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शोध में खुलासा: 61 प्रतिशत को असुरक्षित यौन संबंधों से एचआईवी संक्रमण
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अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। महात्मा विदुर स्वाशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के डॉक्टरों की टीम ने टीबी रोगियों में एचआईवी होने की दर पर शोध किया। शोध में शामिल टीबी रोगियों में 67 लोगों में एचआईवी की पुष्टि हुई। अध्ययन में सामने आया कि इनमें से 61 प्रतिशत को असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से एचआईवी संक्रमण हुआ।
मेडिकल कॉलेज की डॉ. पूजा शर्मा, डॉ. कृति गुप्ता, डॉ. राधा चौहान, डॉ. मोहम्मद शारिक ने 2024 में अप्रैल से अक्तूबर तक 6880 मरीजों पर अध्ययन किया। इनमें से 1072 मरीज एचआईवी जांच के लिए एनटीईपी (राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम) से रेफर किए गए थे। यह अध्ययन यूक्रेन की माइक्रोबायोलॉजी की पत्रिका एनेल्स ऑफ मेचनिकोव इंस्टीट्यूट में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में उद्देश्य एचआईवी संक्रमण की दर का मूल्यांकन किया गया। साथ ही टीम ने अध्ययन में टीबी और एचआईवी के बीच संबंध और उनकी संयुक्त स्क्रीनिंग, सरकारी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का विश्लेषण भी किया। इसके लिए दो समूहों स्वयं जांच के लिए आने वाले मरीज और स्वास्थ्यकर्मी द्वारा भेजे गए मरीजों की तुलना की गई।
मरीजों में यह रही एचआईवी संक्रमण की दर
अध्ययन में जिन मरीजों को शामिल किया गया, उनमें से 67 मरीज एचआईवी संक्रमित मिले। जिसके चलते यहां एचआईवी संक्रमण दर 0.97 प्रतिशत पाई गई। इसके अलावा एक अन्य निष्कर्ष यह भी निकला कि फेफड़ों की टीबी पॉजिटिव मरीजों में से 13.2 प्रतिशत मरीज एचआईवी से ग्रसित हैं।
86 प्रतिशत मरीज स्वास्थ्यकर्मियों ने जांच को भेजे
अध्ययन में दो समूहों स्वयं जांच के लिए आने वाले मरीज और स्वास्थ्यकर्मी द्वारा भेजे गए मरीजों को शामिल किया गया। जिन 6880 मरीजों पर अध्ययन हुआ। इसमें 86 प्रतिशत मरीज स्वास्थ्यकर्मी द्वारा जांच के लिए भेजे गए जबकि, 14 प्रतिशत मरीज लक्षणों के आधार पर स्वयं जांच कराने पहुंचे।
सिर्फ टीबी संक्रमित मरीजों की एचआईवी जांच कराना ज्यादा उचित
डॉ. पूजा शर्मा ने बताया कि नाको और एनटीईपी का एकीकृत मॉडल एचआईवी-टीबी नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि टीबी ग्रसित मरीजों को एचआईवी जांच के लिए भेजना लाभकारी है। टीबी निगेटिव मरीजों का एचआईवी जांच कराने का ज्यादा लाभ नहीं है। इससे समय और संसाधन दोनों की बचत होगी।
मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई, इलाज के साथ-साथ अध्ययन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सभी विभाग अलग-अलग विषयों पर अध्ययन कर रहे हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग का टीबी और एचआईवी संक्रमण को लेकर शोध प्रकाशित हुआ है। ....डॉ. तुहीन वशिष्ठ, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
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बिजनौर। महात्मा विदुर स्वाशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के डॉक्टरों की टीम ने टीबी रोगियों में एचआईवी होने की दर पर शोध किया। शोध में शामिल टीबी रोगियों में 67 लोगों में एचआईवी की पुष्टि हुई। अध्ययन में सामने आया कि इनमें से 61 प्रतिशत को असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से एचआईवी संक्रमण हुआ।
मेडिकल कॉलेज की डॉ. पूजा शर्मा, डॉ. कृति गुप्ता, डॉ. राधा चौहान, डॉ. मोहम्मद शारिक ने 2024 में अप्रैल से अक्तूबर तक 6880 मरीजों पर अध्ययन किया। इनमें से 1072 मरीज एचआईवी जांच के लिए एनटीईपी (राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम) से रेफर किए गए थे। यह अध्ययन यूक्रेन की माइक्रोबायोलॉजी की पत्रिका एनेल्स ऑफ मेचनिकोव इंस्टीट्यूट में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में उद्देश्य एचआईवी संक्रमण की दर का मूल्यांकन किया गया। साथ ही टीम ने अध्ययन में टीबी और एचआईवी के बीच संबंध और उनकी संयुक्त स्क्रीनिंग, सरकारी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का विश्लेषण भी किया। इसके लिए दो समूहों स्वयं जांच के लिए आने वाले मरीज और स्वास्थ्यकर्मी द्वारा भेजे गए मरीजों की तुलना की गई।
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मरीजों में यह रही एचआईवी संक्रमण की दर
अध्ययन में जिन मरीजों को शामिल किया गया, उनमें से 67 मरीज एचआईवी संक्रमित मिले। जिसके चलते यहां एचआईवी संक्रमण दर 0.97 प्रतिशत पाई गई। इसके अलावा एक अन्य निष्कर्ष यह भी निकला कि फेफड़ों की टीबी पॉजिटिव मरीजों में से 13.2 प्रतिशत मरीज एचआईवी से ग्रसित हैं।
86 प्रतिशत मरीज स्वास्थ्यकर्मियों ने जांच को भेजे
अध्ययन में दो समूहों स्वयं जांच के लिए आने वाले मरीज और स्वास्थ्यकर्मी द्वारा भेजे गए मरीजों को शामिल किया गया। जिन 6880 मरीजों पर अध्ययन हुआ। इसमें 86 प्रतिशत मरीज स्वास्थ्यकर्मी द्वारा जांच के लिए भेजे गए जबकि, 14 प्रतिशत मरीज लक्षणों के आधार पर स्वयं जांच कराने पहुंचे।
सिर्फ टीबी संक्रमित मरीजों की एचआईवी जांच कराना ज्यादा उचित
डॉ. पूजा शर्मा ने बताया कि नाको और एनटीईपी का एकीकृत मॉडल एचआईवी-टीबी नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि टीबी ग्रसित मरीजों को एचआईवी जांच के लिए भेजना लाभकारी है। टीबी निगेटिव मरीजों का एचआईवी जांच कराने का ज्यादा लाभ नहीं है। इससे समय और संसाधन दोनों की बचत होगी।
मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई, इलाज के साथ-साथ अध्ययन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सभी विभाग अलग-अलग विषयों पर अध्ययन कर रहे हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग का टीबी और एचआईवी संक्रमण को लेकर शोध प्रकाशित हुआ है। ....डॉ. तुहीन वशिष्ठ, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर