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रूटीन चेकअप बना CM जन आरोग्य मेला: विशेषज्ञ गायब, आयुष-फार्मासिस्ट के भरोसे इलाज; सिर्फ 634 मरीज पहुंचे

संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Published by: Rohit Singh Updated Mon, 25 May 2026 02:13 PM IST
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सार

मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन जिले के 39 पीएचसी पर रविवार काे किया गया। बदलते मौसम में वायरल से पीड़ित मरीज पहुंचे, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों के खून की जांच तक नहीं हो सकी। डॉक्टर के न होने से फार्मासिस्ट ने दवा देकर मरीजों को लौटा दिया।

Basti CM Jan Arogya Mela: Specialists missing, treatment dependent on AYUSH-pharmacists
जन आरोग्या मेले में मरीजों को परामर्श देते डॉक्टर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला को स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने पूरी तरह औपचारिक बना डाला। फरमान है कि विशेषज्ञ जांच करेंगे, मगर मेला में आयुष व फार्मासिस्ट ही जांच के लिए उपलब्ध हैं। इससे अधिकांश मरीज या तो मेला से दूरी बनाकर आना छोड़ दिए हैं या फिर जिला स्तरीय अस्पतालों की ओर रुख कर गए हैं। रविवार को सिर्फ 634 मरीजों को परामर्श दिया गया।

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मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन जिले के 39 पीएचसी पर रविवार काे किया गया। बदलते मौसम में वायरल से पीड़ित मरीज पहुंचे, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों के खून की जांच तक नहीं हो सकी। डॉक्टर के न होने से फार्मासिस्ट ने दवा देकर मरीजों को लौटा दिया।

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मरीजों ने बताया कि आरोग्य मेला विशेषज्ञ चिकित्सक और जांच के अभाव में खानापूर्ति साबित हो रहा है। पड़ताल में अधिकांश पीएचसी पर एलोपैथ के डॉक्टर नहीं दिखे। इससे मेला का आयोजन जैसे रूटीन चेकअप स्वास्थ्य केंद्र रहा।

पुरानी बस्ती संवाद के अनुसार, नगरीय पीएचसी बरदहिया में आयोजित जन आरोग्य मेला में दोपहर एक बजे तक डॉ. इंद्रावती ने 25 मरीजों का उपचार किया था। एक मरीज की हालत अधिक खराब होने पर उसे तत्काल ड्रिप चढ़ाई गई। गर्भवती मधु ने बताया कि पीएचसी पर ही जांच और दवा चल रही है।

एकस-रे, अल्ट्रासाउंड व अन्य जांच के लिए महिला अस्पताल जाना पड़ता है। मरीज मालती ने बताया कि कमर में दर्द होने पर वह मेले में आईं थीं। यहीं से उपचार कराती है। जरूरत पड़ने पर ही दूसरे अस्पताल में जाते हैं। पीएचसी नरहरिया में एक बजे तक डॉ. आरपी सिंह ने 35 मरीजों को परामर्श दे चुके थे।

वृद्धि मरीज सरस्वती देवी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर आसानी से सातों दिन उपचार की सुविधा मिल जाती है। विशेषज्ञ के न होने से अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे व अन्य गंभीर जांच नहीं हो पाती। इसके लिए जिला अस्पताल या फिर महिला अस्पताल जाना मजबूरी है।
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बताया गया कि दोनों पीएचसी पर सामान्य दिनों की तुलना में मेला के दिन मरीजों की संख्या 10 प्रतिशत अधिक रहती है। अर्बन हेल्थ कोआर्डिनेटर सच्चिदानंद चौरसिया मौके पर मेला में मौजूद रहे। उन्होंने स्थिति देखी।

वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के पीएचसी पर मेला और सामान्य दिनों की ओपीडी में काफी अंतर है। मेला के दिन सिर्फ खानापूर्ति जबकि सामान्य दिनों में ओपीडी अधिक है। बताते हैं कि विशेषज्ञ न होने के चलते मरीज मेला से दूरी बनाए हुए हैं। जानकारों का कहना है कि सामान्य दिनों की तुलना में यदि मेला के दिन स्पेशल चिकित्सकों की टीम लगाई जाए तो मरीज जागरूक होकर परामर्श के लिए आएंगे। मगर, आयुष, एमबीबीएस के भरोसे ही अस्पताल पर मेला चल रहा है। इससे मरीज मेला में अरुचि दिखा रहे हैं।

