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Banda News: मसौनी पंप कैनाल का हुआ ड्रोन सर्वे, ग्रामीणाें को आस
Tue, 30 Jun 2026 12:22 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 30 Jun 2026 12:22 AM IST
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मसौनी पंप कैनाल का ड्रोन से जायजा लेते इंजीनियर व मौजूद ग्रामीण। संवाद
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कालिंजर। अधूरी पड़ी मसौनी पंप कैनाल परियोजना के लिए सोमवार को सिंचाई विभाग के अधिकारियों ड्रोन सर्वे किया। इससे ग्रामीणों में नहर शुरू होने की आस जगी है। ग्रामीणों की माने तो मसौनी पंप कैनाल परियोजना करीब 46 वर्षों से अधूरी पड़ी है। इसके शुरू होने से दर्जनों गांवों को सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी।
वर्ष 1980 में तत्कालीन सरकार ने मसौनी पंप कैनाल परियोजना का निर्माण शुरू कराया था। योजना में करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा भी हो गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से निर्माण कार्य बीच में ही बंद हो गया और परियोजना अधूरी रह गई। सोमवार को लघु डाल नहर प्रखंड के सहायक अभियंता पुष्पेंद्र शर्मा, अभियंता कुलदीप कुमार एवं सत्यदेव पाल ने मौके पर पहुंचकर ड्रोन कैमरे की सहायता से पूरी कैनाल का सर्वेक्षण किया।
अधिकारियों ने अधूरी पड़ी नहर की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया और निर्माण से जुड़ी संभावनाओं का आकलन किया। निरीक्षण के दौरान कटरा-कालिंजर के प्रधान राजेंद्र श्रीवास तथा मसौनी के पूर्व प्रधान अफाक मोमिन ने अधिकारियों को परियोजना के इतिहास, अधूरे निर्माण और वर्तमान हालात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैनाल के निर्माण के लिए किसानों की बड़ी मात्रा में भूमि का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन कार्य बंद होने से वर्षों से वह भूमि अनुपयोगी पड़ी है।
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ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि लंबे समय तक परियोजना बंद रहने से कैनाल में लगे पत्थर व अन्य निर्माण सामग्री चोरी हो चुके हैं। वहीं अधिग्रहित भूमि पर भी कई स्थानों पर लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिससे भविष्य में निर्माण कार्य शुरू होने पर अतिक्रमण हटाना बड़ी चुनौती बन सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि परियोजना पूरी हो जाती है तो कालिंजर, कटरा, मसौनी, भरतपुर, सातोंगंज और तलैयापुरवा सहित करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और क्षेत्र के कृषि विकास को नई गति मिलेगी।
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वर्ष 1980 में तत्कालीन सरकार ने मसौनी पंप कैनाल परियोजना का निर्माण शुरू कराया था। योजना में करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा भी हो गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से निर्माण कार्य बीच में ही बंद हो गया और परियोजना अधूरी रह गई। सोमवार को लघु डाल नहर प्रखंड के सहायक अभियंता पुष्पेंद्र शर्मा, अभियंता कुलदीप कुमार एवं सत्यदेव पाल ने मौके पर पहुंचकर ड्रोन कैमरे की सहायता से पूरी कैनाल का सर्वेक्षण किया।
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अधिकारियों ने अधूरी पड़ी नहर की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया और निर्माण से जुड़ी संभावनाओं का आकलन किया। निरीक्षण के दौरान कटरा-कालिंजर के प्रधान राजेंद्र श्रीवास तथा मसौनी के पूर्व प्रधान अफाक मोमिन ने अधिकारियों को परियोजना के इतिहास, अधूरे निर्माण और वर्तमान हालात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैनाल के निर्माण के लिए किसानों की बड़ी मात्रा में भूमि का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन कार्य बंद होने से वर्षों से वह भूमि अनुपयोगी पड़ी है।
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ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि लंबे समय तक परियोजना बंद रहने से कैनाल में लगे पत्थर व अन्य निर्माण सामग्री चोरी हो चुके हैं। वहीं अधिग्रहित भूमि पर भी कई स्थानों पर लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिससे भविष्य में निर्माण कार्य शुरू होने पर अतिक्रमण हटाना बड़ी चुनौती बन सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि परियोजना पूरी हो जाती है तो कालिंजर, कटरा, मसौनी, भरतपुर, सातोंगंज और तलैयापुरवा सहित करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और क्षेत्र के कृषि विकास को नई गति मिलेगी।