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Bahraich News: संजय सेतु की मरम्मत की तैयारी, दो माह रहेगा बंद
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 31 Jan 2026 12:21 AM IST
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घाघराघाट स्थित संजय सेतु। -संवाद
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बहराइच। लखनऊ-बहराइच हाईवे पर घाघरा नदी पर बने 41 वर्ष पुराने संजय सेतु की जर्जर हालत एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। बेयरिंग बेस्ड इस पुल के जॉइंटर बार-बार ढीले होने से हर 15 से 20 दिन में आवागमन बाधित हो जाता है।
समस्या से स्थायी निजात के लिए एनएचएआई ने पुल की बड़ी मरम्मत के लिए इसे दो माह तक पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन रूट डायवर्जन को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने से निर्णय फिलहाल शासन स्तर पर अटका हुआ है।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस सिंह की ओर से बाराबंकी और बहराइच के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर दो माह तक संजय सेतु पर आवागमन रोकने की अनुमति मांगी गई थी। इस पर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने इसे केवल एक जिले का नहीं बल्कि आठ जिलों और नेपाल तक से जुड़े यातायात का मामला बताते हुए शासन को पत्र भेजा है।
शासन से कहा गया है कि पहले रूट डायवर्जन और वैकल्पिक व्यवस्थाओं का पूरा खाका तैयार किया जाए, उसके बाद ही पुल पर आवागमन बंद करने का निर्णय लिया जाए।
गौरतलब है कि 1984 में बना संजय सेतु अब अपनी उम्र पूरी कर चुका है। बार-बार जॉइंटर ढीले होने और यातायात रुकने से आमजन पहले ही परेशान है। अब सबकी निगाहें शासन के निर्णय पर टिकी हैं कि कब रूट डायवर्जन तय होगा और कब इस अहम पुल की मरम्मत शुरू हो पाएगी।
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जिला स्तर पर फैसला संभव नहीं : डीएम
विशेष बातचीत में डीएम अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि एनएचएआई पहले 10 फरवरी से पुल बंद कर मरम्मत शुरू करना चाहता था, लेकिन स्पष्ट किया गया कि जब तक टेंडर प्रक्रिया, रूट डायवर्जन और प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी न हों, तब तक पुल बंद करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि दो माह तक पुल बंद रहने की स्थिति में गोंडा की ओर से आने वाले वाहन अयोध्या होते हुए लखनऊ भेजे जाएंगे। बहराइच की ओर से आने वाले वाहन चहलारी घाट वाया सीतापुर होकर लखनऊ जाएंगे। ऐसे में निर्णय शासन स्तर पर ही संभव है, जहां कमेटी गठित कर अंतिम रूट डायवर्जन तय किया जाएगा।
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एनएचएआई दो बार मांग चुका है अनुमति
डीएम ने बताया कि एनएचएआई के अधिकारी दो बार अनुमति मांग चुके हैं, लेकिन बिना शासन के स्पष्ट निर्देश और डायवर्जन चार्ट के पुल बंद करने की अनुमति देना संभव नहीं है। जैसे ही शासन स्तर से निर्णय होगा, उसी अनुरूप वाहनों का डायवर्जन कर संजय सेतु की मरम्मत शुरू करा दी जाएगी।
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रूट डायवर्जन में आने वाली प्रमुख दुश्वारियां
- यात्रियों को 50 से 100 किमी तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।
- अयोध्या, चहलारी घाट व सीतापुर मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ेगा।
- बसों, एंबुलेंस और मालवाहक वाहनों को भारी परेशानी होगी।
- नेपाल से आने-जाने वाले यात्रियों पर भी असर।
- वैकल्पिक मार्गों पर जाम और दुर्घटना की आशंका।
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इन जिलों पर पड़ेगा सीधा असर
- बहराइच
- बाराबंकी
- गोंडा
- श्रावस्ती
- बलरामपुर
- सीतापुर
- अयोध्या
- लखनऊ
- नेपाल से जुड़े यात्री (अंतरराष्ट्रीय आवागमन)
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समस्या से स्थायी निजात के लिए एनएचएआई ने पुल की बड़ी मरम्मत के लिए इसे दो माह तक पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन रूट डायवर्जन को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने से निर्णय फिलहाल शासन स्तर पर अटका हुआ है।
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एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस सिंह की ओर से बाराबंकी और बहराइच के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर दो माह तक संजय सेतु पर आवागमन रोकने की अनुमति मांगी गई थी। इस पर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने इसे केवल एक जिले का नहीं बल्कि आठ जिलों और नेपाल तक से जुड़े यातायात का मामला बताते हुए शासन को पत्र भेजा है।
शासन से कहा गया है कि पहले रूट डायवर्जन और वैकल्पिक व्यवस्थाओं का पूरा खाका तैयार किया जाए, उसके बाद ही पुल पर आवागमन बंद करने का निर्णय लिया जाए।
गौरतलब है कि 1984 में बना संजय सेतु अब अपनी उम्र पूरी कर चुका है। बार-बार जॉइंटर ढीले होने और यातायात रुकने से आमजन पहले ही परेशान है। अब सबकी निगाहें शासन के निर्णय पर टिकी हैं कि कब रूट डायवर्जन तय होगा और कब इस अहम पुल की मरम्मत शुरू हो पाएगी।
जिला स्तर पर फैसला संभव नहीं : डीएम
विशेष बातचीत में डीएम अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि एनएचएआई पहले 10 फरवरी से पुल बंद कर मरम्मत शुरू करना चाहता था, लेकिन स्पष्ट किया गया कि जब तक टेंडर प्रक्रिया, रूट डायवर्जन और प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी न हों, तब तक पुल बंद करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि दो माह तक पुल बंद रहने की स्थिति में गोंडा की ओर से आने वाले वाहन अयोध्या होते हुए लखनऊ भेजे जाएंगे। बहराइच की ओर से आने वाले वाहन चहलारी घाट वाया सीतापुर होकर लखनऊ जाएंगे। ऐसे में निर्णय शासन स्तर पर ही संभव है, जहां कमेटी गठित कर अंतिम रूट डायवर्जन तय किया जाएगा।
एनएचएआई दो बार मांग चुका है अनुमति
डीएम ने बताया कि एनएचएआई के अधिकारी दो बार अनुमति मांग चुके हैं, लेकिन बिना शासन के स्पष्ट निर्देश और डायवर्जन चार्ट के पुल बंद करने की अनुमति देना संभव नहीं है। जैसे ही शासन स्तर से निर्णय होगा, उसी अनुरूप वाहनों का डायवर्जन कर संजय सेतु की मरम्मत शुरू करा दी जाएगी।
रूट डायवर्जन में आने वाली प्रमुख दुश्वारियां
- यात्रियों को 50 से 100 किमी तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।
- अयोध्या, चहलारी घाट व सीतापुर मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ेगा।
- बसों, एंबुलेंस और मालवाहक वाहनों को भारी परेशानी होगी।
- नेपाल से आने-जाने वाले यात्रियों पर भी असर।
- वैकल्पिक मार्गों पर जाम और दुर्घटना की आशंका।
इन जिलों पर पड़ेगा सीधा असर
- बहराइच
- बाराबंकी
- गोंडा
- श्रावस्ती
- बलरामपुर
- सीतापुर
- अयोध्या
- लखनऊ
- नेपाल से जुड़े यात्री (अंतरराष्ट्रीय आवागमन)
