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Banda News: प्रधानमंत्री फसल बीमा क्लेम जांच से फेर में फंसा

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 12:13 AM IST
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Prime Minister's crop insurance claim caught in a quandary due to investigation
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जाच से फेर में फंसा प्रधानमंत्री फसल बीमा क्लेम
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- खरीफ में 132723 ऋणी व 16522 गैर ऋणी किसानों ने कराया था बीमा

- बाढ़ व अतिवर्षा से क्षतिग्रस्त हो गई थी 48 गांवों में 2033 हेक्टेयर फसल
संवाद न्यूज एजेंसी



फसल बीमा क्लेम जांच के चलते अटका, किसान परेशान



बांदा। खरीफ सीजन में बाढ़ और अतिवर्षा से क्षतिग्रस्त हुई फसलों का भुगतान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत एक विस्तृत जांच के कारण अटक गया है। इस देरी से किसानों में भारी नाराजगी है, क्योंकि वे अपनी अगली फसल की बुवाई के लिए आर्थिक सहायता पर निर्भर हैं। कई जनपदों में योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताएं मिलने के बाद सरकार ने जिले में खरीफ के पंजीकृत किसानों की जांच का आदेश दिया है, जिसके चलते बीमा कंपनियां भुगतान रोक रही हैं।



प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। हाल ही में बुंदेलखंड के महोबा सहित प्रदेश के कई जिलों से इस योजना में गड़बड़ियों की खबरें सामने आई हैं। इसी पृष्ठभूमि में, सरकार ने योजना के तहत पंजीकृत किसानों की गहन जांच शुरू की है।
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जिले में खरीफ सीजन के दौरान कुल 132,723 ऋणी और 16,522 गैर-ऋणी किसानों ने इस बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का पंजीकरण कराया था। यह संख्या योजना के प्रति किसानों के विश्वास को दर्शाती है। यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने स्वीकार किया है कि अगस्त माह में यमुना और केन नदियों में आई बाढ़ तथा भारी वर्षा के कारण 48 गांवों की 2033 हेक्टेयर फसल को 50 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ। इस क्षति का अनुमान लगभग 35 करोड़ रुपये आंका गया है।



भुगतान में देरी से किसानों की चिंता बढ़ी



कंपनी ने तीन हजार से अधिक ऋणी और गैर-ऋणी किसानों की सूची उनके क्लेम के लिए मुख्यालय भेजी थी। इसके अतिरिक्त, कंपनी के सर्वे में यह भी पाया गया कि 2786 हेक्टेयर क्षेत्र में किसान खरीफ की फसल ही नहीं बो पाए, जिसका क्लेम भी मुख्यालय को भेजा गया है। बीमा कंपनी वर्तमान में जांच के नाम पर किसानों के क्लेम का भुगतान रोक रही है। यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि वे अपनी क्षतिग्रस्त फसलों के मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।



उप निदेशक कृषि अभय यादव ने बताया कि जांच प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट बीमा कंपनी को भेजी जाएगी, जिसके बाद क्लेम का भुगतान शुरू हो जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जो किसान शेष रह गए हैं, उनके क्लेम भी जल्द ही जारी कर दिए जाएंगे। ज्ञात हो कि बीमा कंपनी द्वारा पहले ही 6111 किसानों को 2 करोड़ 27 लाख 538 रुपये का क्लेम वितरित किया जा चुका है। इस बीच, बीमा क्लेम में देरी से किसानों की वित्तीय योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जो उनकी अगली फसल की तैयारी को बाधित कर सकता है।
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