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Bhadohi News: 175 सालों से ताजिया स्थापित कर रहा हिंदू परिवार
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कोइरौना के कोटिया गांव में हिंदू परिवार मुहर्रम पर बैठाया ताजिया। संवाद
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वहिदानगर। कोइरौना क्षेत्र के कोटिया गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहजीब की एक अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। गांव में एक हिंदू परिवार पिछले लगभग 175 वर्षों से मुहर्रम पर ताजिया बनाकर जुलूस में शामिल करता आ रहा है। गांव निवासी संजय सिंह अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी हैं, जो इस परंपरा का निर्वहन पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ कर रही है।
संजय सिंह ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत उनके पूर्वज ठाकुर हरिमोहन सिंह ने की थी। उनके बाद यह जिम्मेदारी जोखू सिंह, रणधीर सिंह, राजेंद्र बहादुर सिंह और अब संजय सिंह निभा रहे हैं। बताया कि पूर्वजों की मन्नत पूरी होने के बाद शुरू हुई यह परंपरा आज परिवार की अमानत बन चुकी है। हर वर्ष जून माह से ताजिया निर्माण का कार्य शुरू हो जाता है।
लोग खुद से ताजिया का निर्माण करते हैं। इस वर्ष भी परिवार के तीन से चार सदस्य पिछले 20 दिनों से अधिक समय से ताजिए के निर्माण और सजावट में जुटे हैं। बांस, कागज और अन्य पारंपरिक सामग्री से तैयार किए जा रहे ताजिए को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 26 जून को कोइरौना से करबला के लिए निकलने वाले पांच ताजियों में चार मुस्लिम समाज के और एक इस हिंदू परिवार का ताजिया होगा। बताया कि यह परंपरा केवल आस्था नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव, आपसी विश्वास और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का जीवंत प्रतीक है।
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संजय सिंह ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत उनके पूर्वज ठाकुर हरिमोहन सिंह ने की थी। उनके बाद यह जिम्मेदारी जोखू सिंह, रणधीर सिंह, राजेंद्र बहादुर सिंह और अब संजय सिंह निभा रहे हैं। बताया कि पूर्वजों की मन्नत पूरी होने के बाद शुरू हुई यह परंपरा आज परिवार की अमानत बन चुकी है। हर वर्ष जून माह से ताजिया निर्माण का कार्य शुरू हो जाता है।
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लोग खुद से ताजिया का निर्माण करते हैं। इस वर्ष भी परिवार के तीन से चार सदस्य पिछले 20 दिनों से अधिक समय से ताजिए के निर्माण और सजावट में जुटे हैं। बांस, कागज और अन्य पारंपरिक सामग्री से तैयार किए जा रहे ताजिए को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 26 जून को कोइरौना से करबला के लिए निकलने वाले पांच ताजियों में चार मुस्लिम समाज के और एक इस हिंदू परिवार का ताजिया होगा। बताया कि यह परंपरा केवल आस्था नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव, आपसी विश्वास और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का जीवंत प्रतीक है।