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Azamgarh Ground Report: कभी अपराध की छवि रखने वाले आजमगढ़ की कितनी बदली सूरत? इस रिपोर्ट में जानें जमीनी हकीकत
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sun, 29 Mar 2026 04:25 PM IST
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सार
अमर उजाला की टीम जमीनी हकीकत जानने आजमगढ़ पहुंची। कभी अपराध की छवि वाले इस जिले की कितनी सूरत बदली है? इस रिपोर्ट में लोगों की राय, बदलाव और कमियों की पूरी तस्वीर सामने रखी गई है।
यूपी के आजमगढ़ में अमर उजाला की टीम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो चुकी है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार अपने कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों और योजनाओं को आधार बनाकर दोबारा सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरने में जुटा है।
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इन्हीं दावों और आरोपों की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रही है। मकसद यह समझना है कि जमीनी स्तर पर लोगों ने क्या बदलाव महसूस किए हैं? किन क्षेत्रों में अब भी सुधार की गुंजाइश बनी हुई है। इसी कड़ी में टीम आजमगढ़ जिले में पहुंची। कभी अपराध और आतंक की छवि से पहचाने जाने वाला आजमगढ़ अब कितना बदला है?
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आवक पंचायत में जानें क्या-कुछ बदला
अमर उजाला की टीम आजमगढ़ के आवक ग्राम पंचायत पहुंची, जहां विकास कार्यों को करीब से परखा गया। यहां ग्राम प्रधान जाहिद खान ने बताया कि पंचायत भवन में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि एसआईआर के दौरान आसपास के 30 से 40 गांवों के लिए यही केंद्र बनाया गया था। पंचायत स्तर पर ही आधार कार्ड, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल जैसी सुविधाएं ग्रामीणों को आसानी से मिल रही हैं। जाहिद खान के अनुसार, उन्हें राज्य सरकार और जिलाधिकारी की ओर से प्रमाण पत्र भी मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का खास ध्यान ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने पर है, ताकि लोगों को हर जरूरी सुविधा गांव स्तर पर ही मिल सके। इसके लिए उन्होंने प्रदेश सरकार का आभार भी जताया।
जानें बुनकरों का सूरत-ए-हाल
आजमगढ़ में बुनकरों के लिए ओडीओपी योजना वरदान साबित हो रही है। खासकर मुबारकपुर की सिल्क इंडस्ट्री को इससे नई रफ्तार मिली है। मुबारकपुर अपनी खूबसूरत रेशमी साड़ियों के लिए जाना जाता है, जो यहां की पहचान बन चुकी हैं। बुनकरों के लिए यह सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है। हजारों परिवार इस काम से जुड़े हैं और यहां तैयार होने वाली साड़ियों की मांग देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच चुकी है।
दुनिया में मशहूर है आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी
अमर उजाला की टीम ने आजमगढ़ की मशहूर ब्लैक पॉटरी से जुड़े कारीगरों से बातचीत की। कारीगरों ने बताया कि ओडीओपी योजना में शामिल होने के बाद इस कला को नई उड़ान मिली है और पहले जो परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो रही थी, वह अब फिर से जीवंत हो गई है। उन्होंने कहा कि योजना के चलते अब लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं और कारीगर उन्हें पूरा करने में जुटे हैं। पहले जो लोग रोजगार के लिए पलायन कर रहे थे, वे अब वापस लौटकर इस काम से जुड़ रहे हैं। आज ब्लैक पॉटरी का कारोबार 80 से 90 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और पहचान दोनों मजबूत हुए हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में आजमगढ़ ने क्या पाया?
अमर उजाला की टीम से बातचीत में महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने बताया कि पहले इस बड़े क्षेत्र में कोई विश्वविद्यालय नहीं था, जिससे छात्रों को दूर-दराज के शहरों में जाकर पढ़ाई करनी पड़ती थी और खर्च भी बढ़ता था। उन्होंने कहा कि अब विश्वविद्यालय खुलने से छात्रों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर शिक्षा मिल रही है और एआई जैसे आधुनिक विषयों पर भी काम किया जा रहा है। वहीं छात्रा संजना ने बताया कि पहले पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता था, लेकिन अब सुविधाएं बेहतर हो गई हैं, खासकर छात्राओं के लिए यह काफी लाभकारी साबित हो रहा है।