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Budaun News: आरव के परिजन बोले... 39 रातों बाद आई नींद, अब दोषी को फांसी होने का इंतजार
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जानकारी देते आरव के पिता सुमित कुमार स्त्रोत संवाद
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बदायूं। आरव हत्याकांड में अदालत की ओर से दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। आरव के पिता और दादी का कहना है कि उन्हें पूरी शांति तभी मिलेगी जब सजा पर अमल होगा। परिवार के सदस्यों ने पिछले 40 दिनों के दर्द, बेचैनी और बेटे की यादों को साझा करते हुए कहा कि यह फैसला न्याय की दिशा में बड़ा कदम है।
जिले की सियाराम नगर कॉलोनी निवासी आरव के पिता सुमित कुमार ने भावुक होकर कहा कि 39 रातों के बाद कल पहली बार ठीक से सो पाया हूं। अब बस आरोपी को फांसी पर लटकाने की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। हमारी जो बेचैनी बनी हुई है, वह उसके फांसी के फंदे पर लटकने के साथ ही खत्म होगी।
बोले, न्यायालय और पुलिस की कार्रवाई से मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं। उन्होंने तेजी से कार्रवाई कर आरोपी को सजा दिलाई, जिसने मेरे बच्चे के साथ हैवानियत की उसे उसके अपराध की सजा तो मिलनी ही चाहिए थी। वहीं, आरव की दादी सीमा शर्मा ने मासूम की यादों को साझा करते हुए कहा कि हम उसे नहीं, बल्कि वो सबको खिलाता था। एक साल का होने के बाद भी बड़ों की बातें समझता था।
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बोलीं, पूरा परिवार उसी के आसपास रहता था। दिन में वह मेरे और उसकी मां के साथ रहता, जबकि रात में अपने ताऊ और चाचा के साथ खेलता रहता था। उन्होंने कहा कि 9 जनवरी 2026 को जब आरव घर से मां के साथ गया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि वह कभी वापस नहीं लौटेगा। उसका पहला जन्मदिन पूरे परिवार ने खुशी से मनाया था, लेकिन पिछले 40 दिनों में घर का माहौल पूरी तरह बदल गया।
उन्होंने कहा कि घर में खाना तक ठीक से नहीं बन पाया। चार लोगों के परिवार में एक महीने में एक किलो आटा भी ठीक से खर्च नहीं हुआ। अब फैसले से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन असली सुकून तब मिलेगा जब दोषी को फांसी दी जाएगी।
फैसले के बाद दोषी विराज से जेल में मिलने पहुंचे परिजन
बदायूं। शुक्रवार को फैसला आने के बाद शनिवार सुबह दोषी विराज से मिलने उसके भाई मुनीश और उसकी ताई (बड़ी मां) फिरोजाबाद जेल गए। भाई ने बताया कि विराज से मिलने के बाद वह अदालत से आदेश की कॉपी भी लेकर आए हैं। गांव में मिले दोषी विराज के बड़े भाई राजीव ने बताया कि मां को सबसे छोटे भाई के 14 साल की सजा होने की जानकारी देने पर शुक्रवार देर शाम को उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उनको बदायूं के अमर सिंह के पास से दवा दिलवाई। वहां फायदा नहीं होने पर उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। संवाद
आरव की मां का बड़ा फैसला...कहा-पति सुमित से लूंगी तलाक, अब कभी वापस नहीं जाना घर
- सरकार से लगाई नौकरी और आर्थिक सहायता की गुहार, मायके की आर्थिक हालत खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। शिकोहाबाद के बहुचर्चित आरव हत्याकांड में दरिंदे विराज को फांसी की सजा मिलने के बाद, मृत मासूम की मां रति शर्मा ने अपने भविष्य को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। रति ने रुंधे गले से साफ लफ्जों में कहा कि वह अपने पति सुमित से अब कानूनी तौर पर तलाक लेंगी और जीवन में कभी भी वापस उस ससुराल के घर नहीं जाएंगी, जहां से उन्हें सिर्फ बेरुखी और प्रताड़ना मिली।
रति शर्मा ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि ससुराल पक्ष और पति की बेरुखी का आलम यह था कि उन्हें गर्भावस्था के दौरान ही मायके आना पड़ा था। उनके इकलौते बेटे आरव का जन्म भी ननिहाल में हुआ था, लेकिन सुमित या उसके परिवार का कोई सदस्य कभी बच्चे का मुंह देखने तक नहीं आया। यहां तक कि जब विराज ने मासूम आरव को इतनी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया, तब भी खून के रिश्तों की बेरुखी बरकरार रही और कोई अंतिम बार उसे देखने तक नहीं पहुंचा।
रति ने बताया कि उनके मायके वालों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। पिता अस्वस्थ रहते हैं। वह कुछ काम नहीं कर पाते, इसके अलावा भाई नाबालिग है। एक बहन भी अविवाहित है। मां पहले स्कूल में पढ़ाती थीं, वह भी अब नहीं जा पाती हैं। मामा धीरज, पवन, नीरज के सहारे किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं। ऐसे कठिन समय में अपने और परिवार के भरण-पोषण के लिए वह अब आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए नौकरी की तलाश कर रही हैं। पीड़ित मां ने उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी इस बेहद विकट परिस्थिति को देखते हुए उन्हें योग्यता के अनुसार कोई नौकरी और तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे इस गहरे सदमे से उबरकर अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकें।
