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Balrampur News: पीर रतननाथ की शोभायात्रा का भव्य स्वागत
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तुलसीपुर में पहुंची पीररतन नाथ की शोभायात्रा। संवाद
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तुलसीपुर। चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि पर पीर रतननाथ की शोभायात्रा शक्तिपीठ देवीपाटन पहुंची। यहां शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया गया। मां पाटेश्वरी की जय और पीर रत्ननाथ बाबा की जय के गगनभेदी उद्घोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
पड़ोसी देश नेपाल के दांग चौघड़ा से लमही होते हुए पहुंची इस पारंपरिक शोभायात्रा का शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत मिथिलेश नाथ योगी ने विधि-विधान से स्वागत किया। भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक यह यात्रा वर्षों से दोनों देशों के श्रद्धालुओं को आस्था के सूत्र में बांधती आ रही है।
सुबह से ही नगर में उत्सव जैसा माहौल रहा। सड़क किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे हाथों में फूल-मालाएं लिए पीर रत्ननाथ जी की एक झलक पाने को उत्सुक नजर आए। जैसे ही शोभायात्रा नगर में पहुंची, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और जयकारों के बीच यात्रा आगे बढ़ती रही। नेपाली पारंपरिक वेशभूषा में शामिल श्रद्धालु और उनके लोक नृत्य आकर्षण का केंद्र बने रहे। रंग-बिरंगे ध्वज, धार्मिक झांकियां और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन ने पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया।
शोभायात्रा नकटी नाले के समीप स्थित कुटिया से प्रारंभ होकर मिल चुंगी नाका, पुरानी बाजार चौक, हनुमानगढ़ी चौराहा, लाल चौराहा और हरैया चौराहा होते हुए मंदिर परिसर स्थित समय माता स्थान पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह आरती उतारी और प्रसाद वितरण किया। कई स्थानों पर स्वागत मंच बनाकर अतिथियों का अभिनंदन किया गया। नगर के व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने भी यात्रा का भव्य स्वागत किया।
स्वागत समारोह में पीठाधीश्वर महंत मिथिलेश नाथ योगी ने पीर रत्ननाथ जी की परंपरा को भारत-नेपाल की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा सदियों से दोनों देशों के श्रद्धालुओं को जोड़ती आ रही है और देवीपाटन धाम की महिमा को और भी बढ़ाती है। इस अवसर पर कथावाचक संत सर्वेश महाराज, विधायक कैलाशनाथ शुक्ला, डॉ. डीपी सिंह, विजय सिंह, अरुणदेव आर्य, अरुण गुप्ता, मातेश्वरी प्रसाद त्रिपाठी, श्याम तिवारी, आलोक गुप्त आदि मौजूद रहे।
देवीपाटन मंदिर में मां दुर्गा के मिले थे दर्शन
धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरु गोरक्षनाथ के शिष्य रतननाथ ने शक्तिपीठ देवीपाटन में मां दुर्गा की तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उन्हें दर्शन दिए थे। रतननाथ ने वरदान स्वरूप देवीपाटन मठ में अपनी भी पूजा की परंपरा शुरू करने का आग्रह किया। माता के आशीर्वाद से तभी से हर वर्ष पंचमी से नवमी तक नेपाल से आए पुजारियों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवधि में मंदिर के घंटे-घड़ियाल शांत रहते हैं और केवल वही वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं।
शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। उप जिलाधिकारी राकेश कुमार जयंत, क्षेत्राधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार, प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार सिंह, अवधेश राज सिंह, चौकी प्रभारी अमर सिंह और मेला प्रभारी राम कुमार पांडेय सहित पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
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पड़ोसी देश नेपाल के दांग चौघड़ा से लमही होते हुए पहुंची इस पारंपरिक शोभायात्रा का शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत मिथिलेश नाथ योगी ने विधि-विधान से स्वागत किया। भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक यह यात्रा वर्षों से दोनों देशों के श्रद्धालुओं को आस्था के सूत्र में बांधती आ रही है।
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सुबह से ही नगर में उत्सव जैसा माहौल रहा। सड़क किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे हाथों में फूल-मालाएं लिए पीर रत्ननाथ जी की एक झलक पाने को उत्सुक नजर आए। जैसे ही शोभायात्रा नगर में पहुंची, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और जयकारों के बीच यात्रा आगे बढ़ती रही। नेपाली पारंपरिक वेशभूषा में शामिल श्रद्धालु और उनके लोक नृत्य आकर्षण का केंद्र बने रहे। रंग-बिरंगे ध्वज, धार्मिक झांकियां और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन ने पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया।
शोभायात्रा नकटी नाले के समीप स्थित कुटिया से प्रारंभ होकर मिल चुंगी नाका, पुरानी बाजार चौक, हनुमानगढ़ी चौराहा, लाल चौराहा और हरैया चौराहा होते हुए मंदिर परिसर स्थित समय माता स्थान पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह आरती उतारी और प्रसाद वितरण किया। कई स्थानों पर स्वागत मंच बनाकर अतिथियों का अभिनंदन किया गया। नगर के व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने भी यात्रा का भव्य स्वागत किया।
स्वागत समारोह में पीठाधीश्वर महंत मिथिलेश नाथ योगी ने पीर रत्ननाथ जी की परंपरा को भारत-नेपाल की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा सदियों से दोनों देशों के श्रद्धालुओं को जोड़ती आ रही है और देवीपाटन धाम की महिमा को और भी बढ़ाती है। इस अवसर पर कथावाचक संत सर्वेश महाराज, विधायक कैलाशनाथ शुक्ला, डॉ. डीपी सिंह, विजय सिंह, अरुणदेव आर्य, अरुण गुप्ता, मातेश्वरी प्रसाद त्रिपाठी, श्याम तिवारी, आलोक गुप्त आदि मौजूद रहे।
देवीपाटन मंदिर में मां दुर्गा के मिले थे दर्शन
धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरु गोरक्षनाथ के शिष्य रतननाथ ने शक्तिपीठ देवीपाटन में मां दुर्गा की तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उन्हें दर्शन दिए थे। रतननाथ ने वरदान स्वरूप देवीपाटन मठ में अपनी भी पूजा की परंपरा शुरू करने का आग्रह किया। माता के आशीर्वाद से तभी से हर वर्ष पंचमी से नवमी तक नेपाल से आए पुजारियों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवधि में मंदिर के घंटे-घड़ियाल शांत रहते हैं और केवल वही वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं।
शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। उप जिलाधिकारी राकेश कुमार जयंत, क्षेत्राधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार, प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार सिंह, अवधेश राज सिंह, चौकी प्रभारी अमर सिंह और मेला प्रभारी राम कुमार पांडेय सहित पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।