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Azamgarh News: मैं मां नहीं बन सकती..इसलिए जा रही, आस टूटने पर खत्म कर ली जिंदगी
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जहानागंज। थाना क्षेत्र के बसगीत गांव की कविता (25) ने शनिवार दोपहर करीब एक बजे अपने कमरे में साड़ी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। शादी को अभी सिर्फ 24 महीने ही हुए थे, लेकिन मां न बन पाने के दर्द ने तोड़ दिया तो उसने जिंदगी खत्म कर ली। कविता के पास से मिले सुसाइड नोट में लिखा था कि ''''मैं मां नहीं बन सकती हूं, इसलिए जा रही हूं। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
थानाध्यक्ष अतुल कुमार मिश्रा ने बताया कि बरदह थाना क्षेत्र के परसौली गांव निवासी कविता की शादी 24 अप्रैल 2024 को जहानागंज थाना क्षेत्र के बसगीत गांव निवासी नीलकमल सरोज के साथ हुई थी। पति नीलकमल नागपुर में रहकर ट्रेलर गाड़ी चलाता है। शनिवार की दोपहर सूचना मिली कि कविता ने अपने कमरे में साड़ी के फंदे से लटककर जान दे दी। मौके पर पुलिस ने पहुंचकर जांच-पड़ताल की गई तो उसके पास से सुसाइड नोट मिला। सुसाइड नोट में दर्द भरे शब्द लिखे थे कि ''''मैं मां नहीं बन सकती हूं, बहुत दवा की, इलाज कराया लेकिन कुछ नहीं हुआ, इसलिए अब मैं जा रही हूं।'''' थाना प्रभारी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मृतक कविता के पति नीलकमल ने बताया कि उनकी और उनकी पत्नी की जांच हुई थी। कविता में कमी थी जिसका उपचार चल रहा था। कविता दवा खाने से मना कर रही थी। उसने हताश होकर अपनी जान दे दी।
सुसाइड नोट पढ़कर पति और पूरा परिवार रो पड़ा।
घटना से गांव में शोक का माहौल है।
मायका और ससुराल पक्ष करा रहा था इलाज
जहानागंज। थाना प्रभारी अतुल कुमार मिश्रा ने बताया कि बसगीत गांव निवासी कविता मां नहीं बन पा रही थी। ससुराल और मायके पक्ष के लोग बहुत पैसे वाले नहीं थे। इसलिए दोनों पक्ष मिलकर कविता का उपचार करा रहे थे। काफी समय से दवा होने के बाद भी कविता को लाभ नहीं मिला। पति नीलकमल ने बताया कि अधिक समय से दवा खाने से वह आजिज आ चुकी थी। दवा नहीं खाना चाहती थी। वह हताश हो गई और उसने ऐसा कदम उठा लिया।
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सुसाइड नोट पढ़कर पति और पूरा परिवार रो पड़ा।
घटना से गांव में शोक का माहौल है।
मायका और ससुराल पक्ष करा रहा था इलाज
जहानागंज। थाना प्रभारी अतुल कुमार मिश्रा ने बताया कि बसगीत गांव निवासी कविता मां नहीं बन पा रही थी। ससुराल और मायके पक्ष के लोग बहुत पैसे वाले नहीं थे। इसलिए दोनों पक्ष मिलकर कविता का उपचार करा रहे थे। काफी समय से दवा होने के बाद भी कविता को लाभ नहीं मिला। पति नीलकमल ने बताया कि अधिक समय से दवा खाने से वह आजिज आ चुकी थी। दवा नहीं खाना चाहती थी। वह हताश हो गई और उसने ऐसा कदम उठा लिया।