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Barabanki News: 15 संदिग्ध रडार पर, पांच-पांच मामलों में ली हैं जमानत
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 16 Apr 2026 01:38 AM IST
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बाराबंकी। बाराबंकी में संगीन अपराधों के आरोपियों को जेल से बाहर निकालने के लिए जमानत का एक संदिग्ध सिंडिकेट सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। पुलिस की जांच में 15 ऐसे जमानतदार चिह्नित हुए हैं, जिन्होंने पांच या उससे अधिक बार जमानत ली है। इनमें अधिकांश जमानत गोहत्या, पशु तस्करी, दुष्कर्म, हत्या और अन्य गंभीर अपराधों के आरोपियों की ली गई हैं।
100 से अधिक ऐसे लोग भी सामने आए हैं, जिन्होंने दो-दो बार जमानत ली। इस खुलासे के बाद जांच हो रही है कि कहीं संगठित नेटवर्क तो गंभीर मामलों में बंद लोगों को जेल से बाहर निकालने का काम नहीं कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस को पहले ही इनपुट मिल चुके थे कि जिले में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमानत कराने का गिरोह सक्रिय है। पिछले साल ही देवा और शहर कोतवाली में दो मामलों में 34 लोगों के खिलाफ फर्जी प्रपत्रों के आधार पर जमानत लेने का मामला उजागर हो चुका है, जिसमें देवा से तीन आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। इसी के बाद एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने पिछले दो-तीन वर्षों के सभी गंभीर मामलों की जमानतों का डाटा खंगालने के निर्देश दिए।
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हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, चोरी, गोहत्या और तस्करी जैसे मामलों में जमानत लेने वालों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला गया। पुलिस की विशेष सेल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से जब दस्तावेजों का मिलान किया तो यह चौंकाने वाले पैटर्न सामने आए।
जांच में यह आशंका गहराई है कि कई मामलों में एक ही संपत्ति को आधार बनाकर अलग-अलग आरोपियों की जमानत तो नहीं ली गई। पुलिस इन सभी जमानतदारों के दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। हर प्रपत्र, संपत्ति और गारंटर का डाटा खंगाला जा रहा है।
सबसे अधिक जमानत पशु तस्करी के केस की
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन 15 लोगों ने पांच से अधिक बार जमानत ली है, उनमें ज्यादातर मामले गोहत्या और तस्करी से जुड़े हैं। इससे यह शक और मजबूत हो गया है कि यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनियोजित जमानत कारोबार हो सकता है।
फर्जीवाड़ा साबित तो लगेगा गैंगस्टर
एसपी अर्पित विजयवर्गीय किसी भी जमानत में फर्जीवाड़ा साबित हुआ तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय है। जरूरत पड़ी तो गैंग बनाकर काम करने वालों पर गैंगस्टर भी लगाया जाएगा। पुलिस जमानत के दस्तावेजों की जांच कर रही है।
100 से अधिक ऐसे लोग भी सामने आए हैं, जिन्होंने दो-दो बार जमानत ली। इस खुलासे के बाद जांच हो रही है कि कहीं संगठित नेटवर्क तो गंभीर मामलों में बंद लोगों को जेल से बाहर निकालने का काम नहीं कर रहा है।
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सूत्रों के मुताबिक पुलिस को पहले ही इनपुट मिल चुके थे कि जिले में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमानत कराने का गिरोह सक्रिय है। पिछले साल ही देवा और शहर कोतवाली में दो मामलों में 34 लोगों के खिलाफ फर्जी प्रपत्रों के आधार पर जमानत लेने का मामला उजागर हो चुका है, जिसमें देवा से तीन आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। इसी के बाद एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने पिछले दो-तीन वर्षों के सभी गंभीर मामलों की जमानतों का डाटा खंगालने के निर्देश दिए।
हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, चोरी, गोहत्या और तस्करी जैसे मामलों में जमानत लेने वालों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला गया। पुलिस की विशेष सेल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से जब दस्तावेजों का मिलान किया तो यह चौंकाने वाले पैटर्न सामने आए।
जांच में यह आशंका गहराई है कि कई मामलों में एक ही संपत्ति को आधार बनाकर अलग-अलग आरोपियों की जमानत तो नहीं ली गई। पुलिस इन सभी जमानतदारों के दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। हर प्रपत्र, संपत्ति और गारंटर का डाटा खंगाला जा रहा है।
सबसे अधिक जमानत पशु तस्करी के केस की
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन 15 लोगों ने पांच से अधिक बार जमानत ली है, उनमें ज्यादातर मामले गोहत्या और तस्करी से जुड़े हैं। इससे यह शक और मजबूत हो गया है कि यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनियोजित जमानत कारोबार हो सकता है।
फर्जीवाड़ा साबित तो लगेगा गैंगस्टर
एसपी अर्पित विजयवर्गीय किसी भी जमानत में फर्जीवाड़ा साबित हुआ तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय है। जरूरत पड़ी तो गैंग बनाकर काम करने वालों पर गैंगस्टर भी लगाया जाएगा। पुलिस जमानत के दस्तावेजों की जांच कर रही है।