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Balrampur News: भावुक माहौल में सिद्ध पीर रतननाथ बाबा की पालकी नेपाल रवाना
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बलरामपुर के तुलसीपुर से रवाना होती पीर रतन नाथ की यात्रा ।-संवाद
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तुलसीपुर। सिद्धपीठ देवीपाटन मंदिर से सिद्ध पीर रतननाथ बाबा की पालकी को दशमी की आधी रात गाजे-बाजे और भक्तिमय वातावरण के बीच नेपाल के दांग चौखड़ा स्थित मठ के लिए विदा किया गया। विदाई से पूर्व मंदिर परिसर में देवीपाटन पीठाधीश्वर मिथिलेश नाथ योगी और सिद्ध पीर रतननाथ मठ के मुख्य पीर योगी ज्ञाननाथ ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न की। इस दौरान मंदिर परिसर में भावुक माहौल रहा और श्रद्धालुओं की आंखें नम दिखीं।
करीब दो घंटे तक चली विशेष पूजा के बाद नेपाल के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन के बीच बाबा की पालकी को विदा किया गया। भक्तों ने अगले वर्ष फिर आगमन की कामना करते हुए जयकारों के साथ रथ को रवाना किया। मुख्य पीर योगी ज्ञाननाथ ने कहा कि यह यात्रा भारत-नेपाल के अटूट सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है। पीठाधीश्वर मिथिलेशनाथ योगी ने बताया कि चैत्र नवरात्र के दौरान बाबा की उपस्थिति से क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और 15 दिवसीय यात्रा बाबा के मठ लौटने के साथ पूर्ण होती है।
बाबा पंचमी को आकर एकादशी को होते हैं विदा
परंपरा के अनुसार, सिद्ध पीर रतन नाथ बाबा नेपाल के दांग चौखड़ा से एकादशी के दिन भव्य शोभायात्रा के साथ प्रस्थान करते हैं और चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि को देवीपाटन शक्तिपीठ पहुंचते हैं। यहां मंदिर में स्थित दलीचे में उन्हें प्रतिष्ठित कर दशमी तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, इसके बाद दशमी की रात्रि में उनकी विदाई का विधान है। इस दौरान नेपाल के डॉ. सूरत नाथ योगी, अरुण गुप्ता, राहुल गुप्ता, श्याम तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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करीब दो घंटे तक चली विशेष पूजा के बाद नेपाल के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन के बीच बाबा की पालकी को विदा किया गया। भक्तों ने अगले वर्ष फिर आगमन की कामना करते हुए जयकारों के साथ रथ को रवाना किया। मुख्य पीर योगी ज्ञाननाथ ने कहा कि यह यात्रा भारत-नेपाल के अटूट सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है। पीठाधीश्वर मिथिलेशनाथ योगी ने बताया कि चैत्र नवरात्र के दौरान बाबा की उपस्थिति से क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और 15 दिवसीय यात्रा बाबा के मठ लौटने के साथ पूर्ण होती है।
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बाबा पंचमी को आकर एकादशी को होते हैं विदा
परंपरा के अनुसार, सिद्ध पीर रतन नाथ बाबा नेपाल के दांग चौखड़ा से एकादशी के दिन भव्य शोभायात्रा के साथ प्रस्थान करते हैं और चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि को देवीपाटन शक्तिपीठ पहुंचते हैं। यहां मंदिर में स्थित दलीचे में उन्हें प्रतिष्ठित कर दशमी तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, इसके बाद दशमी की रात्रि में उनकी विदाई का विधान है। इस दौरान नेपाल के डॉ. सूरत नाथ योगी, अरुण गुप्ता, राहुल गुप्ता, श्याम तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।