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Banda News: चंद्रग्रहण के बावजूद होली बाजार में सियासी रंग, देशी उत्पादों की धूम
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 03 Mar 2026 10:37 PM IST
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फोटो - 15 सदर कोतवाली के सामने रंग की दुकान में लगी भीड़। संवाद
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बांदा। होली को रंग से सराबोर करने में रोजा आड़े नहीं आया। होलियारों ने भी अपने पर्व पर धर्म - मजहब को आड़े नहीं आने दिया। शहर में कोतवाली के सामने स्थित हाजी, हाफिज मुल्ला की दुकान में रंग और पिचकारी के खरीदारों की पूरा दिन भीड़ लगी रही। दाढ़ी वाले रोजदार हाजी के दोनों हाथ कई तरह के रंगों से रंगे रहे। बांदा में सांप्रदायिक सौहार्द का यह भी एक नमूना है। इधर, इस बार चंद्रग्रहण की छाया के कारण मंगलवार को होली का रंग फीका रहा। हालांकि होरियारे बुधवार को रंगों में सराबोर होने और मटकी फोड़ने को बेसब्री से तैयार रहे। होली के त्योहारी बाजार में रंग, गुलाल और पिचकारियों की खूब धूम मची हुई है।
बाजार में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम वाली पिचकारियों की मांग है। बांदा सदर के विधायक प्रकाश द्विवेदी की फोटो वाली पिचकारियां भी खूब बिक रही हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के मुखौटे बाजार से लगभग गुम हैं। कमल गुलाल के साथ भगवा गुलाल की बिक्री में तेजी देखी जा रही है। इस बार बाजार में चाइनीज पिचकारियां और रासायनिक रंग नजर नहीं आ रहे हैं। बीते करीब दो दशकों में पहली बार देसी पिचकारियां और हर्बल रंग बाजार में छाए हैं। देशी पिचकारियां चीन निर्मित की तुलना में 30 से 40 फीसदी तक महंगी हैं। ग्राहकों और दुकानदारों का मानना है कि देशी पिचकारियों से देश की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। साथ ही हर्बल रंगों से लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा।
बच्चों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न कार्टून पात्रों के नाम वाली पिचकारियां उपलब्ध हैं। 100 रुपये की बीन सपेरा पिचकारी बच्चों को खूब पसंद आ रही है। एके-47, एके-56 और बांसुरी पिचकारियां भी बाजार में मौजूद हैं। खुशबूदार गुलाल 10 रुपये के पैकेट से लेकर 80 रुपये तक बिक रहा है। जैविक गुलाल का चार रंगों का पैकेट 130 रुपये में उपलब्ध है। होली के त्योहार पर मुखौटों का चलन आज भी पहले जैसा बरकरार है। इससे चेहरे रंगों से सुरक्षित रहते हैं और त्योहार का आनंद बढ़ता है। देशी पिचकारियों और हर्बल रंगों के साथ भारत निर्मित मुखौटे भी खूब बिक रहे हैं। चुनावी हार के बाद केजरीवाल के मुखौटे बाजार से गायब हैं। मोदी-योगी मुखौटे तेजी से बिक रहे हैं। पतली रबर के सस्ते मुखौटे 15 से 30 रुपये में मिल रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले मुखौटों की कीमत 150 से 250 रुपये तक है।
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नवाब ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल दे 1890 में पहली बार जलवाई थी होली
बांदा। नवाबी शहर बांदा में होली का त्योहार सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। यहां होलिका दहन की शुरुआत सन् 1890 में हुई थी। इसे नवाब जुल्फिकार अली बहादुर ने कराया था।
इस परंपरा में हिंदू और मुस्लिम बराबरी से शरीक होते थे। होली मिल-जुलकर मनाने की यह परंपरा नवाबी दौर से चली आ रही है। नवाब जुल्फिकार अली बहादुर ने रहुनिया मैदान में होलिका दहन शुरू कराया। इसमें शहर के चुनिंदा हिंदू-मुस्लिम मिलकर आनंद लेते थे। होली के रंग सभी की पहचान मिटा देते थे। मुस्लिम बुजुर्ग मुख्तार रहीम बख्श नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. श्यामलाल शर्मा के साथ घूमते थे। वे लोगों को होली की मुबारकबाद देते और लेते थे। डॉ. अनवर, अमीन खां और मौला बख्श जैसे लोग होली की अलग शान थे।
चौधरी खानदान के जमींदार पहलवान सिंह और उमराव सिंह भी इन मुस्लिम साथियों संग जश्न मनाते थे। बलखंडी नाका की होली सबसे मशहूर थी। तांगे वाले मंजूर मियां इसके मुख्य कर्ता-धर्ता थे। रामेश्वर रेवड़ी वाले उनकी मदद करते थे। शहर के रईस बैरिस्टर मसूदुज्जमां होरियारों का हौसला बढ़ाते थे।
उस समय कुदरती रंगों का ही इस्तेमाल होता था। किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं होती थी।
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पुलिस लाइन में डीआईजी और एसपी ने पूजा अर्चन कर किया होलिका दहन
बांदा। पुलिस उपमहानिरीक्षक, चित्रकूटधाम राजेश एस व पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने पुलिस लाइन परिसर में पारंपरिक रीति रिवाजों व विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना कर होलिका दहन किया गया।
इस अवसर पर पुलिस उपमहानिरीक्षक चित्रकूटधाम एवं पुलिस अधीक्षक ने उपस्थित सभी अधिकारी व कर्मचारियों को गुलाल लगाकर होली पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक बांदा शिवराज एवं समस्त क्षेत्राधिकारी, प्रतिसार निरीक्षक बांदा सहित पुलिसकर्मी व उनके परिजन मौजूद रहे।
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बाजार में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम वाली पिचकारियों की मांग है। बांदा सदर के विधायक प्रकाश द्विवेदी की फोटो वाली पिचकारियां भी खूब बिक रही हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के मुखौटे बाजार से लगभग गुम हैं। कमल गुलाल के साथ भगवा गुलाल की बिक्री में तेजी देखी जा रही है। इस बार बाजार में चाइनीज पिचकारियां और रासायनिक रंग नजर नहीं आ रहे हैं। बीते करीब दो दशकों में पहली बार देसी पिचकारियां और हर्बल रंग बाजार में छाए हैं। देशी पिचकारियां चीन निर्मित की तुलना में 30 से 40 फीसदी तक महंगी हैं। ग्राहकों और दुकानदारों का मानना है कि देशी पिचकारियों से देश की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। साथ ही हर्बल रंगों से लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा।
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बच्चों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न कार्टून पात्रों के नाम वाली पिचकारियां उपलब्ध हैं। 100 रुपये की बीन सपेरा पिचकारी बच्चों को खूब पसंद आ रही है। एके-47, एके-56 और बांसुरी पिचकारियां भी बाजार में मौजूद हैं। खुशबूदार गुलाल 10 रुपये के पैकेट से लेकर 80 रुपये तक बिक रहा है। जैविक गुलाल का चार रंगों का पैकेट 130 रुपये में उपलब्ध है। होली के त्योहार पर मुखौटों का चलन आज भी पहले जैसा बरकरार है। इससे चेहरे रंगों से सुरक्षित रहते हैं और त्योहार का आनंद बढ़ता है। देशी पिचकारियों और हर्बल रंगों के साथ भारत निर्मित मुखौटे भी खूब बिक रहे हैं। चुनावी हार के बाद केजरीवाल के मुखौटे बाजार से गायब हैं। मोदी-योगी मुखौटे तेजी से बिक रहे हैं। पतली रबर के सस्ते मुखौटे 15 से 30 रुपये में मिल रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले मुखौटों की कीमत 150 से 250 रुपये तक है।
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नवाब ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल दे 1890 में पहली बार जलवाई थी होली
बांदा। नवाबी शहर बांदा में होली का त्योहार सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। यहां होलिका दहन की शुरुआत सन् 1890 में हुई थी। इसे नवाब जुल्फिकार अली बहादुर ने कराया था।
इस परंपरा में हिंदू और मुस्लिम बराबरी से शरीक होते थे। होली मिल-जुलकर मनाने की यह परंपरा नवाबी दौर से चली आ रही है। नवाब जुल्फिकार अली बहादुर ने रहुनिया मैदान में होलिका दहन शुरू कराया। इसमें शहर के चुनिंदा हिंदू-मुस्लिम मिलकर आनंद लेते थे। होली के रंग सभी की पहचान मिटा देते थे। मुस्लिम बुजुर्ग मुख्तार रहीम बख्श नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. श्यामलाल शर्मा के साथ घूमते थे। वे लोगों को होली की मुबारकबाद देते और लेते थे। डॉ. अनवर, अमीन खां और मौला बख्श जैसे लोग होली की अलग शान थे।
चौधरी खानदान के जमींदार पहलवान सिंह और उमराव सिंह भी इन मुस्लिम साथियों संग जश्न मनाते थे। बलखंडी नाका की होली सबसे मशहूर थी। तांगे वाले मंजूर मियां इसके मुख्य कर्ता-धर्ता थे। रामेश्वर रेवड़ी वाले उनकी मदद करते थे। शहर के रईस बैरिस्टर मसूदुज्जमां होरियारों का हौसला बढ़ाते थे।
उस समय कुदरती रंगों का ही इस्तेमाल होता था। किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं होती थी।
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पुलिस लाइन में डीआईजी और एसपी ने पूजा अर्चन कर किया होलिका दहन
बांदा। पुलिस उपमहानिरीक्षक, चित्रकूटधाम राजेश एस व पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने पुलिस लाइन परिसर में पारंपरिक रीति रिवाजों व विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना कर होलिका दहन किया गया।
इस अवसर पर पुलिस उपमहानिरीक्षक चित्रकूटधाम एवं पुलिस अधीक्षक ने उपस्थित सभी अधिकारी व कर्मचारियों को गुलाल लगाकर होली पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक बांदा शिवराज एवं समस्त क्षेत्राधिकारी, प्रतिसार निरीक्षक बांदा सहित पुलिसकर्मी व उनके परिजन मौजूद रहे।

फोटो - 15 सदर कोतवाली के सामने रंग की दुकान में लगी भीड़। संवाद

फोटो - 15 सदर कोतवाली के सामने रंग की दुकान में लगी भीड़। संवाद

फोटो - 15 सदर कोतवाली के सामने रंग की दुकान में लगी भीड़। संवाद