UP: सतरिख में सैयद सालार की दरगाह पर नहीं लगेगा मेला, पिछले साल भी लगी थी रोक, छह से 10 मई तक होना था आयोजन
बाराबंकी के सतरिख में स्थित सैयद सालार साहू गाजी दरगाह पर इस वर्ष भी मेला आयोजित नहीं होगा। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था की आशंका के चलते अनुमति नहीं दी। दशकों पुरानी परंपरा पर लगातार दूसरे साल रोक से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में निराशा का माहौल है।
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कस्बा सतरिख स्थित सैयद सालार साहू गाजी की दरगाह पर लगने वाला पारंपरिक मेला इस वर्ष भी नहीं लगेगा। प्रशासन ने आयोजन की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है, जिसके बाद मेला कमेटी ने आधिकारिक रूप से मेला न होने की घोषणा करते हुए वीडियो जारी किया है। इसके साथ ही एहतियान पुलिस ने परिसर की निगरानी बढ़ा दी है। पिछले साल पहली बार मेला स्थगित किया गया था।
सतरिख कस्बे के बाहर स्थित इस दरगाह पर दशकों से मेला लगता आया है। पहले इसके संचालन की जिम्मेदारी प्रशासन के पास रहती थी और पांच दिन तक चलने वाले इस आयोजन में बाराबंकी के साथ-साथ लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, अमेठी, गोंडा, हरदोई, उन्नाव, सीतापुर, बहराइच से बड़ी संख्या में दुकानदार और श्रद्धालु पहुंचते थे।
मेले में परंपरा थी कि आम की पहली सीप मजार पर चढ़ाई जाती है। पिछले वर्ष संभल व बहराइच की दरगाहों पर लगने वाले मेले पर रोक के बाद सतरिख में भी तत्कालीन थानाध्यक्ष अमर कुमार चौरसिया ने कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताते हुए मेले के आयोजन पर रोक लगाने की संस्तुति की थी।
अनुमति देने से मना कर दिया
बहराइच स्थित दरगाह सैयद सालार साहू गाजी के बेटे की है। पिछले वर्ष 2025 में 14 से 17 मई तक प्रस्तावित मेले पर प्रशासन ने रोक लगा दी थी। इस बार भी मेला कमेटी ने छह से 10 मई तक आयोजन की अनुमति के लिए प्रस्ताव भेजा, लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए अनुमति देने से मना कर दिया।
इसके बाद एसडीएम स्तर से भी अनुमति नहीं दी गई। दरगाह प्रबंध समिति के सचिव चौधरी कलीमुद्दीन उस्मानी ने वीडियो जारी कर स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अनुमति न मिलने के कारण इस वर्ष भी मेला आयोजित नहीं किया जाएगा। उन्होंने बाहर से आने वाले दुकानदारों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मेला स्थल पर न पहुंचें।
महमूद गजनवी के सेनापति थे सालार साहू!
पिछले साल कुछ अधिवक्ताओं और एक हिंदू संगठन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर एतिहासिक तथ्यों के आधार पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि यह मजार सैयद सालार साहू गाजी की है, जिन्हें महमूद गजनवी का सेनापति बताया जाता है। साथ ही महाराजा सुहेलदेव के साथ जुड़े एतिहासिक संदर्भों का भी उल्लेख किया गया। लोगों ने कहा था कि इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है।