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Banda News: ठगी पीड़ितों ने बुलंद की आवाज, पूंजी वापस कराए सरकार
Mon, 27 Jul 2026 11:32 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 27 Jul 2026 11:32 PM IST
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फोटो-1- कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते ठगी पीड़ित जमाकर्ता संगठन के सदस्य। संवाद
- फोटो : Archive
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बांदा। संस्थाओं में रकम दोगुना होने की लालच में डूबी धनराशि को वापस पाने के लिए पीड़ितों ने आवाज बुलंद की है। पीड़ितों ने कहा कि अब तक प्रशासन की ओर से ठगी से पीड़ित परिवारों की कोई मदद नहीं की जा रही है। जबकि ऐसे मामलों के लिए कानूनी प्रक्रिया मौजूद है।
ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार के बैनर तले पीड़ित लोग सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट संदीप केला को सौंपा। बताया गया कि कई कंपनियों में हजारों लोगों ने अपने लाखों रुपये निवेश किए थे। यह कंपनियां या तो बंद हो गई है या फिर प्रतिबंधित हो गई हैं। ऐसे में लोगों का निवेश किया गया रुपया भी डूब गया है।
यह रुपया वापस दिलाने के लिए संसद में अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी कानून (बड्स एक्ट 2019) बनाया गया और राज्य सरकार ने मंडलायुक्त को अपने क्षेत्र में सक्षम अधिकारी नियुक्त किया है। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय में बने शिकायत प्रकोष्ठ में ठगी पीड़ितों के आवेदन लिए गए थे। जमा हो चुके आवेदनों पर अब तक मंडलायुक्त या जिलाधिकारी स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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केवल बांदा में ही नहीं, मंडल के अन्य जनपद में भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि कानून में यह स्पष्ट लिखा है कि 180 दिन के अंदर डूबी रकम वापस कराई जाएगी। पीड़ितों ने प्रशासन से डूबी रकम को वापस कराने की मांग की। इस मौके पर संगठन के जिलाध्यक्ष कमलेश कुमार, शिवनारायण साहू, सभाजीत आदि मौजूद रहे।
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ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार के बैनर तले पीड़ित लोग सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट संदीप केला को सौंपा। बताया गया कि कई कंपनियों में हजारों लोगों ने अपने लाखों रुपये निवेश किए थे। यह कंपनियां या तो बंद हो गई है या फिर प्रतिबंधित हो गई हैं। ऐसे में लोगों का निवेश किया गया रुपया भी डूब गया है।
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यह रुपया वापस दिलाने के लिए संसद में अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी कानून (बड्स एक्ट 2019) बनाया गया और राज्य सरकार ने मंडलायुक्त को अपने क्षेत्र में सक्षम अधिकारी नियुक्त किया है। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय में बने शिकायत प्रकोष्ठ में ठगी पीड़ितों के आवेदन लिए गए थे। जमा हो चुके आवेदनों पर अब तक मंडलायुक्त या जिलाधिकारी स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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केवल बांदा में ही नहीं, मंडल के अन्य जनपद में भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि कानून में यह स्पष्ट लिखा है कि 180 दिन के अंदर डूबी रकम वापस कराई जाएगी। पीड़ितों ने प्रशासन से डूबी रकम को वापस कराने की मांग की। इस मौके पर संगठन के जिलाध्यक्ष कमलेश कुमार, शिवनारायण साहू, सभाजीत आदि मौजूद रहे।