Israel Iran War: खाड़ी देशों में फंसे बरेली के तीन हजार लोग, परिजन कर रहे वतन वापसी की दुआ
ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमले के बाद खाड़ी देशों में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। वहां के हवाई अड्डे बंद हो गए हैं। इससे तमाम भारतीय वहां फंसे हुए हैं। बरेली जिले के करीब तीन हजार लोग खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं।
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युद्ध के माहौल के बीच खाड़ी देशों में बरेली के तीन हजार से अधिक लोग फंसे हुए हैं। ये लोग नौकरी, कारोबार व टूरिस्ट वीजा पर ओमान, कुवैत, सऊदी अरब, दुबई, बहरीन और शारजाह गए हुए हैं। वहां हवाई अड्डे बंद होने से फिलहाल ये लोग फंस गए हैं। इनकी वतन वापसी में समय लग सकता है। इधर परिजन उनकी जल्द वापसी की दुआ कर रहे हैं।
हजियापुर के मुस्तकीम रजा खान ओमान मस्कट में काम करने गए हैं। साथ में उनके दोस्त तिलहर निवासी फरमान और खालिद हैं। मुस्तकीम ने बताया कि उनकी रिहाइश से करीब 45 किलोमीटर दूरी पर मिसाइल से हमला हुआ। इससे यहां सभी दहशत में हैं। माहौल सही होने की दुआ कर रहे हैं। बताया कि वीजा के मुताबिक अभी घर वापसी में छह महीने का वक्त है, लेकिन हालात ऐसे रहे तो जल्द ही लौटने की कोशिश करेंगे।
जसोली के अतहर कुवैत में हैं और उनके भाई जहर जेद्दा में हैं। अतहर ने अपनी मां फहमीदा बेगम से बात कर खैरियत की खबर दी। बताया कि कुवैत में अफरा-तफरी का माहौल है। सेना का मूवमेंट बढ़ गया है। सायरन की आवाजें गूंज रहीं हैं। दहशत हावी है। जखीरा के जुनेद खान सऊदी अरब में हैं। उनकी मां शाहाना ने कॉल करके खैरियत ली। उनका कहना है जंग के हालात से घर के सभी लोग परेशान हैं। हालात बेहतर होने की दुआ कर रहे हैं।
अबुधाबी में हुए हमले
सिविल लाइंस के सैयद मुगीज मंजर के भाई सैयद वामिश और बहन सैयदा शाजिया दुबई में हैं। उन्होंने बताया कि जहां वह लोग हैं, वहां से 50 किलोमीटर दूर अबुधाबी में हमले हुए हैं। सिविल लाइंस की ही निदा की बहन जुबीं और आरिश का निकाह कुछ दिनों पहले दुबई में हुआ है। निदा ने बताया कि उनके वालिद समेत परिवार के कई लोग अभी दुबई में हैं। फ्लाइट कैंसिल होने से ये लोग फंस गए हैं। सबकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं।
हालात बेकाबू हुए तो बंकर में लेंगे शरण
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र अश्विनी कुमार यादव ने बताया कि वह बहरीन के मनामा शहर में शैफ के तौर पर काम कर रहे हैं। वहां अल जुफेर के आर्मी कैंप पर गोलाबारी हो रही है। ऐसे हालात में यहां से निकला भी नहीं जा सकता। फिलहाल अब तक सुरक्षित हैं। अगर हालात बेकाबू होंगे तो यहां बंकर भी बने हैं। रुहेलखंड विवि के पूर्व छात्र रहे असीम मलिक ने बताया कि वह इस समय शारजाह में परिवार के साथ हैं। वहां से व्हाट्सएप कॉल भी नहीं हो पा रही है। सभी हालात ठीक होने की दुआ कर रहे हैं।
जामिया मिलिया इस्लामिया के सेवानिवृत्त प्रोफेसर शहर निवासी इराक रजा जैदी ने बताया कि बरेली के चार-पांच छात्र तेहरान के मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे हैं। क्यूम में धार्मिक शिक्षा लेने यहां से 25 छात्र गए हैं। दो परिवार मशहद में रह रहे हैं। फिलहाल सभी सलामत हैं, पर हालात परेशान करने वाले हैं। शांति के नाम पर जो काम हो रहे हैं, वह ठीक नहीं है। ईरान हमेशा ही भारत का करीबी रहा है। भारत कुछ पहल करे तो बात बन सकती है।
बरेली कॉलेज के फारसी विभाग के प्रो. सदरे आलम ने बताया कि वर्ष 1924 में ईरान में किंगशिप थी, जिसे अमेरिका सपोर्ट करता रहा। जब 1979 ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई तो सुपर पावर इमाम के पास आ गई। इससे अमेरिका को परेशानी हुई और हालात खराब होते चले गए। भारतीय अच्छी नौकरी व सस्ती पढ़ाई के लिए दूसरे देशों का रुख करते हैं। जैसे यूक्रेन व रूस के युद्ध के दौरान कई भारतीय फंसे थे, उसी तरह ईरान में भी फंसे हैं।
गर्म रहा चर्चाओं का बाजार
शहर में दिनभर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई के निधन की खबर से लोग हैरत में रहे। गलियों से लेकर नुक्कड़ और चाय-पान के खोखों तक हर जगह बातचीत का मुद्दा यही रहा। नमाज पढ़कर मस्जिदों से बाहर निकलते लोग भी इसी चर्चा में मशगूल रहे। सब अपने-अपने कयास और तर्क देते रहे। कोई जंग लंबी खिंचने की बात कह रहा था तो किसी ने इसे विश्वयुद्ध का संकेत बताया। कुछ लोगों ने मंहगाई बढ़ने का भी अंदेशा जताया। चर्चा इस बात की भी रही कि दुनिया का कौन सा देश किसके साथ जा सकता है? शाम को शिया समाज ने अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ मार्च निकाला।
