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Balrampur News: शासन को भेजी गई केके चैरिटेबल ब्लड बैंक की जांच रिपोर्ट
Wed, 15 Jul 2026 10:54 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 15 Jul 2026 10:54 PM IST
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बलरामपुर। खून के अवैध कारोबार के आरोपों से घिरे केके चैरिटेबल ब्लड बैंक की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब शासन स्तर से ब्लड बैंक का लाइसेंस निरस्त करने समेत अन्य कार्रवाई की उम्मीद है। वहीं स्वास्थ्य विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि ब्लड बैंक को खून की आपूर्ति किस माध्यम से होती थी।
जिले में केके चैरिटेबल ब्लड बैंक के संचालक अभिषेक सिंह और सौरभ श्रीवास्तव को बलरामपुर और गोंडा में अवैध रूप से खून की खरीद-फरोख्त करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि दोनों पैसे के लालच में खून का अवैध कारोबार करते थे। गोंडा में एक मरीज को कथित तौर पर एक्सपायर्ड ब्लड और प्लेटलेट्स चढ़ाए जाने के बाद उसकी मौत हो गई, जिसके बाद इस पूरे मामले का खुलासा हुआ।
अभिषेक सिंह संयुक्त जिला चिकित्सालय बलरामपुर और सौरभ श्रीवास्तव श्रावस्ती के सरकारी अस्पताल में संविदा पर तैनात थे। आरोप है कि सरकारी अस्पतालों से जुड़े होने के कारण उन्हें जरूरतमंद मरीजों तक आसानी से पहुंच मिल जाती थी।
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औषधि निरीक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ब्लड बैंक को सील कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब शासन स्तर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बिना चिकित्साधिकारी के संचालित हो रहा था ब्लड बैंक?
केके चैरिटेबल ब्लड बैंक का संचालन संयुक्त जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा शुक्ला की डिग्री के आधार पर शुरू हुआ था। वह ब्लड बैंक में चिकित्साधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। संचालकों की गिरफ्तारी के बाद अब उनके त्यागपत्र का मामला भी सामने आया है।
डॉ. आकांक्षा शुक्ला के अनुसार उन्होंने 15 अक्तूबर 2025 को चिकित्साधिकारी पद से त्यागपत्र दे दिया था। यदि उनका त्यागपत्र उस समय स्वीकार कर लिया गया था, तो इसके बाद करीब आठ महीने तक ब्लड बैंक बिना चिकित्साधिकारी के संचालित होने का सवाल उठता है।
ऐसे में इन महीनों के दौरान ब्लड बैंक में रक्त, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई, यह भी जांच का विषय है। विभाग अब इस पहलू की भी पड़ताल कर रहा है।
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जिले में केके चैरिटेबल ब्लड बैंक के संचालक अभिषेक सिंह और सौरभ श्रीवास्तव को बलरामपुर और गोंडा में अवैध रूप से खून की खरीद-फरोख्त करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि दोनों पैसे के लालच में खून का अवैध कारोबार करते थे। गोंडा में एक मरीज को कथित तौर पर एक्सपायर्ड ब्लड और प्लेटलेट्स चढ़ाए जाने के बाद उसकी मौत हो गई, जिसके बाद इस पूरे मामले का खुलासा हुआ।
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अभिषेक सिंह संयुक्त जिला चिकित्सालय बलरामपुर और सौरभ श्रीवास्तव श्रावस्ती के सरकारी अस्पताल में संविदा पर तैनात थे। आरोप है कि सरकारी अस्पतालों से जुड़े होने के कारण उन्हें जरूरतमंद मरीजों तक आसानी से पहुंच मिल जाती थी।
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औषधि निरीक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ब्लड बैंक को सील कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब शासन स्तर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बिना चिकित्साधिकारी के संचालित हो रहा था ब्लड बैंक?
केके चैरिटेबल ब्लड बैंक का संचालन संयुक्त जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा शुक्ला की डिग्री के आधार पर शुरू हुआ था। वह ब्लड बैंक में चिकित्साधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। संचालकों की गिरफ्तारी के बाद अब उनके त्यागपत्र का मामला भी सामने आया है।
डॉ. आकांक्षा शुक्ला के अनुसार उन्होंने 15 अक्तूबर 2025 को चिकित्साधिकारी पद से त्यागपत्र दे दिया था। यदि उनका त्यागपत्र उस समय स्वीकार कर लिया गया था, तो इसके बाद करीब आठ महीने तक ब्लड बैंक बिना चिकित्साधिकारी के संचालित होने का सवाल उठता है।
ऐसे में इन महीनों के दौरान ब्लड बैंक में रक्त, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई, यह भी जांच का विषय है। विभाग अब इस पहलू की भी पड़ताल कर रहा है।