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Barabanki News: 42 प्रवेश द्वारों पर पुलिस की तीसरी आंख का पहरा

संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Wed, 08 Apr 2026 02:10 AM IST
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Police's third eye guards 42 entry points
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बाराबंकी। जनपद की सीमाओं को अभेद्य बनाने और सुरक्षा व्यवस्था को डिजिटल युग के अनुरूप ढालने के लिए बाराबंकी पुलिस ने एक वृहद कार्ययोजना तैयार की है। जिले के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों (एंट्री पॉइंट्स) पर अब तीसरी आंख का कड़ा पहरा होगा। पुलिस विभाग ने जिले की सीमाओं से सटे करीब 42 स्थानों को चिह्नित किया है, जहां अत्याधुनिक हाई-विजुअल नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
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बाराबंकी जिला भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील है। इसकी सीमाएं राजधानी लखनऊ के साथ-साथ अयोध्या, बहराइच, सीतापुर, रायबरेली, सुल्तानपुर और अमेठी जैसे महत्वपूर्ण जिलों से मिलती हैं। लखनऊ-अयोध्या हाईवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और किसान पथ जैसे व्यस्त मार्गों के कारण यहां संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। पुलिस की इस नई योजना का उद्देश्य अपराधियों की आवाजाही पर पूर्ण विराम लगाना है।
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अधिकारियों की जेब में होगा कंट्रोल रूम

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कनेक्टिविटी है। सभी 42 पॉइंट पर लगने वाले कैमरों की लाइव फीड न केवल मुख्य कंट्रोल रूम में उपलब्ध होगी, बल्कि जिले के आला अधिकारियों के मोबाइल फोन से भी जुड़ी रहेगी। एएसपी उत्तरी विकास चंद्र त्रिपाठी के अनुसार, अधिकारी कहीं भी रहकर रीयल-टाइम फुटेज देख सकेंगे, जिससे किसी भी संदिग्ध घटना या वाहन की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।



रात के अंधेरे में भी स्पष्ट तस्वीर
पूर्व में लगे सामान्य कैमरों की सीमाओं को देखते हुए, अब हाई-डेफिनिशन कैमरों का चयन किया गया है। ये कैमरे रात के अंधेरे में भी स्पष्ट तस्वीर और नंबर प्लेट पढ़ने में सक्षम होंगे। मुख्य मार्गों के अलावा वैकल्पिक रास्तों जैसे असंद्रा-मवई, सतरिख-चिनहट और सुबेहा-बाजारशुकुल मार्ग को भी इस नेटवर्क में शामिल किया गया है, ताकि अपराधी इन रास्तों का लाभ न उठा सकें।



जिम्मेदारी तय करने में भी सहायक
यह तकनीक केवल अपराध तक सीमित नहीं रहेगी। अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों पर होने वाले बड़े आयोजनों के दौरान जब ट्रैफिक डायवर्जन लागू होता है, तब इन कैमरों के जरिए बॉर्डर पर दबाव को नियंत्रित करना आसान होगा। साथ ही, अलग-अलग जिलों के बीच होने वाले सीमा विवादों और जिम्मेदारी तय करने में भी यह डिजिटल साक्ष्य अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।
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