पीएचसी बभनान पहुंचे 66 मरीज
पीएचसी बभनान में रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेला का आयोजन हुआ। होम्योपैथ, आयुर्वेदिक एवं यूनानी व एलोपैथ विधा में 66 मरीजों को परामर्श दिया गया। बताया गया कि गर्मी के चलते मरीजों की संख्या कम हुई है। यहां एलोपैथ डॉक्टर नहीं हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. दिनेश यादव के न आने से उपचार की सुविधा नहीं मिल सकी।

होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. आशुतोष गुप्ता ने अन्य मरीजों की जांच की। वहीं एलोपैथिक चिकित्सक की तैनाती न होने से फार्मासिस्ट आशुतोष शुक्ल ने मरीजों की जांच कर दवाएं दी। फार्मासिस्ट राजकरन चौधरी, कन्हैयालाल, श्वेता ने सहयोग किया।

अव्यवस्था से घटते जा रहे मरीज
मुंडेरवा। सीएचसी मुंडेरवा में विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती न होने से मेला सिर्फ औपचारिकता में निपट गया। मरीजों ने बताया कि इसी के चलते मेला से मोहभंग हो रहा है। डॉ. अंकुर शुक्ल ने बताया कि 16 मरीज ही आए। लैब में ब्लड संबंधी जांच नहीं हो सके। फार्मासिस्ट गुलाब कुमार, अंबिका गौड़, ओपी यादव, राजेश यादव ने सहयोग किया।

पीएचसी ओड़वारा में डॉ. अभिषेक सिंह ने बताया कि 16 मरीज ही आए। मरीजों में डिहाईड्रेशन की शिकायत रही। फार्मासिस्ट रीना, ज्योत्सना सिंह ने सहयोग किया। मरीजों ने बताया कि एकल चिकित्सक के चलते ओपीडी सुविधा सिर्फ दिखावा है।

सामान्य दिनों में अधिक होते हैं मरीज
पीएचसी बनकटी में रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला में गिने-चुने मरीज पहुंचे, जबकि सामान्य दिनों में यहां की ओपीडी 70 से 80 होती है। मरीजों के अनुसार, अतिरिक्त चिकित्सकों, दवा व जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही, ऐसे में मरीज भी मेला में नहीं आते। एक्स-रे रूम बंद मिला।

एलटी सुभाष ने बताया कि 40 से 50 मरीजों की जांच प्रतिदिन होती है, मगर रविवार को सिर्फ 15 मरीज ही आए। डॉ. अभिषेक यादव ने बताया कि गर्मी के चलते मरीज कम आ रहे। फार्मासिस्ट पीसी पांडेय दवाएं बांटी। मो. कलीम, सदानंद मिश्र, रामजी ने बताया कि मेला जैसी कोई सुविधा नहीं है। बताया कि रूटीन चेकअप जैसा ही मेला है। पीएचसी खोरिया में डॉक्टर के बजाय फार्मासिस्ट राजेश चौधरी ने 15 मरीजों की जांच की।

मेले में कम आए मरीज
कलवारी। पीएचसी बहादुरपुर में रविवार को 22 मरीजों का इलाज किया गया। डाॅ. पवन कुमार ने बताया कि मेला में बुखार, उल्टी, दस्त, पेट दर्द के मरीजों की संख्या अधिक रही। 22 मई को 81 मरीज, 23 मई को 62 मरीजों की ओपीडी थी, जबकि मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला में सिर्फ 22 मरीजों की ओपीडी हुई। मेला में फार्मासिस्ट जितेंद्र नारायण, एलटी राजेश कुमार, स्टाफ नर्स कल्पना मिश्रा, वार्ड ब्वॉय तेज प्रताप और स्वीपर रमजान अली ने सहयोग किया।

मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला में चिकित्सकों की तैनाती है। ब्लड जांच की सुविधा है। दवाएं पर्याप्त मात्रा में हैं। गर्मी के चलते मरीजों की संख्या में कमी आई है। जहां, डॉक्टर नहीं हैं, वहां के लिए जल्द ही व्यवस्था बनाई जाएगी: डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।
 
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