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Barabanki News: सरकारी तंत्र की बेरुखी ने निगले खेल मैदान
Fri, 24 Jul 2026 02:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 24 Jul 2026 02:07 AM IST
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जिले में खेल और खिलाड़ियों का भविष्य संवारने वाले विद्यालयों के मैदान प्रशासनिक उपेक्षा, सरकारी
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बाराबंकी। जिले में खेल और खिलाड़ियों का भविष्य संवारने वाले विद्यालयों के मैदान प्रशासनिक उपेक्षा, सरकारी कब्जों और कानूनी दांव-पेचों की बलि चढ़ चुके हैं। स्थिति यह है कि कागजों पर तो बड़े-बड़े खेल मैदान दर्ज हैं लेकिन धरातल पर वो या तो कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो चुके हैं या फिर ग्राम पंचायतों के विवादों में उलझे पड़े हैं। ऐसे में जिले के हजारों होनहार खिलाड़ी एक-एक इंच जमीन के लिए तरस रहे हैं और विद्यालयों में खेल गतिविधियां महज एक बरामदे या छोटे से लॉन तक सिमटकर रह गई हैं।
सरकारी निर्माणों की भेंट चढ़ी खिलाड़ियों की नर्सरी
शहर के बीचों-बीच स्थित जीआईसी का ऐतिहासिक मैदान कभी जिले के उभरते खिलाड़ियों के लिए नर्सरी का काम करता था लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते इस विशाल मैदान को टुकड़ों में बांटकर निगल लिया गया। मैदान के एक हिस्से पर राजकीय पुस्तकालय खड़ा कर दिया गया। दूसरे हिस्से में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय का निर्माण हो गया।
रही-सही कसर एक विशाल ऑडिटोरियम ने पूरी कर दी। कहने को ऑडिटोरियम सरकारी प्रयोग के लिए बना है लेकिन सालभर यहां व्यावसायिक गतिविधियां चलती रहती हैं। आज खिलाड़ियों के पास दौड़ने और खेलने के लिए नाममात्र की जगह बची है।
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सरस्वती जयंती इंटर कॉलेज त्रिवेदीगंज
लिखापढ़ी न होने से उगीं झाड़ियां, कोर्ट में उलझा मामला
इस कॉलेज का खेल मैदान ग्राम पंचायत की जमीन पर स्थित था। स्कूल प्रशासन की लापरवाही के कारण मैदान अपने नाम दर्ज कराने के लिए पक्की लिखापढ़ी नहीं कराई गई। प्रबंध समिति के आपसी विवाद और सत्ता के गलियारों में हुए बदलावों के बाद ग्राम पंचायत ने अड़ंगा लगा दिया और जमीन वापस मांग ली। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। मुकदमेबाजी के कारण मैदान पूरी तरह बंद है और वहां खेल के सामान की जगह घनी झाड़ियां उग आई हैं।
राष्ट्रीय इंटर कॉलेज रनापुर
ग्राम पंचायत के अड़ंगे से खेल गतिविधियां ठप
राष्ट्रीय इंटर कॉलेज का खेल मैदान भी वर्षों से ग्राम समाज की खाली जमीन पर संचालित हो रहा था। वैधानिक लिखा-पढ़ी न होने का फायदा उठाते हुए ग्राम पंचायत ने जमीन हस्तांतरित करने से साफ मना कर दिया और कब्जा वापस ले लिया। अब इस विद्यालय के पास खेलकूद के लिए एक इंच जमीन भी उपलब्ध नहीं है। मजबूरन छात्र खेल के नाम पर स्कूल के अंदर मौजूद एक छोटे से बरामदेनुमा खाली लॉन में ही समय बिताने को मजबूर हैं।
जनपद इंटर कॉलेज हरख
पंचायत ने खींचे हाथ, बरामदे में सिमटा खिलाड़ियों का सपना
जनपद इंटर कॉलेज हरख के ग्राम पंचायत की जमीन पर चल रहे इस मैदान को लेकर कानूनी पेंच फंसा और पंचायत ने खेल के लिए जमीन देने से हाथ खड़े कर दिए। मैदान हाथ से निकलने के बाद स्कूल में खेल गतिविधियां पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। जिले के लिए मेडल लाने का सपना देखने वाले युवा अब स्कूल के छोटे से लॉन में ही अभ्यास करने की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।
जिन विद्यालयों में खेल मैदानों नहीं है, उन पर कब्जे हैं या भूमि विवाद जैसी स्थितियां है। उनकी कार्ययोजना बनाकर सुधारात्मक कार्य किया जाएगा।
