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Bhadohi News: एलआईसी को एक लाख रुपये बीमा क्लेम देने का दिया आदेश
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ज्ञानपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय जीवन बीमा कंपनी को परिवादिनी को बीमा राशि एक लाख मय ब्याज सहित देने का आदेश दिया। वाद-व्यय के रूप में पांच हजार भी देने को कहा है।
आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि नईबाजार के नेहरू नगर निवासी सुशीला देवी ने 10 सितंबर 2025 को आयोग में परिवाद दाखिल किया। इसमें एलआईसी के भदोही, वाराणसी और कानपुर के अधिकारियों को वादी बनाया।
बताया कि उसके पति मंगरू राम ने एलआईसी से 16 मार्च 2010 को बीमा कराया। इसमें उसको नॉमिनी बनाया गया। यह पालिसी 20 साल के लिए लिया था। सात मार्च 2025 को उसके पति मंगरू राम की स्वाभाविक मृत्यु हो गई।
उसने अप्रैल 2025 में बीमा कंपनी में सभी जरूरी कागजात को प्रस्तुत किया, लेकिन बीमा कंपनी ने मई 2025 में उसका क्लेम खारिज कर दिया।
परिवादिनी ने बताया कि उसके पति ने लगातार 15 साल तक प्रीमियम का भुगतान किया, लेकिन कंपनी ने क्लेम नहीं दिया। इसके बाद परिवादिनी ने आयोग में परिवाद दाखिल कर क्लेम का एक लाख, उक्त धनराशि पर 18 प्रतिशत ब्याज, मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 25 हजार रुपये देने की मांग की।
आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को एक लाख क्लेम खारिज करने से निर्णय तिथि तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के साथ ही वाद व्यय के रूप में पांच हजार अदा करने का आदेश दिया। दो महीने के अंदर भुगतान न करने पर 12 प्रतिशत ब्याज लगाया जाएगा।
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आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि नईबाजार के नेहरू नगर निवासी सुशीला देवी ने 10 सितंबर 2025 को आयोग में परिवाद दाखिल किया। इसमें एलआईसी के भदोही, वाराणसी और कानपुर के अधिकारियों को वादी बनाया।
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बताया कि उसके पति मंगरू राम ने एलआईसी से 16 मार्च 2010 को बीमा कराया। इसमें उसको नॉमिनी बनाया गया। यह पालिसी 20 साल के लिए लिया था। सात मार्च 2025 को उसके पति मंगरू राम की स्वाभाविक मृत्यु हो गई।
उसने अप्रैल 2025 में बीमा कंपनी में सभी जरूरी कागजात को प्रस्तुत किया, लेकिन बीमा कंपनी ने मई 2025 में उसका क्लेम खारिज कर दिया।
परिवादिनी ने बताया कि उसके पति ने लगातार 15 साल तक प्रीमियम का भुगतान किया, लेकिन कंपनी ने क्लेम नहीं दिया। इसके बाद परिवादिनी ने आयोग में परिवाद दाखिल कर क्लेम का एक लाख, उक्त धनराशि पर 18 प्रतिशत ब्याज, मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 25 हजार रुपये देने की मांग की।
आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को एक लाख क्लेम खारिज करने से निर्णय तिथि तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के साथ ही वाद व्यय के रूप में पांच हजार अदा करने का आदेश दिया। दो महीने के अंदर भुगतान न करने पर 12 प्रतिशत ब्याज लगाया जाएगा।