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दोषी को फांसी की सजा: आरव के पिता बोले- न्याय व्यवस्था पर भरोसा हुआ मजबूत; जानें विराज के भाइयों ने क्या कहा

Sat, 11 Jul 2026 12:39 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: Mukesh Kumar Updated Sat, 11 Jul 2026 12:39 PM IST
सार

मासूम आरव की हत्या करने वाले जितेंद्र पाठक उर्फ विराज को फांसी की सजा सुनाई गई है। इस पर आरव के परिवार ने संतुष्टि जताई। कहा कि उनका न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत हुआ है। वहीं विराज के भाइयों ने कहा कि जघन्य अपराध की सजा तो मिलनी ही थी। 

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Death penalty for the convict Aarav father says faith in the justice system has strengthened
आरव के पिता-ताऊ, दोषी विराज के भाई, दोषी विराज (क्रमश: बायें से दायें)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फिरोजाबाद के चर्चित आरव हत्याकांड में दोषी जितेंद्र पाठक उर्फ विराज को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। परिजनों ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत हुआ है। परिजनों ने दोषी को जल्द फांसी देने की मांग की है। 

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बदायूं के ककराला रोड स्थित सियाराम कॉलोनी निवासी आरव के पिता सुमित शर्मा ने कहा कि अदालत का फैसला आने से परिवार को न्याय मिला है। आरव की दादी सीमा शर्मा ने कहा कि मासूम की नृशंस हत्या ने पूरे परिवार को झकझोर दिया था। अब दोषी को कठोर सजा मिलने से न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत हुआ है। 
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आरव के ताऊ अंकित शर्मा ने कहा कि अदालत के फैसले का हम सम्मान करते हैं। हम सभी चाहते हैं कि दोषी विराज को फांसी की सजा का जल्द क्रियान्वयन हो, ताकि समाज में ऐसा जघन्य अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश जाए।

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'विराज को जघन्य अपराध की मिली सजा'  
डेढ़ साल के आरव की पटककर हत्या करने वाले अभियुक्त विराज को शुक्रवार को फिरोजाबाद के जिला जज की कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। जब यह सूचना अभियुक्त के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के शेखपुर स्थित घर में रहने वाले भाइयों को मिली तो परिवार में सन्नाटा छा गया। मां गुमसुम हो गईं। विराज के बड़े भाई ने कहा कि उसने जो जघन्य अपराध किया, उसकी तो सजा उसे मिलनी ही थी। विराज की मां को सजा के बारे में नहीं बताया गया है।   

विराज के पिता विशेंद्र पाठक का पहले ही निधन हो चुका है। वह मंदिर के पुजारी थे। सभी भाई पिता के पैतृक कार्य पूजा-पाठ और शादी-विवाह करने का काम करते हैं। अभियुक्त चार भाइयों में सबसे छोटा है। विराज को फांसी की सजा होने के बाद उसके बड़े भाई मुनीश पाठक ने बताया कि उसने जो जघन्य अपराध किया, उसे उसकी सजा मिली। 

संबंधित खबर- आरव की मां की गुहार: मेरे सामने लटकाया जाए दरिंदा विराज, कहा- चाहती हूं कि उसकी मौत का मंजर मैं आंखों से देखूं

मुनीश ने बताया कि विराज का दिमागी संतुलन सही नहीं था, जिसका इलाज चल रहा था। वह नशे का भी आदी हो गया था। वर्ष 2018 में दो मंजिल से गिरने के बाद उसका दिमागी संतुलन और बिगड़ गया था। इसी स्वभाव के कारण एक बार मुझे भी चोट पहुंचाने की कोशिश की थी। बात-बात कर गुस्सा करने की वजह से उसकी शादी नहीं कराई, जबकि रिश्ते कई आए थे। बरेली से काफी लंबा इलाज चला, लेकिन उसके स्वभाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। 

पड़ोसी भी रहे खामोश
अभियुक्त विराज को फांसी की सजा मिलने की सूचना पर पड़ोसियों से बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने भी कुछ बोलने से मना कर दिया। हालांकि उन्हें यह पता था कि विराज को फांसी की सजा क्यों हुई है।

मां को नहीं बताया फांसी के बारे में 
बड़े भाई मुनीश ने बताया कि फैसले के बारे में बीमार मां को पूरी जानकारी नहीं दी है। अभी ये जानकारी देंगे तो उनकी तबीयत और बिगड़ सकती है। मां से मिलने की बात पर तीनों भाइयों ने साफतौर पर इन्कार कर दिया। बातचीत के दौरान मां घर से निकलकर गेट तक आईं। इस बीच मुनीश ने मां से कहा कि क्यों परेशान होती हो, केवल 14 साल की सजा हुई है। इस पर मां रोने लगी। इसी बीच बड़े भाई राजीव मां को लेकर घर के अंदर चले गए। 

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