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Ballia News: यूजीसी के विरोध में युवाओं ने किया प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 01:29 AM IST
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Youth protested against UGC and submitted a memorandum.
चितबड़ागांव कस्बा में यूजीसी के विरोध में प्रदर्शन करते युवा। संवाद
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बलिया। यूजीसी की निमयमावी में बदलाव के विरोध में युवाओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार को प्रदर्शन किया। यूजीसी को वापस लेने की मांग को लेकर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा।
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ज्ञापन में उल्लेख किया है कि यूजीसी छात्र-छात्राओं में जातिगत भेदभाव उत्पन्न करने वाला है। युवाओं ने चेताया कि यदि इस नियम को तत्काल वापस नहीं लिया गया तो हम लोग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। सत्यम तिवारी ने कहा कि जातिगत समीकरण से विद्यार्थियों की देखना सबसे ओछी राजनीति है।जिम्मी चौबे ने कहा कि यह नियम फूट डालो राज्य करो वाला है।अनुभव सिंह ने कहा कि यह नियम छात्र विरोधी है। इसके चलते छात्रों में विभाजन होगा एवं आपसी सौहार्द बिगड़ेगा। इस मौके पर सौरभ तिवारी, रानू पाठक,नील पाण्डेय, विवेक सिंह, सौम्या तिवारी, नंदिनी सिंह, इत्यादि विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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चितबड़ागांव: शिवम सिंह के नेतृत्व में बुधवार को छात्रों ने यूजीसी की नियमावली में बदलाव के विरोध में प्रदर्शन किया गया। शहीद वृंदावन तिवारी स्मारक से प्रारंभ हुआ विरोध मार्च पीसीओ तिराहा तक पहुंचा। यहां छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की। पुतला दहन किया। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अंजनी तिवारी, रंजन सिंह, कृष्णा तिवारी, शुधानसु सिंह, सुरजीत सिंह, विशाल सिंह, आदित्य सिंह, अवनीश सिंह, सत्यम सिंह, हिमांशु तिवारी सहित सैकड़ों छात्र मौजूद रहे और एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया।
बैरिया: भाजपा नेता जयप्रकाश नगर निवासी सूर्यभान सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नए यूजीसी नियम में संशोधन की मांग की। साथ यह नियम जोड़ने का आग्रह किया है कि सवर्ण छात्र-छात्राओं के खिलाफ अगर कोई झूठी शिकायत दर्ज करता है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई का प्राविधान हो। इसी क्रम में भाजपा नेता रूबी सिंह ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इसी तरह की मांग किया है। उन्होंने कहा है कि सवर्ण समाज नए कानून को लेकर आंदोलित है। इस कानून से समाज की समरसता समाप्त होने की आशंका है। इसलिए इसमें संशोधन किया जाए। संवाद
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