॉक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उसके शरीर में दो गोलियां लगी थीं। एक गोली दाहिने पैर में लगी थी, जो आर-पार निकल गई थी। दूसरी गोली दाहिनी ओर सिर में लगी और वह भी पार हो गई।