फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   Low-lying areas begin to get marooned as Saryu's water level rises; level at Dighiya crosses the red mark by 20 cm.

Azamgarh News: सरयू का जलस्तर बढ़ने से घिरने लगे निचले इलाके, डिघिया पर लाल निशान से 20 सेमी पार

Sun, 09 Aug 2026 12:20 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2026 12:20 AM IST
विज्ञापन
Low-lying areas begin to get marooned as Saryu's water level rises; level at Dighiya crosses the red mark by 20 cm.
महाराजगंज के तिवारीपुर में जमीन काट रही नदी। संवाद - फोटो : रोटरी क्लब के कार्यक्रम में सम्मानित किए गए पदा​धिकारी। स्रोत: क्लब
सगड़ी तहसील क्षेत्र के डिघिया नाले पर सरयू लाल निशान से 20 सेमी ऊपर बह रही है, वहीं बदरहुआ नाले पर लाल निशान से दूरी मात्र 38 सेमी रह गई है। सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
विज्ञापन

नदी का पानी बढ़ने के साथ ही ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ गई है। क्षेत्र के चक्की गांव की सिवान पानी से घिरने लगी है। इसके बाद देवारा खास राजा, बांका, बूढ़नपट्टी, शाहडीह, मानिकपुर, सोनौरा और अभनपट्टी समेत अन्य गांव प्रभावित होते हैं।
विज्ञापन

बाढ़ प्रभावित गांवों में हर वर्ष सबसे बड़ी समस्या संपर्क मार्गों पर पानी भरने के बाद आवागमन की होती है। नदी का जलस्तर बढ़ने से अभी नदी और बांध के बीच स्थित बाहा और छोटे-छोटे नालों में पानी भरने लगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पानी का स्तर और बढ़ने पर इन मार्गों पर आवागमन पूरी तरह बाधित होने की आशंका है। इससे ग्रामीणों को बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी कामों के लिए आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उधर, तटवर्ती गांवों को कटान से बचाने के लिए बाढ़ खंड और सिंचाई विभाग की ओर से विभिन्न उपाय किए गए हैं। कटानरोधी कार्य के तहत डैंपरिंग के साथ बोर्डर डालने के अलावा गैरेबियान, बंबू क्रेट और पोरक्यूपाइन लगाए गए हैं।
इनका उद्देश्य नदी की धारा के दबाव को कम कर तटों को कटने से बचाना है। सहबदिया गांव के सामने कटान रोकने के लिए करीब 1200 पोरक्यूपाइन लगाए गए थे, जिसमें से 900 से अधिक डूब गए। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के बाद इनमें से कई नदी में समा गए हैं या बह गए हैं। इससे कटानरोधी व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि नदी में लगाए गए गैरेबियान, बंबू क्रेट और अन्य उपकरण बहते नहीं हैं, बल्कि वहीं लांच किए जाते हैं। लांच होने के बाद ये नदी की धारा के दबाव को कम करने और कटान रोकने में मदद करते हैं। विभाग की ओर से नदी के जलस्तर और तटों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सरयू नदी में बढ़ते जलप्रवाह का असर डिघिया और बदरहुआ नालों पर भी दिखाई देने लगा है। शनिवार को डिघिया नाले का जलस्तर 13 सेंटीमीटर बढ़कर 70.60 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 70.40 मीटर से 20 सेंटीमीटर ऊपर है। वहीं, बदरहुआ नाले का जलस्तर 14 सेंटीमीटर बढ़कर 71.30 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 71.68 मीटर से 38 सेंटीमीटर नीचे है। एक बार फिर शनिवार को सरयू नदी में 2,86 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।

------------
नदी का जलस्तर
गेज - खतरा बिंदु - जलस्तर
बदरहुआ नाला - 71.68 मीटर - 71.30 मीटर
डिघिया नाला - 70.40 मीटर - 70.60 मीटर
डिघिया में 13 और बदरहुआ पर 14 सेमी बढ़ा जलस्तर
--------------
सरयू का जलस्तर बढ़ने से 70 घरों पर मंडराया खतरा
महाराजगंज। सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ने से विकास खंड के आराजी मलहपुरवा, आराजी गंगापुर और आराजी पुरैनिया गांवों के करीब 70 घरों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है। नदी का पानी बढ़ने से ग्रामीण अपने घर और बची हुई खेती की जमीन को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। सरयू का जलस्तर बढ़ने से कटान रोकने के लिए लगाए गए पोरक्यूपाइन पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। नदी किनारे बनाए गए 10 कटर भी धीरे-धीरे पानी में समाहित होते जा रहे हैं। इनमें जो पांच कटर अभी दिखाई दे रहे हैं, वे भी आधे से अधिक पानी में डूब चुके हैं। गांव के पश्चिमी हिस्से में हो रहे रिसाव ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि रिसाव जारी रहा तो बची हुई उपजाऊ जमीन को भी बचाना मुश्किल होगा। ग्रामीण गुलाब ने बताया कि कटान रोकने के लिए लगाए गए अधिकांश कटर नदी में समाहित हो चुके हैं। चार-पांच कटर ही दिखाई दे रहे हैं और उनके ऊपर से पानी बह रहा है। रामजीत ने बताया कि गांव के पश्चिमी तरफ नदी में रिसाव हो रहा है। यदि यह लगातार जारी रहा तो खेती योग्य बची जमीन भी नदी में समा जाएगी। उधर, आराजी गंगापुर और पुरैनिया से करीब एक किलोमीटर पूरब तिवारीपुर में भी कृषि भूमि कटान की चपेट में आ रही है। इससे आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed