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Balrampur News: मेघ बरसे तो फसलें लहलहाईं, नदियां उफनाईं
Mon, 17 Aug 2026 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 17 Aug 2026 11:47 PM IST
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बलरामपुर में राप्ती नदी के सिसई घाट पर बढ़ रहा जलस्तर ।
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बलरामपुर। तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे तटवर्ती गांवों में बाढ़ की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है। सोमवार शाम चार बजे सिसई घाट पर नदी का जलस्तर 103.220 मीटर पहुंच गया। यहां चेतावनी बिंदु 103.620 मीटर है। यानी नदी चेतावनी बिंदु से महज 40 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
सोमवार सुबह नौ बजे नदी का जलस्तर 103.170 मीटर था, जो दोपहर 12 बजे 103.180 और शाम चार बजे 103.220 मीटर हो गया। सात घंटे में पांच सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बारिश जारी रहने पर जलस्तर और बढ़ने की आशंका को देखते हुए तटवर्ती गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
राप्ती के साथ पहाड़ी नालों का जलस्तर बढ़ने से भी ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। महराजगंज तराई के रामगढ़ मैटहवा गांव में पहाड़ी नाले का पानी पहुंचता है। तेज बारिश में नाले का जलस्तर बढ़ने पर आसपास जलभराव की स्थिति बन जाती है। ललिया और हरैया सतघरवा क्षेत्र में भी पहाड़ी नालों के उफान को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। भुजेहरा, खैरहनिया, गंजड़ी, नरायनापुर, नबीनगर और धनौढ़ा समेत कई गांवों में नालों का पानी बढ़ने पर खेत और संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।
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गांवों में सतर्कता बढ़ी, राजस्व टीमें सक्रिय
महराजगंज तराई, ललिया, हरैया सतघरवा और उतरौला तहसील के करीब 170 गांव संभावित बाढ़ की जद में हैं। इनमें राप्ती किनारे बसे गांवों के साथ पहाड़ी नालों और स्थानीय जलस्रोतों से प्रभावित होने वाले गांव भी शामिल हैं। ललिया क्षेत्र के गंगाबख्श भागड़, चौका कला, लालपुर फगुईया, गोसाईं पुरवा, साहिबा नगर और चेतरा पुरवा में जलभराव की आशंका रहती है। उतरौला तहसील के करीब आधा दर्जन गांव भी निगरानी में हैं। नदी और नालों का पानी बढ़ने पर सबसे पहले निचले इलाकों के खेत और संपर्क मार्ग प्रभावित होने की आशंका है।
खेती और आवागमन पर पड़ सकता है असर
बारिश का दौर लंबा चला और राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ा तो निचले इलाकों के खेतों में पानी भर सकता है। इससे खेती प्रभावित होने के साथ गांवों से मुख्य मार्ग तक आवागमन भी मुश्किल हो सकता है। पहाड़ी नालों में उफान आने पर कई गांवों के संपर्क मार्ग प्रभावित होने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचने और बच्चों को दूर रखने की सलाह दी गई है।
वर्जन
खराब मौसम को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने, बिजली के उपकरण बंद रखने तथा जलभराव और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। आपात स्थिति में कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम 9170277336, टोल फ्री 05263-1077, एंबुलेंस 108 और राज्य आपदा हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।
डॉ. विपिन कुमार जैन, जिलाधिकारी
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सोमवार सुबह नौ बजे नदी का जलस्तर 103.170 मीटर था, जो दोपहर 12 बजे 103.180 और शाम चार बजे 103.220 मीटर हो गया। सात घंटे में पांच सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बारिश जारी रहने पर जलस्तर और बढ़ने की आशंका को देखते हुए तटवर्ती गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
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राप्ती के साथ पहाड़ी नालों का जलस्तर बढ़ने से भी ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। महराजगंज तराई के रामगढ़ मैटहवा गांव में पहाड़ी नाले का पानी पहुंचता है। तेज बारिश में नाले का जलस्तर बढ़ने पर आसपास जलभराव की स्थिति बन जाती है। ललिया और हरैया सतघरवा क्षेत्र में भी पहाड़ी नालों के उफान को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। भुजेहरा, खैरहनिया, गंजड़ी, नरायनापुर, नबीनगर और धनौढ़ा समेत कई गांवों में नालों का पानी बढ़ने पर खेत और संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।
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गांवों में सतर्कता बढ़ी, राजस्व टीमें सक्रिय
महराजगंज तराई, ललिया, हरैया सतघरवा और उतरौला तहसील के करीब 170 गांव संभावित बाढ़ की जद में हैं। इनमें राप्ती किनारे बसे गांवों के साथ पहाड़ी नालों और स्थानीय जलस्रोतों से प्रभावित होने वाले गांव भी शामिल हैं। ललिया क्षेत्र के गंगाबख्श भागड़, चौका कला, लालपुर फगुईया, गोसाईं पुरवा, साहिबा नगर और चेतरा पुरवा में जलभराव की आशंका रहती है। उतरौला तहसील के करीब आधा दर्जन गांव भी निगरानी में हैं। नदी और नालों का पानी बढ़ने पर सबसे पहले निचले इलाकों के खेत और संपर्क मार्ग प्रभावित होने की आशंका है।
खेती और आवागमन पर पड़ सकता है असर
बारिश का दौर लंबा चला और राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ा तो निचले इलाकों के खेतों में पानी भर सकता है। इससे खेती प्रभावित होने के साथ गांवों से मुख्य मार्ग तक आवागमन भी मुश्किल हो सकता है। पहाड़ी नालों में उफान आने पर कई गांवों के संपर्क मार्ग प्रभावित होने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है। ग्रामीणों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचने और बच्चों को दूर रखने की सलाह दी गई है।
वर्जन
खराब मौसम को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने, बिजली के उपकरण बंद रखने तथा जलभराव और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। आपात स्थिति में कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम 9170277336, टोल फ्री 05263-1077, एंबुलेंस 108 और राज्य आपदा हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।
डॉ. विपिन कुमार जैन, जिलाधिकारी

बलरामपुर में राप्ती नदी के सिसई घाट पर बढ़ रहा जलस्तर ।