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US Tariff Relief: रुहेलखंड के मेंथॉल और बासमती की खुशबू से फिर महकेगा अमेरिका, टैरिफ में कमी से जगी उम्मीद

अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 04 Feb 2026 12:07 PM IST
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सार

अमेरिकी टैरिफ में कमी होने से रुहेलखंड के निर्यातकों में कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। यहां के निर्यातकों को उत्पाद आपूर्ति के लिए कॉल और मेल आने शुरू हो गए हैं। उम्मीद जताई रही है कि आने वाले दिनों में मेंथॉल और बासमती चावल की खुशबू से अमेरिका फिर महकेगा। 
 

menthol and basmati exports from Rohilkhand will boost after US Tariff Relief
बासमती चावल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पचास फीसदी टैरिफ लागू होने के बाद रुहेलखंड से अमेरिका होने वाला निर्यात ठप है। अब टैरिफ में 32 फीसदी की कमी से उम्मीद है कि मेंथॉल और बासमती चावल की खुशबू से अमेरिका फिर महकेगा और जरी की चमक भी बढ़ेगी। लेकिन, स्थिति साफ होने के बाद ही निर्यात की बात कही जा रही है। उत्पाद आपूर्ति के लिए मंगलवार से कॉल और मेल आना शुरू हो गए हैं। पिछली बार भेजे गए करोड़ों रुपये के स्टॉक का भुगतान अटकने के कारण अब निर्यातक कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।

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उद्यमियों के मुताबिक, रुहेलखंड में मेंथॉल और बासमती चावल की अच्छी पैदावार है। अमेरिका को रुहेलखंड से करीब 80 फीसदी की हिस्सेदारी में मेंथॉल, पिपरमिंट, जरी, फ्रोजन मीट और पीलीभीत से बासमती चावल का निर्यात होता है। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी पहुंचने के बाद निर्यातकों में मायूसी छा गई थी। सालाना अरबों का निर्यात करोड़ों में सिमटने से उद्यमी, निर्यातक और संबंधित किसान-कारीगरों के सामने आर्थिक संकट मंडराने लगा था। कारोबारियों का अनुमान है कि यूरोपियन यूनियन का मैट्रिक्स टैरिफ में गिरावट की अहम वजह बना है।
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वर्तमान में, भारत पर लगा टैरिफ विश्व के कई देशों से काफी कम है। इनमें चीन, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम शामिल हैं। इनपर 19-20 फीसदी अमेरिकी टैरिफ है। लिहाजा, भारत के स्वदेशी उत्पाद की कीमत अमेरिकी बाजार में इन देशों के सापेक्ष कम होने से अच्छी डिमांड का अनुमान निर्यातक जता रहे हैं।

वर्ष 2025-26 में बरेली से निर्यात के आंकड़े
उत्पाद निर्यात (रुपये में)
प्राकृतिक मेंथॉल 47,32,10,507
पिपरमिंट, सुगंधित तेल 33,82,12,633
मेंथॉल संबंधित उत्पाद 15,76,71,346
पर्सनल कंप्यूटर   15,42,18,410
बासमती चावल 13,53,81,875
सिंथेटिक उत्पाद 10,62,99,338
साइक्लेनिक कीटोन्स 8,14,05,895
स्टीम बासमती राइस  7,27,83,881
आयरन, स्टील, रडर 6,58,39,554
बोवाइन बोनलेस मीट 6,01,97,282
नोटः उद्योग विभाग से प्राप्त दिसंबर तक के आंकड़े। 

वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक निर्यात के आंकड़े
उत्पाद   2021-22 2022-23 2023-24 2024-25
मीट बोवाइन, फ्रोजन 142.09 133.70 28.70 18.88
बासमती चावल 35.41 46.75 60.88 21.74
मेंथॉल, पिपरमिंट 76.44 65.81  38.87 36.75
जरी व अन्य   118.24 145.63 77.34 82.94
आर्टिकल्स 31.04 17.72 11.08 12.38
(नोट: आंकड़े यूपी काउंसिल ऑफ एक्सपोर्ट के अनुसार करोड़ रुपये में)
 

आपदा में अवसर जैसा रहा अमेरिकी टैरिफ का बढ़ना 
निर्यातकों के मुताबिक, पिछले वर्ष जून-जुलाई में ट्रंप टैरिफ लागू होने से कारोबार 95 फीसदी प्रभावित हुआ था। लिहाजा, उद्यमी दूसरे देशों में निर्यात की संभावना तलाशने निकलने लगे। जरी के लिए दुबई सेंटर प्वाइंट बना। मेंथॉल के लिए फिलीपींस, सिंगापुर और चीन की ओर बढ़े। मीट कारोबारी खाड़ी प्रदेशों की तरफ चले गए। बासमती चावल के कारोबारी देश में ही खपत बढ़ाने में जुट गए। लिहाजा, करीब छह माह का संकट आपदा में अवसर भी माना जा रहा है। पुराने के साथ नए देश में निर्यात के सकारात्मक असर की उम्मीद है।

वर्षवार बरेली मंडल से निर्यात के आंकड़े और गिरावट 
उद्योग विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बरेली मंडल से वित्त वर्ष 2021-22 में 10.15 अरब, 2022-23 में 9.56 अरब, 2023-24 में 5.56 अरब और 2024-25 में 4.19 अरब रुपये के उत्पाद निर्यात हुए। वर्ष 2022-23 से 2023-24 के दौरान सालभर में ही निर्यात में चार अरब रुपये की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, ट्रंप टैरिफ लागू होने के बाद निर्यात का आंकड़ा बीते वर्ष 170 करोड़ रुपये पर ही सिमट गया था। इससे बरेली का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) भी प्रभावित होने का अनुमान है।

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सुदीप राजगढ़िया और दिनेश गोयल - फोटो : अमर उजाला
कारोबार में आएगी तेजी
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल ने बताया कि टैरिफ में 32 फीसदी की कमी से भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले उत्पाद कई देशों से सस्ते होंगे। इससे कारोबार में तेजी आएगी। रुहेलखंड से मेंथॉल, जरी, बासमती राइस, मीट सर्वाधिक निर्यात होता है। 

जरी उत्पाद के निर्यातक सुदीप राजगढ़िया ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच सकारात्मक माहौल से कारोबार में उछाल आएगा। 50 फीसदी टैरिफ से जरी का निर्यात 150 करोड़ से 10-12 करोड़ रुपये पर सिमट गया है। यह फिर बढ़ने की उम्मीद जगी है। 

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निर्यातक गौरव मित्तल और नईम अहमद - फोटो : अमर उजाला
उद्यमी व मेंथॉल निर्यातक गौरव मित्तल ने कहा कि कुछ वक्त के लिए आए संकट के अब टलने के आसार हैं। लेकिन, इस मुश्किल की घड़ी ने काफी कुछ सिखाया और कारोबार को बढ़ाने के लिए नए विकल्प तलाशने का मौका दिया, जो सकारात्मक रहा।

बहेड़ी के राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नईम अहमद ने बताया कि टैरिफ घटने से भारतीय चावल अमेरिकी बाजार में कम मूल्य पर पहुंचने से निर्यात बढ़ेगा। अबतक करोड़ों के निर्यात पर अंकुश लगने से निर्यातक परेशान रहे। चावल उद्योग बिक्री काफी कम रह गई थी। 
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