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देवीपाटन कॉरिडोर : सहमति न बनने से हाईटेक पार्किंग योजना पर लगा ब्रेक
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:34 PM IST
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बलरामपुर में स्थित शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर।
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तुलसीपुर। बहुप्रतीक्षित देवीपाटन कॉरिडोर परियोजना के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रस्तावित हाईटेक पार्किंग और वाहन अड्डे हेतु चिह्नित बलरामपुर स्टेट की भूमि पर सहमति नहीं बन पाने से प्रशासन को अब परियोजना के मूल खाके में बदलाव पर विचार करना पड़ रहा है। ऐसे में कॉरिडोर के लिए तैयार मास्टर प्लान में संशोधन की संभावना बढ़ गई है।
मां पाटेश्वरी देवीपाटन धाम उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है, जहां वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बढ़ती भीड़ और सुविधाओं की जरूरत को देखते हुए सरकार ने देवीपाटन धाम को आधुनिक सुविधाओं से युक्त भव्य धार्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। हालांकि पार्किंग स्थल को लेकर उत्पन्न बाधा ने परियोजना के एक अहम हिस्से को प्रभावित कर दिया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कॉरिडोर परियोजना के लिए लगभग 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए 317 खाताधारकों से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इनमें से 311 से अधिक भू-स्वामियों की सहमति प्राप्त कर उनकी भूमि की रजिस्ट्री पूरी कर ली गई है। इससे परियोजना के लिए आवश्यक अधिकांश भूमि प्रशासन के कब्जे में आ चुकी है और कई प्रस्तावित कार्यों का रास्ता साफ हो गया है।
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हालांकि हाईटेक पार्किंग के लिए चयनित बलरामपुर स्टेट की भूमि पर सहमति नहीं बन सकी है। उपजिलाधिकारी राकेश कुमार जयंत ने बताया कि पार्किंग के लिए प्रस्तावित भूमि के संबंध में सहमति नहीं बन पाने के कारण वैकल्पिक भूमि की तलाश की जा रही है। जल्द ही संशोधित प्रस्ताव तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पार्किंग से जुड़ी समस्या के बावजूद परियोजना के अन्य विकास कार्यों पर इसका विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा और निर्धारित योजना के अनुसार कार्य आगे बढ़ते रहेंगे। दरअसल, कॉरिडोर योजना में हाईटेक पार्किंग को सबसे महत्वपूर्ण घटकों में शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराना और मंदिर क्षेत्र को जाम की समस्या से राहत दिलाना है। वर्तमान में बड़े आयोजनों और मेलों के दौरान मंदिर परिसर तथा आसपास की सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था को कॉरिडोर परियोजना की सफलता की अहम कड़ी माना जा रहा है।
काशी और अयोध्या की तर्ज पर संवर रहा देवीपाटन धाम
देवीपाटन कॉरिडोर को काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या धाम की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। परियोजना के तहत भव्य प्रवेश द्वार, चौड़े और आकर्षक गलियारे, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र, यात्री सुविधाएं, सुंदरीकरण और बेहतर यातायात प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जानी हैं। प्रशासन का मानना है कि कॉरिडोर के पूरा होने के बाद देवीपाटन धाम न केवल आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। ऐसे में पार्किंग से जुड़ी बाधा को जल्द दूर कर परियोजना को गति देना प्रशासन की प्राथमिकता है।
मां पाटेश्वरी देवीपाटन धाम उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है, जहां वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बढ़ती भीड़ और सुविधाओं की जरूरत को देखते हुए सरकार ने देवीपाटन धाम को आधुनिक सुविधाओं से युक्त भव्य धार्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। हालांकि पार्किंग स्थल को लेकर उत्पन्न बाधा ने परियोजना के एक अहम हिस्से को प्रभावित कर दिया है।
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प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कॉरिडोर परियोजना के लिए लगभग 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इसके लिए 317 खाताधारकों से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इनमें से 311 से अधिक भू-स्वामियों की सहमति प्राप्त कर उनकी भूमि की रजिस्ट्री पूरी कर ली गई है। इससे परियोजना के लिए आवश्यक अधिकांश भूमि प्रशासन के कब्जे में आ चुकी है और कई प्रस्तावित कार्यों का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि हाईटेक पार्किंग के लिए चयनित बलरामपुर स्टेट की भूमि पर सहमति नहीं बन सकी है। उपजिलाधिकारी राकेश कुमार जयंत ने बताया कि पार्किंग के लिए प्रस्तावित भूमि के संबंध में सहमति नहीं बन पाने के कारण वैकल्पिक भूमि की तलाश की जा रही है। जल्द ही संशोधित प्रस्ताव तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पार्किंग से जुड़ी समस्या के बावजूद परियोजना के अन्य विकास कार्यों पर इसका विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा और निर्धारित योजना के अनुसार कार्य आगे बढ़ते रहेंगे। दरअसल, कॉरिडोर योजना में हाईटेक पार्किंग को सबसे महत्वपूर्ण घटकों में शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराना और मंदिर क्षेत्र को जाम की समस्या से राहत दिलाना है। वर्तमान में बड़े आयोजनों और मेलों के दौरान मंदिर परिसर तथा आसपास की सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था को कॉरिडोर परियोजना की सफलता की अहम कड़ी माना जा रहा है।
काशी और अयोध्या की तर्ज पर संवर रहा देवीपाटन धाम
देवीपाटन कॉरिडोर को काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या धाम की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। परियोजना के तहत भव्य प्रवेश द्वार, चौड़े और आकर्षक गलियारे, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र, यात्री सुविधाएं, सुंदरीकरण और बेहतर यातायात प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जानी हैं। प्रशासन का मानना है कि कॉरिडोर के पूरा होने के बाद देवीपाटन धाम न केवल आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। ऐसे में पार्किंग से जुड़ी बाधा को जल्द दूर कर परियोजना को गति देना प्रशासन की प्राथमिकता है।