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Balrampur News: दूसरों को पास कराने वाले सुरक्षा की परीक्षा में फेल

संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Tue, 23 Jun 2026 11:55 PM IST
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Those who helped others pass fail the safety exam
फोटो-30-बलरामपुर में संचालित कोचिंग सेंटर।-संवाद
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बलरामपुर। लखनऊ में दर्दनाक अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों और विद्यार्थियों के मन में यह डर घर कर गया है कि जिस जगह वे अपने सपनों को आकार देने जाते हैं, वहां उनकी सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है। जिले में भी हालात चिंताजनक हैं। यहां संचालित अधिकांश कोचिंग संस्थान और लाइब्रेरी अब तक अग्नि सुरक्षा सहित बुनियादी मानकों को पूरा नहीं कर सके हैं।

मंगलवार को शहर के अधिकांश कोचिंग संस्थानों में अवकाश होने के कारण छात्र दिखाई नहीं दिए, लेकिन खाली पड़े भवनों को देखकर भी सुरक्षा इंतजामों की हकीकत साफ नजर आई। कहीं अग्निशमन यंत्र नहीं मिले तो कहीं आपातकालीन निकास का अभाव दिखा। कई भवनों में संकरी सीढ़ियां और बंद कमरों में संचालित कक्षाएं भविष्य में किसी बड़े खतरे की आशंका को बल देती हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अंकित कुमार ने पहले ही 25 संस्थानों को नोटिस जारी किया था, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार अब तक किसी ने भी सभी आवश्यक मानकों को पूरी तरह पूरा नहीं किया है। शहर में करीब 48 कोचिंग संस्थान और 25 लाइब्रेरी संचालित हैं, जहां प्रतिदिन हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। तुलसीपुर मार्ग पर कुछ कोचिंग संस्थान भवनों की ऊपरी मंजिलों और छतों पर संचालित हो रहे हैं। इनमें पर्याप्त वेंटिलेशन तक नहीं है। रामलीला मैदान के निकट एक कोचिंग में मात्र दो फीट चौड़ी सीढ़ी से छात्रों का आवागमन होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी आपात स्थिति में इतनी संकरी सीढ़ियां जानलेवा साबित हो सकती हैं।
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लाइब्रेरी पर भी नहीं कोई स्पष्ट निगरानी, चिंता में अभिभावक

कोचिंग संस्थानों के साथ-साथ लाइब्रेरी की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। जिले में लाइब्रेरी संचालन के लिए कोई स्पष्ट पंजीकरण व्यवस्था नहीं है। छोटे-छोटे कमरों में दर्जनों छात्रों को बैठाकर लाइब्रेरी चलाई जा रही हैं। अधिकांश संचालकों को सुरक्षा मानकों की पूरी जानकारी तक नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे दिखाई देती है। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए कोचिंग और लाइब्रेरी भेजते हैं, लेकिन अब उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता सताने लगी है। शहर के देवेंद्र कुमार ने कहा कि प्रशासन को किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय पहले ही सख्त कदम उठाने चाहिए। इसी तरह सिविल लाइन की ललिता भी कहती हैं अब डर लगता है। इंतजाम बेहतर किए जाएं, ऐसे तो बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी।
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