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Budaun News: मामा बोले- योगी जी सीबीआई जांच कराओ या विकास दुबे की तरह मुझे मार दो
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बदायूं। पीलीभीत के पूरनपुर से पुलिस के साथ यहां एसएसपी से मिलने आए कंपनी अधिकारी रहे स्व. हर्षित मिश्रा के परिवार ने शहर में डीएम चौराहे के पास जमकर हंगामा किया। हर्षित के मामा विकास मिश्रा ने एक विधायक का नाम लेकर स्थानीय अधिकारियों पर बिरादरीवाद के तहत काम करने का आरोप लगाया। कहा कि उन्हें किसी अधिकारी पर भरोसा नहीं है। योगी जी, अगर बिरादरीवाद नहीं मानते तो आरोपी को भी वैसी ही मौत दें, जैसी विकास दुबे को दी। अन्यथा वह आत्मदाह कर लेंगे या उन्हें भी मार दें। डीएम और एसएसपी से बात के दौरान सीबीआई जांच की मांग पर अड़े परिजनों को आश्वासन मिला तो वह लौट गए।
हर्षित मिश्रा के पिता सुशील मिश्रा, मां रानी मिश्रा, पत्नी सुमति मिश्रा व मामा विकास मिश्रा समेत परिवार के करीब 15 लोग बदायूं एसएसपी से मिलने मंगलवार सुबह पूरनपुर स्थित अपने घर से कारों में रवाना हुए। पीलीभीत पुलिस की गाड़ी शुरू से उनके साथ चली। परिजनों ने दोपहर बाद बदायूं आकर डीएम चौराहे के पास हंगामा शुरू कर दिया।
अचानक वह विधायक व प्रधान के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इस दौरान काफी भीड़ जमा हो गई। तब विकास मिश्रा ने आरोप लगाया कि पहले पुलिस बरेली के एक थाने में ले जाने की बात कहकर घुमाती रही। बाद में उन्हें बदायूं लेकर चली।
बदायूं आने के बाद एसएसपी कार्यालय न लाकर उनको एक घंटे तक घुमाते रहे। सीधे एसएसपी के पास नहीं ले गए। इससे वह नाराज हो गए। हंगामा होने की सूचना पर स्थानीय पुलिस भी पहुंच गई। इसके बाद परिवार को तत्काल एसएसपी कार्यालय लाया गया। तत्काल ही वहां डीएम-एसएसपी समेत अन्य अधिकारी पहुंच गए और परिवार से मुलाकात की।
करीब दो घंटे तक अधिकारियों ने परिवार से बात की। परिवार की सीबीआई वाली मांग पर डीएम ने कहा कि इस पर शासन स्तर से ही निर्णय हो सकता है। वह उनकी मांग को आगे बढ़ाने का काम कर सकते हैं। उनको आश्वासन दिया कि पूरा प्रशासन पीड़ित परिवारों के साथ है। एसएसपी ने भी परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। शाम चार बजे के बाद परिवार के लोग अपनी कार व पुलिस के साथ पीलीभीत रवाना हो गए।
सुनियोजित कांड बताकर विधायक के भाई का लिया नाम
सुशील मिश्रा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हर्षित व सुधीर गुप्ता की हत्या जिस तरह से की गई है, ये केवल अजय प्रताप सिंह के बस का काम नहीं, बल्कि यह एक सुनियोजित तरीके से रचा हुआ कांड है। इसमें अजय के भाई व अन्य परिजन प्रत्यक्ष तौर पर शामिल हैं, जिनमें से कई उस वक्त प्लांट में विभिन्न पदों पर ड्यूटी कर रहे थे।
आरोप लगाया कि एक विधायक के भाई व प्रधान की शह पर घटना को अंजाम दिया गया। इस कंपनी के तीन बड़े अधिकारी भी घटना में लिप्त हैं, जिनमें से कुछ घटना के समय मौजूद थे। परिवार के लोगों ने मांग की कि जो भी चिह्नित आरोपी हैं, उनके नाम केस में शामिल कर विवेचना की जाए।
परिजन बोले- एसएसपी मिलना नहीं चाहती थीं तो बुलाया क्यों
हर्षित के परिवार को अपराह्न करीब दो बजे तक शहर में घुमाने के बाद पुलिस उन्हें उस वक्त एसएसपी दफ्तर लेकर पहुंची जब वह आवास पर निकल चुकी थीं। दफ्तर में जब एसएसपी के न होने का पता लगा तो हर्षित के मामा विकास मिश्रा का सब्र जवाब दे गया। उन्होंने पुलिसकर्मियों से सवाल किया कि जब एसएसपी ने उन्हें मिलने बुलाया है तो आप लोग बाधा क्यों खड़ी कर रहे हैं। या फिर साफ बताइए कि एसएसपी हमसे मिलना नहीं चाहतीं। तब पुलिस उनको एसएसपी के आवास पर ले जाने की बात करने लगी। परिवार के लोगों ने आवास पर ले जाते वक्त डीएम चौराहे पर हंगामा कर दिया। पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। हंगामा होता देख पीलीभीत पुलिस के हाथ-पैर फूल गए। तब बदायूं पुलिस की मदद ली गई। कार में बैठाकर पुलिस उनको पांच मिनट में ही एसएसपी कार्यालय लौटा लाई। फिर यहीं एसएसपी व डीएम भी पहुंच गए।
