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Balrampur News: विश्व आर्दभूमि दिवस पर इमलिया कोडर में होगा संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 31 Jan 2026 11:15 PM IST
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पचपेड़वा के इमिलिया कोडर स्थित थारू संग्रहालय। संवाद
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बलरामपुर। विश्व आर्दभूमि दिवस के अवसर पर भारत रत्न नानाजी देशमुख की कर्मस्थली इमलिया कोडर में सोमवार को कई कार्यक्रम होंगे। वह पर्यावरण चेतना और सांस्कृतिक संवाद का जीवंत केंद्र बनेगा। इस वर्ष की वैश्विक थीम आर्दभूमियां और परंपरागत ज्ञान विषय पर संवाद होगा। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रवि शंकर सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।
बलरामपुर फर्स्ट के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम से छात्र-छात्राओं और युवाओं को आर्दभूमियों के महत्व से जोड़ने की पहल होगी।
कार्यक्रम में स्थानीय वेटलैंड भगवानपुर जलाशय के विकास पर चर्चा होगी। इसके साथ ही थारू जनजाति की सांस्कृतिक विरासत पर भी चर्चा होगी। थारू समुदाय का प्रकृति के साथ सदियों पुराना रिश्ता इस आयोजन का केंद्र बिंदु रहेगा, जिससे युवा पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिलेगा कि कैसे परंपरागत जीवनशैली आज के पर्यावरणीय संकटों का समाधान बन सकती है।
कार्यक्रम संयोजक सर्वेश सिंह ने बताया कि तराई क्षेत्र में स्थित जिले की भौगोलिक और जैव विविधता की विशिष्ट पहचान है, जिसे बचाए रखना केवल प्रशासन नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। वन डिस्ट्रिक्ट-वन वेटलैंड योजना को सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि यह योजना आर्दभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकती है, बशर्ते इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर इमलिया कोडर स्थित थारू संग्रहालय में यह आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा।
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बलरामपुर फर्स्ट के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम से छात्र-छात्राओं और युवाओं को आर्दभूमियों के महत्व से जोड़ने की पहल होगी।
कार्यक्रम में स्थानीय वेटलैंड भगवानपुर जलाशय के विकास पर चर्चा होगी। इसके साथ ही थारू जनजाति की सांस्कृतिक विरासत पर भी चर्चा होगी। थारू समुदाय का प्रकृति के साथ सदियों पुराना रिश्ता इस आयोजन का केंद्र बिंदु रहेगा, जिससे युवा पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिलेगा कि कैसे परंपरागत जीवनशैली आज के पर्यावरणीय संकटों का समाधान बन सकती है।
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कार्यक्रम संयोजक सर्वेश सिंह ने बताया कि तराई क्षेत्र में स्थित जिले की भौगोलिक और जैव विविधता की विशिष्ट पहचान है, जिसे बचाए रखना केवल प्रशासन नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। वन डिस्ट्रिक्ट-वन वेटलैंड योजना को सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि यह योजना आर्दभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकती है, बशर्ते इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर इमलिया कोडर स्थित थारू संग्रहालय में यह आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा।