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जिले की सियाराम नगर कॉलोनी निवासी आरव के पिता सुमित कुमार ने भावुक होकर कहा कि 39 रातों के बाद कल पहली बार ठीक से सो पाया हूं। अब बस आरोपी को फांसी पर लटकाने की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। हमारी जो बेचैनी बनी हुई है, वह उसके फांसी के फंदे पर लटकने के साथ ही खत्म होगी।
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बोले, न्यायालय और पुलिस की कार्रवाई से मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं। उन्होंने तेजी से कार्रवाई कर आरोपी को सजा दिलाई, जिसने मेरे बच्चे के साथ हैवानियत की उसे उसके अपराध की सजा तो मिलनी ही चाहिए थी। वहीं, आरव की दादी सीमा शर्मा ने मासूम की यादों को साझा करते हुए कहा कि हम उसे नहीं, बल्कि वो सबको खिलाता था। एक साल का होने के बाद भी बड़ों की बातें समझता था।
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बोलीं, पूरा परिवार उसी के आसपास रहता था। दिन में वह मेरे और उसकी मां के साथ रहता, जबकि रात में अपने ताऊ और चाचा के साथ खेलता रहता था। उन्होंने कहा कि 9 जनवरी 2026 को जब आरव घर से मां के साथ गया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि वह कभी वापस नहीं लौटेगा। उसका पहला जन्मदिन पूरे परिवार ने खुशी से मनाया था, लेकिन पिछले 40 दिनों में घर का माहौल पूरी तरह बदल गया।
उन्होंने कहा कि घर में खाना तक ठीक से नहीं बन पाया। चार लोगों के परिवार में एक महीने में एक किलो आटा भी ठीक से खर्च नहीं हुआ। अब फैसले से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन असली सुकून तब मिलेगा जब दोषी को फांसी दी जाएगी।
फैसले के बाद दोषी विराज से जेल में मिलने पहुंचे परिजन
बदायूं। शुक्रवार को फैसला आने के बाद शनिवार सुबह दोषी विराज से मिलने उसके भाई मुनीश और उसकी ताई (बड़ी मां) फिरोजाबाद जेल गए। भाई ने बताया कि विराज से मिलने के बाद वह अदालत से आदेश की कॉपी भी लेकर आए हैं। गांव में मिले दोषी विराज के बड़े भाई राजीव ने बताया कि मां को सबसे छोटे भाई के 14 साल की सजा होने की जानकारी देने पर शुक्रवार देर शाम को उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उनको बदायूं के अमर सिंह के पास से दवा दिलवाई। वहां फायदा नहीं होने पर उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। संवाद
आरव की मां का बड़ा फैसला...कहा-पति सुमित से लूंगी तलाक, अब कभी वापस नहीं जाना घर
- सरकार से लगाई नौकरी और आर्थिक सहायता की गुहार, मायके की आर्थिक हालत खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। शिकोहाबाद के बहुचर्चित आरव हत्याकांड में दरिंदे विराज को फांसी की सजा मिलने के बाद, मृत मासूम की मां रति शर्मा ने अपने भविष्य को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। रति ने रुंधे गले से साफ लफ्जों में कहा कि वह अपने पति सुमित से अब कानूनी तौर पर तलाक लेंगी और जीवन में कभी भी वापस उस ससुराल के घर नहीं जाएंगी, जहां से उन्हें सिर्फ बेरुखी और प्रताड़ना मिली।
रति शर्मा ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि ससुराल पक्ष और पति की बेरुखी का आलम यह था कि उन्हें गर्भावस्था के दौरान ही मायके आना पड़ा था। उनके इकलौते बेटे आरव का जन्म भी ननिहाल में हुआ था, लेकिन सुमित या उसके परिवार का कोई सदस्य कभी बच्चे का मुंह देखने तक नहीं आया। यहां तक कि जब विराज ने मासूम आरव को इतनी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया, तब भी खून के रिश्तों की बेरुखी बरकरार रही और कोई अंतिम बार उसे देखने तक नहीं पहुंचा।
रति ने बताया कि उनके मायके वालों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। पिता अस्वस्थ रहते हैं। वह कुछ काम नहीं कर पाते, इसके अलावा भाई नाबालिग है। एक बहन भी अविवाहित है। मां पहले स्कूल में पढ़ाती थीं, वह भी अब नहीं जा पाती हैं। मामा धीरज, पवन, नीरज के सहारे किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं। ऐसे कठिन समय में अपने और परिवार के भरण-पोषण के लिए वह अब आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए नौकरी की तलाश कर रही हैं। पीड़ित मां ने उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी इस बेहद विकट परिस्थिति को देखते हुए उन्हें योग्यता के अनुसार कोई नौकरी और तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे इस गहरे सदमे से उबरकर अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकें।