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हिंदुओं के संगठित होने से भारत बनेगा विश्व गुरु : अशोक केडिया
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 10 Jan 2026 10:05 PM IST
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ख़ासपरिया में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को मां सरस्वती के चित्र को प्रणाम करते आरएसएस के क्षेत्र सा
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बाराबंकी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शनिवार को जनपद के बंकी ब्लॉक स्थित खसपरिया और निंदूरा ब्लॉक के खिंझना में भव्य हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया।
खसपरिया में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के क्षेत्र सामाजिक सद्भाव प्रमुख अशोक केडिया ने कहा कि वैदिक काल से ही सनातन धर्म को मानने वाले सभी हिंदू एक हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमारी कार्यशैली, भाषा और जाति भले ही अलग हो सकती है, परंतु हम सभी का मूल जुड़ाव सनातन धर्म से ही है। बताया कि वैदिक विचारधारा से ही वैष्णव, शैव, शाक्य, बौद्ध, जैन और आर्य समाज जैसी विभिन्न धाराएं निकली हैं, लेकिन इनमें से किसी ने भी वेदों और भारतीय जीवन मूल्यों का विरोध नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेद प्रेम और भाईचारे की शिक्षा देते हैं और इनमें छुआछूत का कोई स्थान नहीं है।
महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने रामायण लिखकर विश्व पटल पर भारत की पहचान बनाई, किंतु वर्तमान में हिंदू समाज जाति, रंग और ऊंच-नीच के भेदभाव में बंटकर असंगठित हो गया है। इसी बिखराव का लाभ उठाकर मुगलों और अंग्रेजों ने भारत पर सदियों तक शासन किया। इसी असंगठित समाज को एकजुट करने के उद्देश्य से डॉ. हेडगेवार ने वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विवेक वर्मा ने की और संचालन विजय कुमार द्वारा किया गया, जबकि स्वामी चेतनानंद ने संत समाज का प्रतिनिधित्व किया।
इसी क्रम में, निंदूरा के खिंझना स्थित अजय पालन मंदिर में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रांत महाविद्यालयीन विद्यार्थी कार्य प्रमुख पंकज पटवा ने कहा कि संघ राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि मानते हुए समाज को संगठित करने का निरंतर कार्य कर रहा है। इस सत्र की अध्यक्षता विहिप के जिलाध्यक्ष रामनाथ मौर्य ने की। इस अवसर पर जिला प्रचारक रवि प्रकाश, जिला कार्यवाह सुधीर, पारितोष, राम दास और प्रदीप सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, मसौली की प्रतापगंज ग्राम पंचायत स्थित शिव मंदिर पर भी हिंदू सम्मेलन संपन्न हुआ, जिसमें साहित्यकार अजय सिंह, शांति स्वरूप आर्य और सतीश सोनी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया।
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खसपरिया में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के क्षेत्र सामाजिक सद्भाव प्रमुख अशोक केडिया ने कहा कि वैदिक काल से ही सनातन धर्म को मानने वाले सभी हिंदू एक हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमारी कार्यशैली, भाषा और जाति भले ही अलग हो सकती है, परंतु हम सभी का मूल जुड़ाव सनातन धर्म से ही है। बताया कि वैदिक विचारधारा से ही वैष्णव, शैव, शाक्य, बौद्ध, जैन और आर्य समाज जैसी विभिन्न धाराएं निकली हैं, लेकिन इनमें से किसी ने भी वेदों और भारतीय जीवन मूल्यों का विरोध नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेद प्रेम और भाईचारे की शिक्षा देते हैं और इनमें छुआछूत का कोई स्थान नहीं है।
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महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने रामायण लिखकर विश्व पटल पर भारत की पहचान बनाई, किंतु वर्तमान में हिंदू समाज जाति, रंग और ऊंच-नीच के भेदभाव में बंटकर असंगठित हो गया है। इसी बिखराव का लाभ उठाकर मुगलों और अंग्रेजों ने भारत पर सदियों तक शासन किया। इसी असंगठित समाज को एकजुट करने के उद्देश्य से डॉ. हेडगेवार ने वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विवेक वर्मा ने की और संचालन विजय कुमार द्वारा किया गया, जबकि स्वामी चेतनानंद ने संत समाज का प्रतिनिधित्व किया।
इसी क्रम में, निंदूरा के खिंझना स्थित अजय पालन मंदिर में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रांत महाविद्यालयीन विद्यार्थी कार्य प्रमुख पंकज पटवा ने कहा कि संघ राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि मानते हुए समाज को संगठित करने का निरंतर कार्य कर रहा है। इस सत्र की अध्यक्षता विहिप के जिलाध्यक्ष रामनाथ मौर्य ने की। इस अवसर पर जिला प्रचारक रवि प्रकाश, जिला कार्यवाह सुधीर, पारितोष, राम दास और प्रदीप सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, मसौली की प्रतापगंज ग्राम पंचायत स्थित शिव मंदिर पर भी हिंदू सम्मेलन संपन्न हुआ, जिसमें साहित्यकार अजय सिंह, शांति स्वरूप आर्य और सतीश सोनी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया।