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वाइब्रेंट विलेज : नेपाल सीमा के 44 गांवों में जलेगा विकास का दीप
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बलरामपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में बसा गांव इमिलिया कोडर ।-संवाद
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बलरामपुर। नेपाल सीमा से सटे जिले के तराई क्षेत्र के गांव अब विकास की नई राह पर आगे बढ़ने जा रहे हैं। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे इन सीमावर्ती गांवों के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम नई उम्मीद बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत जिले की 44 ग्राम पंचायतों को चयनित किया गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करते हुए ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
जिले के पचपेड़वा और गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र के इमलिया कोडर, विशुनपुर विश्राम, भुसहर ऊंचवा, रनियापुर भचकाही, बनगाई, सोनगढ़ा, मुतेहरा, सकरा-शकरी, भौरीशाल, नरिहवा भुकुरुवा, परबतिहा, रजेहना, कंचनपुर, मडनी, सडनी और रामवापुर थारू समेत 44 गांव नेपाल सीमा के नजदीक बसे हुए हैं। भौगोलिक रूप से दुर्गम होने के कारण यहां लंबे समय से सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, संचार और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस की जा रही है।
बरसात के दिनों में कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट जाता है, जिससे ग्रामीणों को अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इससे पूरे क्षेत्र की करीब तीन लाख आबादी को सीधे लाभ मिलेगा।
केंद्र सरकार की पहल से खुलेगा विकास का मार्ग
पंचायतों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ते हुए वहां के सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देना है। योजना के तहत सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, पर्यटन और स्थानीय रोजगार के अवसरों के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती गांवों का विकास केवल स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राष्ट्रीय महत्व भी है। जब सीमाई क्षेत्रों में सुविधाएं बेहतर होंगी और लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, तो पलायन कम होगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी आबादी मजबूत होगी।
तैयार हो रही है कार्य योजना
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत जिले की 44 ग्राम पंचायतों को चयनित किया गया है। इस योजना के माध्यम से सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए वहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन जल्द ही कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्यों को गति देगा।
हिमांशु गुप्ता, मुख्य विकास अधिकारी-बलरामपुर
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जिले के पचपेड़वा और गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र के इमलिया कोडर, विशुनपुर विश्राम, भुसहर ऊंचवा, रनियापुर भचकाही, बनगाई, सोनगढ़ा, मुतेहरा, सकरा-शकरी, भौरीशाल, नरिहवा भुकुरुवा, परबतिहा, रजेहना, कंचनपुर, मडनी, सडनी और रामवापुर थारू समेत 44 गांव नेपाल सीमा के नजदीक बसे हुए हैं। भौगोलिक रूप से दुर्गम होने के कारण यहां लंबे समय से सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, संचार और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस की जा रही है।
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बरसात के दिनों में कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट जाता है, जिससे ग्रामीणों को अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इससे पूरे क्षेत्र की करीब तीन लाख आबादी को सीधे लाभ मिलेगा।
केंद्र सरकार की पहल से खुलेगा विकास का मार्ग
पंचायतों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ते हुए वहां के सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देना है। योजना के तहत सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, पर्यटन और स्थानीय रोजगार के अवसरों के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती गांवों का विकास केवल स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राष्ट्रीय महत्व भी है। जब सीमाई क्षेत्रों में सुविधाएं बेहतर होंगी और लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे, तो पलायन कम होगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी आबादी मजबूत होगी।
तैयार हो रही है कार्य योजना
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत जिले की 44 ग्राम पंचायतों को चयनित किया गया है। इस योजना के माध्यम से सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए वहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन जल्द ही कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्यों को गति देगा।
हिमांशु गुप्ता, मुख्य विकास अधिकारी-बलरामपुर
