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Bijnor News: रेयान को हाईकोर्ट ने किया बरी
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स्योहारा। मृतक डीएसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना का फाइल फोटो
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संवाद न्यूज एजेंसी
स्योहारा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में निचली अदालत से फांसी की सजा पाए आरोपी रेयान को बरी कर दिया है। न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा वर्ष 2022 में सुनाई गई फांसी की सजा को गंभीर त्रुटि मानते हुए रद्द कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला संदेह से भरा है। रेयान के साथ ही फांसी की सजा पाए दूसरे आरोपी मुनीर की मौत हो चुकी है।
दो अप्रैल 2016 को सहसपुर निवासी एनआईए के डीएसपी मोहम्मद तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की स्योहारा क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना उस वक्त हुई जब वे एक शादी समारोह से देर रात लौट रहे थे। बाइक सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें डीएसपी तंजील अहमद की मौके पर व उनकी पत्नी फरजाना की उपचार के दौरान अगले दिन मौत हो गई थी। इस मामले में तंजील अहमद के भाई मोहम्मद रागिब ने स्योहारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जांच के बाद निचली अदालत ने आरोपी सहसपुर के निवासी मुनीर और रेयान को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य आरोपियों तंजीम, जैनी व रिजवान को बरी कर दिया गया था। फैसले के खिलाफ मुनीर और रेयान के परिजनों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। अपील लंबित रहने के दौरान 19 नवंबर 2022 को वाराणसी के सर सुंदरलाल अस्पताल में मुनीर की संक्रमण के कारण मौत हो गई, जिसके चलते उसकी अपील समाप्त हो गई। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।
न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए पाया कि गवाहों के बयान अस्पष्ट और संदिग्ध हैं, जिससे अभियोजन का पूरा मामला कमजोर पड़ता है। न्यायमूर्ति ने अपने 31 मार्च 2026 के फैसले में कहा कि निचली अदालत ने मृत्युदंड देने में गंभीर त्रुटि की है। इसी आधार पर रेयान को सभी आरोपों से बरी करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो। रेयान के पिता सादात हुसैन ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि आखिरकार उनके बेटे के साथ इंसाफ हुआ है। उन्होंने इसे धैर्य और विश्वास की जीत बताया।
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स्योहारा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में निचली अदालत से फांसी की सजा पाए आरोपी रेयान को बरी कर दिया है। न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा वर्ष 2022 में सुनाई गई फांसी की सजा को गंभीर त्रुटि मानते हुए रद्द कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला संदेह से भरा है। रेयान के साथ ही फांसी की सजा पाए दूसरे आरोपी मुनीर की मौत हो चुकी है।
दो अप्रैल 2016 को सहसपुर निवासी एनआईए के डीएसपी मोहम्मद तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की स्योहारा क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना उस वक्त हुई जब वे एक शादी समारोह से देर रात लौट रहे थे। बाइक सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें डीएसपी तंजील अहमद की मौके पर व उनकी पत्नी फरजाना की उपचार के दौरान अगले दिन मौत हो गई थी। इस मामले में तंजील अहमद के भाई मोहम्मद रागिब ने स्योहारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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जांच के बाद निचली अदालत ने आरोपी सहसपुर के निवासी मुनीर और रेयान को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य आरोपियों तंजीम, जैनी व रिजवान को बरी कर दिया गया था। फैसले के खिलाफ मुनीर और रेयान के परिजनों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। अपील लंबित रहने के दौरान 19 नवंबर 2022 को वाराणसी के सर सुंदरलाल अस्पताल में मुनीर की संक्रमण के कारण मौत हो गई, जिसके चलते उसकी अपील समाप्त हो गई। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।
न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए पाया कि गवाहों के बयान अस्पष्ट और संदिग्ध हैं, जिससे अभियोजन का पूरा मामला कमजोर पड़ता है। न्यायमूर्ति ने अपने 31 मार्च 2026 के फैसले में कहा कि निचली अदालत ने मृत्युदंड देने में गंभीर त्रुटि की है। इसी आधार पर रेयान को सभी आरोपों से बरी करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो। रेयान के पिता सादात हुसैन ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि आखिरकार उनके बेटे के साथ इंसाफ हुआ है। उन्होंने इसे धैर्य और विश्वास की जीत बताया।

स्योहारा। मृतक डीएसपी तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना का फाइल फोटो