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Barabanki News: हाईकोर्ट की रोक के बावजूद अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनी निर्माण
Fri, 31 Jul 2026 02:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:11 AM IST
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हाईकोर्ट की रोक के बावजूद अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनी निर्माण
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बाराबंकी। शहर और आसपास के क्षेत्रों में मनमाने तरीके से नियमों को ताक पर रखकर अवैध प्लॉटिंग की गई है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के रोक के बावजूद प्लॉट बेचे गए और पूरी कॉलोनी बसा दी गई। अधिकारी अवैध प्लॉटिंग स्थलों पर नींवों को ध्वस्त कर स्वयं अपनी पीठ थपथपाते हैं। शहर में हैदरगढ़ रोड पर स्थित कार्तिक बिहार कॉलोनी इसका एक बड़ा उदाहरण है।
वर्ष 2012 तक यहां कोई भवन नहीं बना था। यह स्थल मौरंग मंडी के रूप में जाना जाता था। एक भू-संपत्ति विक्रेता ने इस जमीन पर अवैध प्लॉटिंग की। भू-संपत्ति विक्रेता ने पूर्व में बसी आबादी की ओर के रास्ते बंद कर दिए थे। स्थानीय निवासी गोपीचंद और अन्य लोगों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
उच्च न्यायालय ने अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगा दी थी। तत्कालीन एसडीएम अनिल कुमार सिंह ने न्यायालय में हलफनामा दाखिल किया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि किसी तरह की प्लॉटिंग नहीं होने दी जाएगी। इसके बाद जाॅइंट मजिस्ट्रेट शिव सहाय अवस्थी ने मौके पर जाकर बंद रास्ते खुलवाए थे। नगर कोतवाली पुलिस को भी अवैध प्लॉटिंग पर किसी गतिविधि को रोकने के निर्देश दिए गए थे।
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अधिकारियों के बदलने से बदली स्थिति--
अधिकारियों के बदलने के साथ ही हालात बदल गए। मौजूदा समय में अवैध प्लॉटिंग स्थल पर पूरी कॉलोनी बसी हुई है। शायद ही किसी ने अपने मकान का मानचित्र स्वीकृत कराया हो। इसी तरह कटहलीबाग, महुआरी बाग और हजाराबाग में भी अवैध निर्माण हुए हैं। इन क्षेत्रों में हरित पट्टी के पेड़ काट दिए गए। 10-12 साल के अंदर यहां भी कॉलोनी बन गई।
विनियमित क्षेत्र कार्यालय से इन सभी स्थानों पर लोगों को नोटिस दी गईं। जाॅइंट मजिस्ट्रेट गुंजिता अग्रवाल का कहना है कि अवैध प्लाॅटिंग करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है।
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वर्ष 2012 तक यहां कोई भवन नहीं बना था। यह स्थल मौरंग मंडी के रूप में जाना जाता था। एक भू-संपत्ति विक्रेता ने इस जमीन पर अवैध प्लॉटिंग की। भू-संपत्ति विक्रेता ने पूर्व में बसी आबादी की ओर के रास्ते बंद कर दिए थे। स्थानीय निवासी गोपीचंद और अन्य लोगों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
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उच्च न्यायालय ने अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगा दी थी। तत्कालीन एसडीएम अनिल कुमार सिंह ने न्यायालय में हलफनामा दाखिल किया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि किसी तरह की प्लॉटिंग नहीं होने दी जाएगी। इसके बाद जाॅइंट मजिस्ट्रेट शिव सहाय अवस्थी ने मौके पर जाकर बंद रास्ते खुलवाए थे। नगर कोतवाली पुलिस को भी अवैध प्लॉटिंग पर किसी गतिविधि को रोकने के निर्देश दिए गए थे।
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अधिकारियों के बदलने से बदली स्थिति
अधिकारियों के बदलने के साथ ही हालात बदल गए। मौजूदा समय में अवैध प्लॉटिंग स्थल पर पूरी कॉलोनी बसी हुई है। शायद ही किसी ने अपने मकान का मानचित्र स्वीकृत कराया हो। इसी तरह कटहलीबाग, महुआरी बाग और हजाराबाग में भी अवैध निर्माण हुए हैं। इन क्षेत्रों में हरित पट्टी के पेड़ काट दिए गए। 10-12 साल के अंदर यहां भी कॉलोनी बन गई।
विनियमित क्षेत्र कार्यालय से इन सभी स्थानों पर लोगों को नोटिस दी गईं। जाॅइंट मजिस्ट्रेट गुंजिता अग्रवाल का कहना है कि अवैध प्लाॅटिंग करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है।