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Bahraich News: घर-घर पहुंचेंगे स्वास्थ्य कर्मी, करेंगे कुष्ठ उन्मूलन
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 31 Jan 2026 12:38 AM IST
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पयागपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। 13 फरवरी तक चलने वाले इस विशेष अभियान का संचालन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार शर्मा के निर्देशन में किया जा रहा है।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. शरद भारती ने बताया कि कुष्ठ रोग के प्रति सामाजिक भेदभाव को मिटाने और लोगों को जागरूक करने के लिए वर्ष 2017 से यह अभियान चलाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम भेदभाव समाप्त कर, गरिमा सुनिश्चित करें रखी गई है।
अभियान का मुख्य लक्ष्य कुष्ठ रोगियों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना है। बीपीएम अनुपम शुक्ल के अनुसार, राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन जागरूकता कार्यक्रम क्षेत्र के सभी 87 राजस्व गांवों में चलाया जाएगा। इसमें स्वास्थ्य कर्मियों और ग्राम पंचायतों का विशेष सहयोग लिया जा रहा है ताकि घर-घर तक जागरूकता संदेश पहुंचे।
इस अवसर पर डॉ. प्रमोद तिवारी, डॉ. पल्लवी सिंह, जुगुल किशोर चौबे, चन्द्रेश्वर पाठक, पवन कुमार, मनीष द्विवेदी, रोहित मिश्रा और हिमांशु मिश्रा सहित कई स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
इस कारण होता है कुष्ठ रोग
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. भारती ने बताया कि कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम लेप्रे नामक जीवाणु से होती है। यह मुख्य रूप से शरीर की त्वचा, नसों और मांसपेशियों पर हमला करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इसका इलाज न कराया जाए, तो यह शरीर में गंभीर विकृति और स्थायी दिव्यांगता का कारण बन सकता है। कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षणों में पैरों के तलवों में छाले होना, मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना और वजन का कम होना शामिल है।
इन लक्षणों से होती है कुष्ठ रोग की पहचान
एनएमए अनिरुद्ध पाण्डेय ने बताया कि त्वचा पर रंगहीन, हल्के या गहरे रंग के धब्बे दिखाई देना इस रोग की प्राथमिक पहचान है। इन दाग-धब्बों पर स्पर्श या दर्द का अहसास नहीं होता। इसके अलावा हाथों या पैरों में लगातार झुनझुनी या सुन्नपन रहना, हाथ-पैर और पलकों में कमजोरी महसूस होना, नसों में दर्द, चेहरे या कान पर सूजन व गांठें उभरना तथा हाथ-पैरों में दर्द रहित घावों का होना भी कुष्ठ रोग के स्पष्ट संकेत हैं।
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प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. शरद भारती ने बताया कि कुष्ठ रोग के प्रति सामाजिक भेदभाव को मिटाने और लोगों को जागरूक करने के लिए वर्ष 2017 से यह अभियान चलाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम भेदभाव समाप्त कर, गरिमा सुनिश्चित करें रखी गई है।
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अभियान का मुख्य लक्ष्य कुष्ठ रोगियों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना है। बीपीएम अनुपम शुक्ल के अनुसार, राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन जागरूकता कार्यक्रम क्षेत्र के सभी 87 राजस्व गांवों में चलाया जाएगा। इसमें स्वास्थ्य कर्मियों और ग्राम पंचायतों का विशेष सहयोग लिया जा रहा है ताकि घर-घर तक जागरूकता संदेश पहुंचे।
इस अवसर पर डॉ. प्रमोद तिवारी, डॉ. पल्लवी सिंह, जुगुल किशोर चौबे, चन्द्रेश्वर पाठक, पवन कुमार, मनीष द्विवेदी, रोहित मिश्रा और हिमांशु मिश्रा सहित कई स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
इस कारण होता है कुष्ठ रोग
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. भारती ने बताया कि कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम लेप्रे नामक जीवाणु से होती है। यह मुख्य रूप से शरीर की त्वचा, नसों और मांसपेशियों पर हमला करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इसका इलाज न कराया जाए, तो यह शरीर में गंभीर विकृति और स्थायी दिव्यांगता का कारण बन सकता है। कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षणों में पैरों के तलवों में छाले होना, मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना और वजन का कम होना शामिल है।
इन लक्षणों से होती है कुष्ठ रोग की पहचान
एनएमए अनिरुद्ध पाण्डेय ने बताया कि त्वचा पर रंगहीन, हल्के या गहरे रंग के धब्बे दिखाई देना इस रोग की प्राथमिक पहचान है। इन दाग-धब्बों पर स्पर्श या दर्द का अहसास नहीं होता। इसके अलावा हाथों या पैरों में लगातार झुनझुनी या सुन्नपन रहना, हाथ-पैर और पलकों में कमजोरी महसूस होना, नसों में दर्द, चेहरे या कान पर सूजन व गांठें उभरना तथा हाथ-पैरों में दर्द रहित घावों का होना भी कुष्ठ रोग के स्पष्ट संकेत हैं।
