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Shahjahanpur News: देसी इलाज के नाम पर मरीजों से वसूली जा रही मोटी रकम
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देवकली। कई गांवों में कुछ लोग देसी जड़ी-बूटियों से लाइलाज बीमारियों के इलाज का दावा करते हुए स्वास्थ्य विभाग से पंजीकरण कराए बगैर अवैध रूप से आयुर्वेदिक अस्पताल चला रहे हैं। इलाज कराने वाले मरीजों से मोटी रकम वसूल की जा रही है, लेकिन लाभ नहीं होने से मरीज को खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
गहलुइया गांव के एक फार्म हाउस पर कई वर्षों से अवैध आयुर्वेदिक अस्पताल चल रहा है। अस्पताल के संचालक ने दवाएं बनाने के लिए जड़ी-बूटियां और तरह-तरह की घास लाने के लिए मामूली पगार पर दो कर्मचारी लगा रखे हैं। सुबह से लेकर शाम तक वहां मरीजों का तांता लगा रहता है।
देवकली के रवि प्रकाश अवस्थी ने बताया कि उन्होंने पेट में गैस के इलाज पर तीन बार में 2500 रुपये खर्च कर दिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। धर्मापुर की रीता देवी के अनुसार उनके गुर्दे में पथरी के इलाज के लिए 10 किलो नींबू के साथ दो हजार रुपये लिए गए, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसी प्रकार अख्तियारपुर गांव में भी कुछ लोग मरीजों को देसी दवा देकर उन्हें ठगी का शिकार बना रहे हैं।
स्थानीय राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. एचपी पांडेय ने बताया कि उन्हें इस बारे में जानकारी मिली है और जांच करने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। उन्होंने मरीजों से अंधविश्वास में पड़ने के बजाय राजकीय अस्पताल से दवाएं लेने का अनुरोध किया है।
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देवकली के रवि प्रकाश अवस्थी ने बताया कि उन्होंने पेट में गैस के इलाज पर तीन बार में 2500 रुपये खर्च कर दिए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। धर्मापुर की रीता देवी के अनुसार उनके गुर्दे में पथरी के इलाज के लिए 10 किलो नींबू के साथ दो हजार रुपये लिए गए, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसी प्रकार अख्तियारपुर गांव में भी कुछ लोग मरीजों को देसी दवा देकर उन्हें ठगी का शिकार बना रहे हैं।
स्थानीय राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. एचपी पांडेय ने बताया कि उन्हें इस बारे में जानकारी मिली है और जांच करने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। उन्होंने मरीजों से अंधविश्वास में पड़ने के बजाय राजकीय अस्पताल से दवाएं लेने का अनुरोध किया है।