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Bareilly News: शहर को कूड़े के ढेर से मिलेगी मुक्ति, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का काम तेज

संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Sun, 12 Apr 2026 12:41 PM IST
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सार

बरेली के सथरापुर गांव में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का काम तेजी से चल रहा है। इस प्लांट के संचालन से शहर को कूड़े के ढेर से निजात मिलेगी। 

Bareilly to be Freed from Piles of Garbage Work on Solid Waste Management Plant Accelerates
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निरीक्षण करते अफसर (फाइल) - फोटो : संवाद
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विस्तार

बरेली में शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है, उन्हें जल्द ही सड़कों और डंपिंग यार्डों में लगे कूड़े के ढेरों से स्थायी मुक्ति मिल जाएगी। नगर निगम ने शहर के 80 वार्डों से प्रतिदिन निकलने वाले करीब 500 मीट्रिक टन कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए सथरापुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थापना का कार्य तेजी से चल रहा है। निगम अधिकारियों के अनुसार, प्लांट पर मशीनों के इंस्टॉलेशन का काम तेजी से चल रहा है और जल्द ही यहां ट्रायल शुरू किया जाएगा।

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इस परियोजना के लिए दिल्ली की संस्था पीपुल्स एसोसिएशन फॉर टोटल हेल्प एप्लूज (पाथ्या) का चयन किया गया है, जिसने मौके पर उपकरण पहुंचाने और उन्हें स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी है। पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने बताया कि यह प्लांट जीरो वेस्ट मैनेजमेंट के सिद्धांत पर आधारित होगा। इसके तहत नगर निगम कार्यदायी संस्था को कचरा निस्तारण के बदले प्रति टन 446 रुपये का भुगतान करेगा।
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योजना के अनुसार, शहर भर से डोर-टू-डोर कलेक्शन के जरिये गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग एकत्र किया जाएगा। गीले कूड़े से सीएनजी, बायो गैस और जैविक खाद तैयार की जाएगी। इससे न केवल पर्यावरण का संरक्षण होगा, बल्कि आय के स्रोत भी विकसित होंगे। मशीनों के पूर्ण संचालन के बाद शहर की सफाई व्यवस्था का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।

प्लांट संचालन के बाद सुधरेगी स्वच्छ रैंकिंग
प्लांट की स्थापना शहर की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगी। बीते वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में बरेली की रैंकिंग उम्मीद के मुताबिक नहीं थी और शहर पिछड़ गया था। पिछले साल कम अंक आने का सबसे बड़ा कारण शहर में लीगेसी वेस्ट यानी कूड़े के पुराने ढेरों का उचित निस्तारण न हो पाना और प्रोसेसिंग प्लांट का अभाव था। कचरे के पृथक्करण और प्रोसेसिंग यूनिट की कमी के चलते केंद्र सरकार की टीम के निरीक्षण में कम अंकों का नुकसान उठाना पड़ा था। अब जबकि 15 अप्रैल के बाद केंद्रीय टीम के सर्वे के लिए पहुंचने की संभावना है, नगर निगम इन कमियों को दूर कर स्वच्छता रैंकिंग में लंबी छलांग लगाने की तैयारी में है।

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