-ईशान प्रताप सिंह, जिलाधिकारी
विद्यालयों के खेल मैदानों को सुरक्षित करना हमारी प्राथमिकता है। त्रिवेदीगंज, रनापुर और हरख समेत अन्य कॉलेजों के भूमि विवाद व हस्तांतरण के समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता कर हल कराने का प्रयास होगा।
- अमिता सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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सरकारी निर्माणों की भेंट चढ़ी खिलाड़ियों की नर्सरी
शहर के बीचों-बीच स्थित जीआईसी का ऐतिहासिक मैदान कभी जिले के उभरते खिलाड़ियों के लिए नर्सरी का काम करता था लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते इस विशाल मैदान को टुकड़ों में बांटकर निगल लिया गया। मैदान के एक हिस्से पर राजकीय पुस्तकालय खड़ा कर दिया गया। दूसरे हिस्से में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय का निर्माण हो गया।
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रही-सही कसर एक विशाल ऑडिटोरियम ने पूरी कर दी। कहने को ऑडिटोरियम सरकारी प्रयोग के लिए बना है लेकिन सालभर यहां व्यावसायिक गतिविधियां चलती रहती हैं। आज खिलाड़ियों के पास दौड़ने और खेलने के लिए नाममात्र की जगह बची है।
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सरस्वती जयंती इंटर कॉलेज त्रिवेदीगंज
लिखापढ़ी न होने से उगीं झाड़ियां, कोर्ट में उलझा मामला
इस कॉलेज का खेल मैदान ग्राम पंचायत की जमीन पर स्थित था। स्कूल प्रशासन की लापरवाही के कारण मैदान अपने नाम दर्ज कराने के लिए पक्की लिखापढ़ी नहीं कराई गई। प्रबंध समिति के आपसी विवाद और सत्ता के गलियारों में हुए बदलावों के बाद ग्राम पंचायत ने अड़ंगा लगा दिया और जमीन वापस मांग ली। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। मुकदमेबाजी के कारण मैदान पूरी तरह बंद है और वहां खेल के सामान की जगह घनी झाड़ियां उग आई हैं।
राष्ट्रीय इंटर कॉलेज रनापुर
ग्राम पंचायत के अड़ंगे से खेल गतिविधियां ठप
राष्ट्रीय इंटर कॉलेज का खेल मैदान भी वर्षों से ग्राम समाज की खाली जमीन पर संचालित हो रहा था। वैधानिक लिखा-पढ़ी न होने का फायदा उठाते हुए ग्राम पंचायत ने जमीन हस्तांतरित करने से साफ मना कर दिया और कब्जा वापस ले लिया। अब इस विद्यालय के पास खेलकूद के लिए एक इंच जमीन भी उपलब्ध नहीं है। मजबूरन छात्र खेल के नाम पर स्कूल के अंदर मौजूद एक छोटे से बरामदेनुमा खाली लॉन में ही समय बिताने को मजबूर हैं।
जनपद इंटर कॉलेज हरख
पंचायत ने खींचे हाथ, बरामदे में सिमटा खिलाड़ियों का सपना
जनपद इंटर कॉलेज हरख के ग्राम पंचायत की जमीन पर चल रहे इस मैदान को लेकर कानूनी पेंच फंसा और पंचायत ने खेल के लिए जमीन देने से हाथ खड़े कर दिए। मैदान हाथ से निकलने के बाद स्कूल में खेल गतिविधियां पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। जिले के लिए मेडल लाने का सपना देखने वाले युवा अब स्कूल के छोटे से लॉन में ही अभ्यास करने की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।
जिन विद्यालयों में खेल मैदानों नहीं है, उन पर कब्जे हैं या भूमि विवाद जैसी स्थितियां है। उनकी कार्ययोजना बनाकर सुधारात्मक कार्य किया जाएगा।
-ईशान प्रताप सिंह, जिलाधिकारी
विद्यालयों के खेल मैदानों को सुरक्षित करना हमारी प्राथमिकता है। त्रिवेदीगंज, रनापुर और हरख समेत अन्य कॉलेजों के भूमि विवाद व हस्तांतरण के समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता कर हल कराने का प्रयास होगा।
- अमिता सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक

जिले में खेल और खिलाड़ियों का भविष्य संवारने वाले विद्यालयों के मैदान प्रशासनिक उपेक्षा, सरकारी

जिले में खेल और खिलाड़ियों का भविष्य संवारने वाले विद्यालयों के मैदान प्रशासनिक उपेक्षा, सरकारी