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हर्षित मिश्रा के पिता सुशील मिश्रा, मां रानी मिश्रा, पत्नी सुमति मिश्रा व मामा विकास मिश्रा समेत परिवार के करीब 15 लोग बदायूं एसएसपी से मिलने मंगलवार सुबह पूरनपुर स्थित अपने घर से कारों में रवाना हुए। पीलीभीत पुलिस की गाड़ी शुरू से उनके साथ चली। परिजनों ने दोपहर बाद बदायूं आकर डीएम चौराहे के पास हंगामा शुरू कर दिया।
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अचानक वह विधायक व प्रधान के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इस दौरान काफी भीड़ जमा हो गई। तब विकास मिश्रा ने आरोप लगाया कि पहले पुलिस बरेली के एक थाने में ले जाने की बात कहकर घुमाती रही। बाद में उन्हें बदायूं लेकर चली।
बदायूं आने के बाद एसएसपी कार्यालय न लाकर उनको एक घंटे तक घुमाते रहे। सीधे एसएसपी के पास नहीं ले गए। इससे वह नाराज हो गए। हंगामा होने की सूचना पर स्थानीय पुलिस भी पहुंच गई। इसके बाद परिवार को तत्काल एसएसपी कार्यालय लाया गया। तत्काल ही वहां डीएम-एसएसपी समेत अन्य अधिकारी पहुंच गए और परिवार से मुलाकात की।
करीब दो घंटे तक अधिकारियों ने परिवार से बात की। परिवार की सीबीआई वाली मांग पर डीएम ने कहा कि इस पर शासन स्तर से ही निर्णय हो सकता है। वह उनकी मांग को आगे बढ़ाने का काम कर सकते हैं। उनको आश्वासन दिया कि पूरा प्रशासन पीड़ित परिवारों के साथ है। एसएसपी ने भी परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। शाम चार बजे के बाद परिवार के लोग अपनी कार व पुलिस के साथ पीलीभीत रवाना हो गए।
सुनियोजित कांड बताकर विधायक के भाई का लिया नाम
सुशील मिश्रा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हर्षित व सुधीर गुप्ता की हत्या जिस तरह से की गई है, ये केवल अजय प्रताप सिंह के बस का काम नहीं, बल्कि यह एक सुनियोजित तरीके से रचा हुआ कांड है। इसमें अजय के भाई व अन्य परिजन प्रत्यक्ष तौर पर शामिल हैं, जिनमें से कई उस वक्त प्लांट में विभिन्न पदों पर ड्यूटी कर रहे थे।
आरोप लगाया कि एक विधायक के भाई व प्रधान की शह पर घटना को अंजाम दिया गया। इस कंपनी के तीन बड़े अधिकारी भी घटना में लिप्त हैं, जिनमें से कुछ घटना के समय मौजूद थे। परिवार के लोगों ने मांग की कि जो भी चिह्नित आरोपी हैं, उनके नाम केस में शामिल कर विवेचना की जाए।
परिजन बोले- एसएसपी मिलना नहीं चाहती थीं तो बुलाया क्यों
हर्षित के परिवार को अपराह्न करीब दो बजे तक शहर में घुमाने के बाद पुलिस उन्हें उस वक्त एसएसपी दफ्तर लेकर पहुंची जब वह आवास पर निकल चुकी थीं। दफ्तर में जब एसएसपी के न होने का पता लगा तो हर्षित के मामा विकास मिश्रा का सब्र जवाब दे गया। उन्होंने पुलिसकर्मियों से सवाल किया कि जब एसएसपी ने उन्हें मिलने बुलाया है तो आप लोग बाधा क्यों खड़ी कर रहे हैं। या फिर साफ बताइए कि एसएसपी हमसे मिलना नहीं चाहतीं। तब पुलिस उनको एसएसपी के आवास पर ले जाने की बात करने लगी। परिवार के लोगों ने आवास पर ले जाते वक्त डीएम चौराहे पर हंगामा कर दिया। पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। हंगामा होता देख पीलीभीत पुलिस के हाथ-पैर फूल गए। तब बदायूं पुलिस की मदद ली गई। कार में बैठाकर पुलिस उनको पांच मिनट में ही एसएसपी कार्यालय लौटा लाई। फिर यहीं एसएसपी व डीएम भी पहुंच गए।