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Bareilly News: सिरौली पीएचसी में स्टाफ की कमी, एक लाख की आबादी परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Wed, 18 Mar 2026 06:22 AM IST
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सिरौली। रामपुर सीमा पर स्थित नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) सिरौली बीमार है। मानक के विपरीत यहां स्वीकृत 16 पदों के सापेक्ष मात्र दो कर्मचारी तैनात हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव इस कदर है कि कस्बे की 60 हजार की आबादी और आसपास के दर्जनों गांवों के करीब एक लाख लोग निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं।
मानक और हकीकत - मानकों के अनुसार, इस पीएचसी पर दो डॉक्टर, एक महिला डॉक्टर, चार एएनएम और लैब टेक्नीशियन समेत 16 कर्मियों का स्टाफ होना चाहिए। वर्तमान में यहां केवल एक डॉक्टर और एक संविदा वार्ड बॉय तैनात है। संसाधनों की कमी के कारण अस्पताल में रात्रिकालीन सेवाएं और प्रसव जैसी बुनियादी सुविधाएं ठप हैं। पहले यहां होने वाली मेडिको-लीगल जांच भी अब बंद है, जिसके लिए मरीजों को 15 किमी दूर रामनगर जाना पड़ता है।
आबादी बढ़ी लेकिन दर्जा नहीं - अस्पताल की स्थापना के समय क्षेत्र की आबादी 10 हजार थी, जो अब बढ़कर एक लाख से ज्यादा हो गई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि बढ़ते वर्कलोड को देखते हुए इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का दर्जा दिया जाए। साथ ही, परिसर में सफाई कर्मी की तैनाती नहीं होने से गंदगी का अंबार लगा है। सफाई के लिए अस्पताल प्रबंधन को नगर पंचायत पर निर्भर रहना पड़ता है।
वर्जन,
सीमित स्टाफ के बावजूद हमारी कोशिश रहती है कि मरीजों को अधिकतम लाभ मिले। वर्कलोड अधिक है, जिसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को है। — डॉ. विनोद कुमार, चिकित्सा प्रभारी, सिरौली।
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मानक और हकीकत - मानकों के अनुसार, इस पीएचसी पर दो डॉक्टर, एक महिला डॉक्टर, चार एएनएम और लैब टेक्नीशियन समेत 16 कर्मियों का स्टाफ होना चाहिए। वर्तमान में यहां केवल एक डॉक्टर और एक संविदा वार्ड बॉय तैनात है। संसाधनों की कमी के कारण अस्पताल में रात्रिकालीन सेवाएं और प्रसव जैसी बुनियादी सुविधाएं ठप हैं। पहले यहां होने वाली मेडिको-लीगल जांच भी अब बंद है, जिसके लिए मरीजों को 15 किमी दूर रामनगर जाना पड़ता है।
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आबादी बढ़ी लेकिन दर्जा नहीं - अस्पताल की स्थापना के समय क्षेत्र की आबादी 10 हजार थी, जो अब बढ़कर एक लाख से ज्यादा हो गई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि बढ़ते वर्कलोड को देखते हुए इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का दर्जा दिया जाए। साथ ही, परिसर में सफाई कर्मी की तैनाती नहीं होने से गंदगी का अंबार लगा है। सफाई के लिए अस्पताल प्रबंधन को नगर पंचायत पर निर्भर रहना पड़ता है।
वर्जन,
सीमित स्टाफ के बावजूद हमारी कोशिश रहती है कि मरीजों को अधिकतम लाभ मिले। वर्कलोड अधिक है, जिसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को है। — डॉ. विनोद कुमार, चिकित्सा प्रभारी, सिरौली।