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Banda News: सजायाफ्ता जेई की कोर्ट में पेशी फिर नहीं आया इंजीनियर आकिफ
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फोटो - 39 पेशी में न्यायालय जाता दोषी जेई रामभवन।
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बांदा। 33 नाबालिगों के यौन शोषण के गंभीर मामले में 20 फरवरी को फांसी की सजा पाए चित्रकूट सिंचाई विभाग के निलंबित जेई रामभवन की बुधवार को विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट में पेशी हुई। हालांकि, सह-आरोपी दिल्ली के इंजीनियर मोहम्मद आकिफ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अदालत में हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र दिया। इसके अलावा सीबीआई और आईटी एक्ट के मुकदमे के एक अहम गवाह भी दूसरे मामले में व्यस्त होने के कारण पेश नहीं हो सके। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अप्रैल की तारीख तय की है।
चित्रकूट के निलंबित जेई रामभवन और दिल्ली के इंजीनियर मोहम्मद आकिफ पर 33 नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप है। सीबीआई की जांच में यह बात सामने आई थी कि इन नाबालिगों के अश्लील वीडियो बेल्जियम सहित 47 देशों में बेचे जाते थे। इस मामले में सीबीआई ने 17 नवंबर 2020 को जेई रामभवन को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अन्य सह-आरोपी भी पकड़े गए। 20 फरवरी को विशेष अदालत ने जेई रामभवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई थी।
बुधवार को विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत में इस मामले की सुनवाई होनी थी। मंडल कारागार की बैरक नंबर तीन ए में निरुद्ध कैदी नंबर 41, जेई रामभवन को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश किया गया। जहां उन्होंने अपने हस्ताक्षर किए। वहीं, सह-आरोपी और जमानत पर चल रहे इंजीनियर मोहम्मद आकिफ के अधिवक्ता ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनके मुवक्किल का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए वे पेश नहीं हो सकते। अधिवक्ता ने बताया कि जेई रामभवन के सजायाफ्ता होने के पिछले मुकदमे को लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने पूर्व में निर्देश दिया था कि मुकदमे की सुनवाई तेजी से की जाए। इसके अलावा सीबीआई लोक अभियोजक धारा सिंह और आईटी एक्ट के मुकदमे के मुख्य गवाह, दिल्ली के केनरा बैंक मैनेजर मनोज सिंह गौतम भी पेश नहीं हो सके। उन्हें दूसरे मामले में व्यस्तता के कारण अदालत में उपस्थित होने में असमर्थता जताई। पिछली पेशी में गवाह के बयान आधे ही दर्ज हो पाए थे, जिन्हें इस बार पूरा किया जाना था।
अगली सुनवाई और लंबित मामले
न्यायालय ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 7 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है। इस दिन इंजीनियर मोहम्मद आकिफ, गवाह और आईटी एक्ट से जुड़े अन्य सभी प्रमुख लोगों को सम्मन तामील कराए जाएंगे। यह भी बताया गया है कि जेई रामभवन और इंजीनियर आकिफ के खिलाफ आईटी एक्ट व संगठित होकर साजिश रचने का मुकदमा 31 अक्टूबर 2020 को दिल्ली में दर्ज हुआ था। 2021 में इस मामले में आरोप तय किए गए थे और सीबीआई ने 12 गवाहों को सूचीबद्ध किया है। इधर, जेल में निरुद्ध अन्य बंदियों के विपरीत, सजायाफ्ता जेई रामभवन को अलग से पुलिस की बोलेरो में कड़ी निगरानी में न्यायालय तक लाया गया। इस दौरान एक एसएसआई और चार पुलिसकर्मी उनकी सुरक्षा में तैनात थे।
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चित्रकूट के निलंबित जेई रामभवन और दिल्ली के इंजीनियर मोहम्मद आकिफ पर 33 नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप है। सीबीआई की जांच में यह बात सामने आई थी कि इन नाबालिगों के अश्लील वीडियो बेल्जियम सहित 47 देशों में बेचे जाते थे। इस मामले में सीबीआई ने 17 नवंबर 2020 को जेई रामभवन को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अन्य सह-आरोपी भी पकड़े गए। 20 फरवरी को विशेष अदालत ने जेई रामभवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई थी।
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बुधवार को विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत में इस मामले की सुनवाई होनी थी। मंडल कारागार की बैरक नंबर तीन ए में निरुद्ध कैदी नंबर 41, जेई रामभवन को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश किया गया। जहां उन्होंने अपने हस्ताक्षर किए। वहीं, सह-आरोपी और जमानत पर चल रहे इंजीनियर मोहम्मद आकिफ के अधिवक्ता ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनके मुवक्किल का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए वे पेश नहीं हो सकते। अधिवक्ता ने बताया कि जेई रामभवन के सजायाफ्ता होने के पिछले मुकदमे को लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने पूर्व में निर्देश दिया था कि मुकदमे की सुनवाई तेजी से की जाए। इसके अलावा सीबीआई लोक अभियोजक धारा सिंह और आईटी एक्ट के मुकदमे के मुख्य गवाह, दिल्ली के केनरा बैंक मैनेजर मनोज सिंह गौतम भी पेश नहीं हो सके। उन्हें दूसरे मामले में व्यस्तता के कारण अदालत में उपस्थित होने में असमर्थता जताई। पिछली पेशी में गवाह के बयान आधे ही दर्ज हो पाए थे, जिन्हें इस बार पूरा किया जाना था।
अगली सुनवाई और लंबित मामले
न्यायालय ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 7 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है। इस दिन इंजीनियर मोहम्मद आकिफ, गवाह और आईटी एक्ट से जुड़े अन्य सभी प्रमुख लोगों को सम्मन तामील कराए जाएंगे। यह भी बताया गया है कि जेई रामभवन और इंजीनियर आकिफ के खिलाफ आईटी एक्ट व संगठित होकर साजिश रचने का मुकदमा 31 अक्टूबर 2020 को दिल्ली में दर्ज हुआ था। 2021 में इस मामले में आरोप तय किए गए थे और सीबीआई ने 12 गवाहों को सूचीबद्ध किया है। इधर, जेल में निरुद्ध अन्य बंदियों के विपरीत, सजायाफ्ता जेई रामभवन को अलग से पुलिस की बोलेरो में कड़ी निगरानी में न्यायालय तक लाया गया। इस दौरान एक एसएसआई और चार पुलिसकर्मी उनकी सुरक्षा में तैनात थे।