देवगांव। गुरु पूर्णिमा पर यथार्थ गीता कुटीर, कोटा खुर्द लहुवां और सहिमल कुटी देवगांव में श्रद्धा और आस्था के साथ गुरु महाराज की चरण वंदना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। यथार्थ गीता कुटीर में स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के शिष्य गृहस्थ संन्यासी राणा प्रताप सिंह का शिष्यों ने चरण वंदना की। वहीं, सहिमल कुटी, देवगांव में स्वामी आत्मानंद महाराज का भी शिष्यों ने सम्मान किया। स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के शिष्य राणा प्रताप सिंह ने कहा कि परमात्मा प्रत्येक मनुष्य के हृदय में विराजमान हैं और सभी को एक ईश्वर की शरण ग्रहण करनी चाहिए। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज का उल्लेख करते हुए कहा कि मन को एकाग्र कर ईश्वर की शरण में जाने का संदेश ही गीता का मूल भाव है। उन्होंने कहा कि गीता गुरु और शिष्य के बीच का दिव्य संवाद है, जिसमें अर्जुन स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का शिष्य मानकर उनके प्रति पूर्ण समर्पण व्यक्त करते हैं। इस दौरान अरुण चौरसिया, राहुल सिंह, प्रेमनाथ सिंह, वीरेंद्र सिंह, संजय सिंह, ज्ञानमती सिंह, रेखा सिंह, रीता सिंह, चित्रा सिंह आदि उपस्थित रहे। का समापन गुरु महाराज की आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। अतरौलिया में गुरु पूर्णिमा पर प्रसिद्ध प्रथम देवस्थान (बहिरा देव आश्रम) में बुधवार को श्रद्धा और आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बहिरा देव आश्रम के महंत प्रेम दास ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। प्रथम संत बाबा मूसई दास ने वर्ष 1910-11 के आसपास घने जंगलों में साधना कर इस परंपरा की नींव रखी थी। श्रीराम जायसवाल के आवास पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में भगवान साईं बाबा का भव्य शृंगार करके उन्हें गुरु स्वरूप में विराजमान किया गया। छप्पन भोग अर्पित करने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती हुई। आरती के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान सुभाष चंद्र जायसवाल, अजय जायसवाल, विजय जायसवाल, रिंकू सोनी, विंध्याचल सोनी आदि रहे।