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Bareilly News: कतार में खड़े कराए वाहन, 25 मिनट में जांच दी 35 वाहनों की फिटनेस, ऐसे हो रहा फर्जीवाड़ा

अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Wed, 08 Apr 2026 04:43 PM IST
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सार

बरेली में वाहनों की फिटनेस की जांच के नाम पर जिले में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हो रहा है। मंगलवार को की गई पड़ताल में व्यवस्था की कई खामियां उजागर हुईं। 

Vehicles Lined Up Fitness of 35 Vehicles Cleared in Just 25 Minutes in Bareilly
वाहनों की फिटनेस के लिए ट्रांसपोर्ट नगर में खड़े वाहन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बरेली के ट्रांसपोर्ट नगर में आरआई ने सिर्फ 25 मिनट में 35 वाहनों की फिटनेस जांच दी। इस हिसाब से एक वाहन को उन्होंने औसतन 42 सेकंड का समय दिया। इतने समय में वाहन की चेसिस व इंजन पर दर्ज नंबर का दस्तावेजों से मिलान तक नहीं हो सकता, अन्य मानकों की जांच कैसे की गई होगी इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है। फिटनेस के लिए वाहन लेकर आने वालों ने दलालों पर फिटनेस जल्द व सुविधाजनक तरीके से कराने के नाम पर मोटी रकम वसूलने का आरोप लगाया। 

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जिले में निजी वाहनों की फिटनेस की जांच ट्रांसपोर्ट नगर और व्यावसायिक की बिथरी चैनपुर क्षेत्र में हाईवे के किनारे बने केंद्र पर होती है। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को इन दोनों ही जगहों पर पड़ताल की। दोपहर 12 बजे ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचने पर बताया गया कि यहां पर दोपहर दो बजे के बाद ही वाहनों की कतार लगाने का काम शुरू किया जाता है। इसके बाद ही जांच के लिए संभागीय निरीक्षक (आरआई) आते हैं।
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स्वचालित परीक्षण स्टेशन का हाल 
इसके बाद टीम बिथरी चैनपुर स्थित स्वचालित परीक्षण स्टेशन की पड़ताल करने पहुंची। यहां पर बारी-बारी वाहनों को अंदर जाने की अनुमति दी जा रही थी। ज्यादातर वाहन ऐसे थे, जो सिंडिकेट के जरिए यहां पहुंचे थे। पहुंचते ही वाहन संचालक अंदर बैठे अपने जानने वाले को कॉल करते। अंदर से वह आदमी निकलकर आता। इसके बाद वाहन को अंदर भेजा जा रहा था। यहां पर ऑटो, ट्रक, बस, टैक्सी आदि वाहन फिटनेस जांच के लिए पहुंचे थे।

टीम करीब दो बजे पुन: ट्रांसपोर्ट नगर पहुंची। तब तक वहां वाहनों की लंबी कतार लग चुकी थी। आरआई हारुन सैफी 3:05 बजे पहुंचे। 3:30 बजे निकल गए। यहां पर मौजूद बाहरी व्यक्ति की तरफ से आने वाले वाहनों को पहले ही कतारबद्ध करा लिया गया था। उनके आते ही आरआई के नेतृत्व में प्रत्येक वाहन पर जल्दबाजी में वाहनों के इंजन पर चेसिस नंबर का मिलान करते हुए कागज की जांच करते देखा गया।

25 मिनट में 35 वाहनों की जांच 
स्कूली वाहनों में कैमरों की भी जांच की गई। पुरानी बाइकों की भी फिटनेस हुई। करीब 25 मिनट में 35 वाहनों की जांच करके वह चले गए। इसके बाद भी करीब 10 वाहन जांच के लिए शेष रह गए। इनके संचालक इंतजार ही करते रह गए। यहां मिले आसिफ ने कहा कि बाइक की फिटनेस की जांच कराने आए हैं। आरआई के जल्द चले जाने की वजह से काम हो ही नहीं पाया।

केस - एक
आशापुरम के जेसीबी संचालक ने बाहरी व्यक्ति पर 10 हजार रुपये लेकर फिटनेस जांच करने का आरोप लगाया। कहा कि काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी मंगलवार को काम नहीं हो पाया।

केस- दो
डीआरएम इंटर कॉलेज आंवला की बस परमिट के लिए पहुंची। बस चालक ने उतरते ही लोगों से पूछा कि मेरा कागज यहां किसके पास मिलेंगे। इसके बाद वह बाहरी व्यक्ति से मिला। कुछ ही देर बाद चालक को संबंधित कागज उपलब्ध करा दिए गए। आरआई के आने पर ये कागज उन्हें दिखाने के लिए कहा गया।

एआरटीओ प्रशासन प्रवेश कुमार सरोज ने बताया कि बाहरी व्यक्तियों का व्यवस्था में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं है। यहां पर सिर्फ उन निजी वाहनों की फिटनेस की जांच की जाती है, जिनके पंजीकरण को 15 वर्ष बीत चुके हों। वसूली के जो आरोप लगे हैं, उनकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

एप पर अपलोड नहीं कर रहे जानकारी, 450 बसों का ही विवरण ऑनलाइन
परिवहन विभाग की तरफ से स्कूली वाहनों के लिए अभियान चलाने के बावजूद अब तक महज 450 बसों का विवरण ही ऑनलाइन किया गया है। परिवहन विभाग जागरूक भी कर रहा है, इसके बाद भी ऐसी स्थिति बनी हुई है। प्रदेश में आगरा व अलीगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं में स्कूली छात्राओं की मौत के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। सीएम ने सभी विद्यालयों में संचालित वाहनों का बीमा, फिटनेस, परमिट, चालक की पात्रता एवं अन्य वैधानिक अभिलेखों का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा। 

इसी क्रम में स्कूली वाहनों की प्रभावी निगरानी एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफार्म यूपी-आईएसवीएमपी लांच किया गया। एक से 15 अप्रैल तक विशेष अभियान के क्रम में इस पोर्टल पर स्कूलों में संचालित वाहनों के दस्तावेजों को अपलोड करना है। पोर्टल पर पंजीकृत एवं सत्यापित वाहनों को ही वैध माना जाएगा। एक सप्ताह में बरेली के अंदर 40 वाहनों का चालान किया गया। इसमें इनकी फिटनेस, इश्योरेंस की जांच की गई। साथ ही करीब चार लाख रुपये जुर्माना भी वसूला गया।

आरटीओ प्रशासन पंकज सिंह ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय में संचालित वाहनों का यूपी-आईएसवीएमपी पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। इस संबंध में किसी भी प्रकार की छूट व शिथिलता अनुमन्य नहीं होगी। स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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